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सीधी बस हादसाः जिम्मेदार कौन, ड्राइवर या भ्रष्ट सिस्टम?

सीधी से सतना जा रही बस बाणसागर नहर में समा गई, जिसकी वजह से 54 लोगों को जान गंवानी पड़ी. (फाइल फोटो)

सीधी से सतना जा रही बस बाणसागर नहर में समा गई, जिसकी वजह से 54 लोगों को जान गंवानी पड़ी. (फाइल फोटो)

Sidhi Road Accident: पहली नजर में गलती ड्राइवर की लगती है, लेकिन आप हादसे की वजहों पर जाएंगे, तो पाएंगे कि इस हादसे का जिम्मेदार, गुनहगार हमारा सिस्टम और उसमें बैठे लोग हैं, जो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं, जो अनफिट बसों को फिट का परमिट दे देते हैं.

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सीधी. किसे मालूम था कि मंगलवार का दिन सीधी (Sidhi) से सतना जा रहे 42 मुसाफिरों के लिए मौत बनकर रास्ते में खड़ा है, वरना छुहियाघाटी की ऊबड़खाबड़, गड्डों से भरी सड़क, जाम का सामना करते हुए सीधी से रोज बस लेकर जाने वाला ड्राइवर अपना रूट बदलकर नहर की संकरी सड़क वाला शार्टकट क्यों अपनाता. क्यों बाणसागर परियोजना की नहर में बस गिरती. क्यों डेढ़ दर्जन के करीब महिलाओं, एक दर्जन छात्रों समेत करीब 45 लोगों की मौत पर कोहराम मचता. पहली नजर में गलती ड्राइवर की लगती है, लेकिन आप हादसे की वजहों पर जाएंगे, तो पाएंगे कि इस हादसे का जिम्मेदार, गुनहगार हमारा सिस्टम और उसमें बैठे लोग हैं, जो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं, जो अनफिट बसों को फिट का परमिट दे देते हैं.  सारे नियम-कायदे तोड़ने की खुली छूट दे देते हैं, न कोई जांच न पड़ताल.

32 की क्षमता वाली बस में भरी थीं 60 सवारियां

रीवा-सीधी बार्डर के पास छुहियाघाटी के नजदीक हुए इस हादसे के पीछे भी एक यही बड़ी वजह रही. जबलानाथ परिहार ट्रैवल्स की जो बस इस भयावह जानलेवा हादसे का शिकार हुई, उसकी क्षमता 32 सवारियां बैठाने की थी, लेकिन उसमें 60 सवारियां ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थीं, इसे देखने की जिम्मेदारी क्या परिवहन विभाग के कारिंदों की नहीं थीं? क्यों ऐसी बस को सीधी से निकलने दिया गया? क्यों उसका परमिट रद्द नहीं किया गया? कोई आज पहली बार तो इसने क्षमता से ज्यादा सवारियां नहीं भरी होंगी?

क्यों चुना मौत का रास्ता?

जिस रास्ते से रोज इस बस समेत तमाम वाहनों को गुजरना होता है, उसे आप सड़क तो कह ही नहीं सकते, बता दें कि सीधी से निकलते के बाद छुहिया घाटी से होते हुए बस को सतना तक जाना होता था. झांसी-रांची स्टेट हाईवे की सड़क बेहद खराब और अधूरी है, क्योंकि वहां सिर्फ गड्डे, पत्थर पड़े हैं, नतीजा रोज जाम की शक्ल में सामने आता है. इसी से बचने के लिए ड्र्राइवर ने रूट बदला और हादसा हो गया. सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैक्स देने वाली जनता को वहां अच्छी सड़क देने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह आत्मनिर्भर प्रदेश का जुमला मंतर की तरह दोहराने वाले नेताओं पर सवाल नहीं है?

बेरोजगारों का सफर बना मौत का सफर

जरा सोचिए उन परिवारों के बारे में जिनके घर के लाल इस हादसे ने छीन लिए. मरने वालों में करीब 12 बेरोजगार छात्र भी हैं, जो रेलवे एनटीपीसी की परीक्षा देने सतना जा रहे थे. हो सकता है कि बच्चे वक्त पर सतना पहुंच जाएं, यह सोचकर ड्राइवर ने नहर वाला शार्टकट पकड़ा हो? नहर के पास साइड लेने के दौरान ठसाठस और क्षमता से ज्यादा यात्रियों से भरी बस संतुलन खो बैठी और 22 से 25 फीट गहरी खाई वाली नहर में जा गिरी.

पहले भी इस रास्ते पर हो चुके हैं भीषण सड़क हादसे

1.सीधी-सतना के इस मार्ग पर अब तक कई हादसे हो चुके हैं. पहला हादसा साल 1988 में हुआ था. जब लिलजी बांध में बस जा गिरी थी. उस हादसे में 88 यात्रियों की मौत हुई थी.

2. दूसरा हादसा 18 नवंबर 2006 में हुआ था जब यात्रियों से भरी एक बस गोविंदगढ़ तालाब में गिर गई थी, इस दुर्घटना में 68 यात्रियों की मौत हुई थी. सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब यहां पहले भी हादसे हो चुके थे तो ड्राइवर ने लोगों की जान से खिलवाड़ क्यों किया? साथ ही प्रशासन इस रूट पर भारी वाहनों को प्रवेश कैसे देता है.

शिवराज, कमलनाथ ने जताया दुख

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है. सीधी हादसे की वजह से आज होने वाली कैबिनेट मीटिंग और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में गृह प्रवेश के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर इसकी सूचना दी है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि “सतना जा रही बस के नहर में गिरने से हुए हादसे में कई अनमोल जिंदगियों के काल कलवित होने के समाचार से दुखी हूं. बाकी यात्रियों के सुरक्षित होने की कामना करता हूं.” पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ट्वीट कर दुख जताया और सरकार से पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने का आग्रह किया.

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कांग्रेस ने मांगा परिवहन मंत्री का इस्तीफा

इस हादसे के बाद राज्य के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल किया है, कि प्रदेश में बुलंद होते माफिया के हौसलों को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्यों बसों की नियमित चेकिंग नहीं होती? कांग्रेस ने परिवहन मंत्री गोविन्द राजपूत के इस्तीफे की मांग की है. साथ ही सरकार द्वारा घोषित 5-5 लाख के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए 25-25 लाख रूपए का मुआवजा देने की मांग की है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)

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