डोली से पहले निकली पिता की अर्थी, छोटी बेटी ने मुखाग्नि देकर निभाया बेटे का फर्ज, देखें Video

कहा जा रहा है कि मृतक का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो परिवार वालों का रो- रो कर बुड़ा हाल हो गाय.
कहा जा रहा है कि मृतक का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो परिवार वालों का रो- रो कर बुड़ा हाल हो गाय.

देवी दिन सोनी (Devi Deen Soni) के परिवार में बस दो बेटयां ही हैं. बड़ी बेटी का नाम रोशनी और सबसे लाडली बेटी का नाम चांदनी है. देवी दिन अपनी दोनों बेटियों को ही बेटों की तरह मानते थे.

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सीधी. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीधी जिले में एक बेटी (Daughter) ने अपने पिता को मुखाग्नि (Informant) देकर बेटा और बेटी के बीच के अंतर को मिटा दिया. सीधी के लालता चौराहे के रहने वाले देवी दीन सोनी (Devi Deen Soni) की मौत हो गई. ऐसे में उनकी छोटी बेटी चांदनी सोनी ने ही अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया. साथ ही बेटी होते हुए बेटे के फर्ज को भी निभाया और समाज के लिये मिसाल पेश की. अब इस घटना की चर्चा पूरे जिले में हो रही है. लोग चांदनी की प्रशंसा कर रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, लालता चौक स्थित पुराना बस स्टैंड निवासी देवी दीन सोनी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्हें परिवार द्वारा उपचार के लिए बनारस में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों द्वारा ठीक तरह से इलाज नहीं किया है. चिकित्सकों ने कोरोना वायरस का हवाला देकर देवी दीन सोनी की अस्पताल से छुट्टी कर दी. इसके बाद परिजन उन्हें लेकर सीधी चल दिए, लेकिन रास्ते में ही देवी दीन की मौत हो गई. ऐसे में देवी दिन के परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया.


बड़ी बेटी का नाम रोशनी और सबसे लाडली बेटी का नाम चांदनी है
देवी दिन के परिवार में बस दो बेटयां ही हैं. बड़ी बेटी का नाम रोशनी और सबसे लाडली बेटी का नाम चांदनी है. देवी दिन अपनी दोनों बेटियों को बेटों की तरह मानते थे. खास बात यह है कि घर में देवी दीन की बड़ी बेटी की शादी की तैयारी चल रही थी.  उसी बीच उन्हें बीमारी ने जकड़ लिया और उनकी मौत हो गई.



परिवार वालों का रो- रो कर बुड़ा हाल हो गाय
कहा जा रहा है कि मृतक का पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो परिवार वालों का रो- रो कर बुड़ा हाल हो गाय. ऐसे में बेटा न होने की चलते छोटी बेटी चांदनी को मुखाग्नि देने के लिए तैयार किया गया. चांदनी ने हिम्मत बांधी और अपने पिता की चिता को मुखाग्नि देकर बेटा होने का फर्ज अदा किया और समाज के लिए एक मिसाल पेश भी की. इतना ही नहीं बेटी चांदनी हर वह फर्ज अदा कर रही है, जो मृतक के अंतिम संस्कार के बाद हिंदू रीति- रिवाज के अनुसार किया जाता है. वहीं, पिता की चिता को मुखाग्नि देने निकली इस बेटी को देखकर अंतिम संस्कार में शामिल लोगों की आंखें भर आईं.
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