लाइव टीवी

मध्य प्रदेश के इस जिले में बौने हो रहे बच्चे, NFHS रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली वजह

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 4, 2019, 7:11 PM IST
मध्य प्रदेश के इस जिले में बौने हो रहे बच्चे, NFHS रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली वजह
सीधी ज़िले के बच्चे कुपोषण और बौनेपन की समस्या से जूझ रहे हैं.

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (nfhs) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीधी ज़िले (Sidhi District) के 5 साल तक के बच्चों में 41.39 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार पाए गए हैं जबकि ज़िले में करीब 20 हज़ार बच्चे गम्भीर रूप से बौनेपन (Dwarfism) के शिकार हैं.

  • Share this:
सीधी. जिले (Sidhi District) में बच्चों में कुपोषण (Malnutrition) लगातार बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं. पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में सीधी ज़िले में करीब 2500 अति कुपोषित बच्चे पाए गए थे. इसके अलावा ज़िले के करीब 23 हजार बच्चों में बौनेपन (Dwarfism) के लक्षण पाए गए हैं. बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चलाई जा रही प्रशासन की अधिकांश योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं. इस पर भी जिम्मेदार विभागों की दलील है कि स्थिति सामान्य है और बच्चों का इलाज किया जा रहा है.

NFHS की रिपोर्ट में खुलासा
सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल बनी हुई है. पिछले दिनों कराए गए एक सर्वे में ज़िले में कुल 2518 बच्चे अति कुपोषित पाए गए थे. इस खबर से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आधार पर जिसमें 0 से 5 साल तक के बच्चों में 41.39 फीसदी बच्चे जिलेभर में कुपोषण के शिकार पाए गए हैं. जिले भर में 19,913 बच्चे गम्भीर रूप से बौनेपन का शिकार हो चुके हैं. मध्यम रूप से बौनेपन का शिकार हुए बच्चों की संख्या 23 हजार से अधिक है.

News - राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक सीधी ज़िले में 5 साल तक की उम्र के बच्चों में कुपोषण की शिकायत सबसे ज्यादा है
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक सीधी ज़िले में 5 साल तक की उम्र के बच्चों में कुपोषण की शिकायत सबसे ज्यादा है


आंगनबाड़ी केंद्रों का ताला तक नहीं खुलता
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हुई एक रिपोर्ट की मानें तो जिले में 58.8 प्रतिशत बच्चों की ऊंचाई सामान्य पाई गई है. जिला प्रशासन ने दस्तक अभियान का हवाला दिया जिसमें घर-घर जाकर इलाज की व्यवस्था की गई और पुनर्वास केंद्र बनाए गए. 80 बिस्तरों वाले इस कुपोषित पुनर्वास केंद्र में 14 दिन बच्चे को मां के साथ रखा जाता है और कुपोषित बच्चे का पोषण आहार देकर इलाज किया जाता है. ग्रामीण और शहरी इलाकों में महिला बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी के माध्यम से पोषण आहार बच्चों को दिया जाता है. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों में तो ताला तक नहीं खुलता.

जिम्मेवारों को परवाह नहीं
Loading...

जिला cmho से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'बच्चों का सौ फीसदी इलाज तो नहीं हो पायेगा. आंकड़े आते-जाते रहते हैं, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. बाकी जिले में कुपोषित बच्चों का इलाज किया जा रहा है. पुनर्वास केंद्रों में बच्चों को रखकर उनका इलाज किया जाता है.' महिला बाल विकास अधिकारी का कहना है कि जिले में 41.29 फीसदी कुपोषण बच्चे का प्रतिशत है, जो एक चिंता का विषय है. आज की स्थिति में संख्या कम हुई है जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

मंत्री ने अफसरों पर फोड़ा ठीकरा
कैबिनेट मंत्री और सिहावल विधायक कमलेश्वर पटेल का मानना है कि सीधी जिले में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई जिले में कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार में कुपोषण से निजात दिलाने के लिये तेजी से काम भी चल रहा है. शासन-प्रशासन द्वारा कुपोषण दूर करने के लिए लाखों खर्च कर अनेक योजनाएं शुरू की जाती है, लेकिन विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले की उदासीनता के चलते ये योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं. जिले में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अति कुपोषित पाया जाना बड़ी चिंता का सबब है. हालांकि जिम्मेदार अधिकारी और विभागों के अपने दावे हैं. उनकी दलील है कि कुपोषित बच्चों की संख्या कम करने की कोशिश की जा रही है.

(सीधी से हरीश द्विवेदी)

ये भी पढ़ें -
Honey Trap: आरोपी के पति का खुलासा, कहा- मेरी पत्नी के हाई प्रोफाइल मंत्रियों से संबंध, लेकिन...
शिवना किनारे बसे इस शहर की पुरानी इमारतों में दरार, लोगों में दहशत

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 4, 2019, 3:13 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...