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Guna-Shivpuri Election Result : कांग्रेसी गढ़ ढहा, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी हार

अपने खानदानी वर्चस्व को फिर साबित कर रहे हैं ज्योतिरादित्य?
अपने खानदानी वर्चस्व को फिर साबित कर रहे हैं ज्योतिरादित्य?

गुना-शिवपुरी लोकसभा नतीजे (Guna-Shivpuri Election Result): कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद युवा शक्तियों में दूसरे सबसे ताकतवर नेता माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव हार गए हैं.

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मध्य प्रदेश से कांग्रेस के लिए बेहद चौंकाने वाली खबर आ रही हैं. पार्टी के दिग्गज नेता और राहुल गांधी के बेहद करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव हार गए हैं. उन्हें बीजेपी उम्मीदवार कृष्णपाल सिंह यादव ने सवा लाख से ज्यादा मतों से मात दे दी है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ना केवल राहुल गांधी के बचपन के दोस्त हैं. बल्कि वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद युवा शक्तियों में नंबर दो माने जाते हैं. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद जनता ने उन्हें सीएम बनाने की मांग की थी. लेकिन राहुल गांधी ने उनको केंद्र की भूमिकाओं का हवाला देकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बना दिया था.

लोकसभा चुनाव 2019 में मध्य प्रदेश की गुना-शिवपुरी सीट का नतीजा आ गया है. यह राज्य काफी अरसे से भाजपा के गढ़ के तौर पर पहचाना जाता है, लेकिन मप्र की ये सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. सालों से यहां सिंधिया खानदान का ही वर्चस्व है. इस बार भी कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता ज्योतिरादित्य ही प्रत्याशी थे.



मध्य प्रदेश की राजनीति का एक बेहद जाना-पहचाना नाम हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया. ज्योतिरादित्य, उस सिंधिया राजघराने की तीसरी पीढ़ी के नेता हैं जिसकी पहचान प्रदेश से बढ़कर देश में है. वह दादी स्व. विजयाराजे सिंधिया और पिता स्व. माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत के वारिस हैं. हालांकि दादी और पिता दोनों का ताल्लुक़ दो अलग-अलग दलों से था. ज्योतिरादित्य की उम्र 48 साल है लेकिन उनका कद उससे कहीं बड़ा. ज्योतिरादित्य को पिता से राजनीति और क्रिकेट विरासत में मिले और दोनों को उन्होंने बखूबी संभाला.
ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की गुना-शिवपुरी सीट से सिटिंग सांसद और कांग्रेस के टिकट पर फिर प्रत्याशी हैं. उनका जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था. पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री थे. मां माधवी राजे, नेपाल राजघराने से ताल्लुक रखने वाली थीं, लेकिन राजनीति और सक्रिय सार्वजनिक जीवन से दूर.

मुंबई में पढ़ाई और राजनीति में एंट्री

ज्योतिरादित्य ने स्कूल एजुकेशन मुंबई से हासिल करने के बाद अमेरिका के स्टेनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिज़नेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. राजनीति में आने से पहले ही 23 साल की उम्र में गुजरात के गायकवाड़ परिवार की प्रियदर्शिनी राजे से उनका विवाह हुआ. ज्योतिरादित्य के दो बच्चे हैं अनन्या और महाआर्यमन सिंधिया, जो इस बार चुनाव में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे. दोनों ने पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए प्रचार किया.

पिता के निधन के बाद आए राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री दुखद हादसे का नतीजा थी. पिता माधवराव सिंधिया की सितंबर 2001 में यूपी के मैनपुरी में हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई थी. वो उस वक्त गुना-शिवपुरी से सांसद थे. उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाली और तबसे कांग्रेस के टिकट पर गुना-शिवपुरी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. वो पहली बार 2002 में सांसद चुने गए और तबसे लगातार इस सीट से जीत रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया 2006 में पहली बार संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी राज्यमंत्री बनाए गए और फिर बाद में वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री रहे.

विरोधी विचारधाराओं के फॉलोअर रहे घर में

ज्योतिरादित्य सिंधिया उस घराने का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसके सदस्य दो परस्पर विरोधी विचारधाराओं के फॉलोअर हैं. दादी विजयाराजे सिंधिया और पिता दोनों जनसंघ का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. विजयाराजे सिंधिया कभी कांग्रेसी थीं, बाद में इंदिरा गांधी से मतभेद के कारण जनसंघ में गई थीं. पिता माधवराव भी अपनी मां के साथ जनसंघ में थे.

1971 यानी ज्योतिरादित्य के जन्म के साल में माधवराव ने गुना सीट से जनसंघ के टिकट पर पहला चुनाव लड़ा था. संघ से उनकी पटरी नहीं बैठी और उन्होंने 1977 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते. 1980 में माधवराव कांग्रेस में शामिल हो गए, फिर जीवनभर कांग्रेसी रहे.

ज्योतिरादित्य की सियासी साख

ज्योतिरादित्य सिंधिया पूरी तरह कांग्रेसी हैं. राजनीति में कदम रखने के बाद से वो लगातार कांग्रेस में हैं. उनका कद राष्ट्रीय स्तर का है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वो बेहद करीब हैं. यही वजह है कि 2019 के इस लोकसभा चुनाव में उन्हें पश्चिम उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई.

ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने निर्वाचन क्षेत्र में महाराजा के नाम से लोकप्रिय हैं. इस क्षेत्र से पीढ़ियों का जुड़ाव होने के कारण लोगों से उनका सीधा संवाद है. वो लोगों को नाम से जानते हैं. उनसे सीधा संवाद करते हैं और उनका सुख-दुख पूछते हैं. सिंधिया लोगों से हंसी-मज़ाक करते हैं.

एमपीसीए के अध्यक्ष भी रहे

अपने पिता की तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया भी क्रिकेट के शौकीन हैं. वो लंबे समय तक मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के अध्यक्ष रहे हैं. राजनीति की व्यस्तता से अगर वक्त मिल जाए तो शौकिया तौर पर क्रिकेट ज़रूर खेलते हैं. गुना-शिवपुरी की जनता ने हाल ही में उनके शॉट्स देखे, जब चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ 5 ओवर का प्रदर्शनी मैच अपने निर्वाचन क्षेत्र में खेला.

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