रोजगार के लिए शहर गए बुजुर्ग को सरकारी खातों में मृत दर्ज कर जमीन बांट दी

सीधी जिले के सारो गांव का एक आदिवासी बुजुर्ग की 15 एकड़ जमीन पटवारी, तहसीलदार की मिली भगत से हड़प ली गई. यह जमीन दबंगों के हवाले कर दी गई जिससे आदिवासी बुजुर्ग कई साल से दफ्तरों के चक्कर लगा कर परेशान हो चुका है.

pawan tiwari | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 17, 2018, 7:02 PM IST
रोजगार के लिए शहर गए बुजुर्ग को सरकारी खातों में मृत दर्ज कर जमीन बांट दी
अपने परिवार के साथ बुजुर्ग, जिसकी जमीन उसे मृत बताकर हड़प ली
pawan tiwari | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 17, 2018, 7:02 PM IST
सीधी जिले के सारो गांव का एक आदिवासी बुजुर्ग की 15 एकड़ जमीन पटवारी, तहसीलदार की मिली भगत से हड़प ली गई. यह जमीन दबंगों के हवाले कर दी गई जिससे आदिवासी बुजुर्ग कई साल से दफ्तरों के चक्कर लगा कर परेशान हो चुका है.बुजुर्ग पांडु गौड़ गांव छोड़ कर रोजगार की तलाश में बाहर चला गया था. इधर पटवारी उपेंद्र सिंह ने पांडु को मृत मानते हुए उसकी 15 एकड़ जमीन मध्य प्रदेश शासन में विलय कर ली.यह जमीन कुछ दिन के बाद कमलभान, पंजाब सिहं और संतोष सिंह चौहान के हवाले कर दी गई.

इतना ही नहीं, इन तीनों को जमीन का पट्टा भी दे दिया गया जबकि आदिवासी परिवार इस जमीन में1961 से काबिज था.पीड़ित परिवार की माने तो पटवारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इसी पटवारी के चलते हमारी जमीन धोखा कर गांव के दबंगों के सुपुर्द कर दी गई. अब हम लोग एक-एक दाना के लिए मोहताज हो गए हैं. बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगा कर अब थक चुके हैं.

वहीं पटवारी का कहना है कि 2001 में यह बुजुर्ग गांव से बाहर चला गया था और 2012 में लौट कर घर वापस आ गया था. इसके कारण हमने पुनः प्रकरण चलाया है. एसडीएम की न्यायालय ने जमीन वापस करने का आदेश दे दिया गया है.वहीं पांडु राम गौड़ का कहना है कि जब हमारी जमीन पट्टे की है तो उसे दूसरे के हवाले कर देना कहाँ का न्याय है. इसके लिए जो दोषी हैं, उन अधिकारियों पर कार्यवाही होना चाहिए.
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