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मध्य प्रदेश में फिर आ धमके छ्त्तीसगढ़ के उत्पाती हाथी, अब नेता भी सरकार से कह रहे हैं इनसे बचाइए...

ये हाथी 5 साल से सीधी में घुस आते हैं.
ये हाथी 5 साल से सीधी में घुस आते हैं.

हर साल हाथी (Elephant) यहां दिसंबर जनवरी के महीने में आते है और चार-पांच महीने रुकने के बाद फिर वापस छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) चले जाते हैं.

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सीधी.छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के उत्पाती हाथी (Elephants) अब मध्य प्रदेश में खौफ फैला रहे हैं.सीधी में संजय गांधी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पूरा दल डेरा डाले हुए है. गांव वाले अपनी जान-माल बचाने के लिए परेशान हैं.जिस इलाके में हाथी घूम रहे हैं उसमें करीब 20 गांव आते हैं.ये हाथी बस्तियों के साथ टाइगर रिजर्व के कैम्प को भी नुक़सान पहुंचाते हैं.

छ्त्तीसगढ़ के उत्पाती हाथी फिर से मध्य प्रदेश में आ धमके हैं. सीधी जिले के 20 से अधिक आदिवासी गांव के लोग इन हाथियों की दहशत में जी रहे हैं. ये सभी इलाके संजय गांधी टाइगर रिजर्व एरिया के आस-पास के इलाके के हैं. टाइगर रिजर्व के पोड़ी क्षेत्र में पिछले पांच साल से लगातार नये साल में ये हाथी यहां आ जाते हैं. उनके आते ही पूरा इलाका थर्रा उठता है. वन विभाग का अमला हो या आम जनता सब के लिए ये सिरदर्द हैं. झुंड में 7 हाथी हैं. ये छत्तीसगढ़ से चलकर जंगल के रास्ते टाइगर रिजर्व पहुंचते हैं.हाथियों का दल जंगल कच्चे बने मकानों और फसलों को तहस-नहस कर देता है. अगर इंसान सामने आ जाए तो उसे भी नहीं छोड़ता. घर में रखा अनाज, कच्चा लाहन ये नष्ट कर देते हैं. हाथी टाइगर रिजर्व के कैंप भी उजाड़ देते हैं.

पांच साल से आ रहे हैं हाथी
पिछले पांच साल में हाथी अब तक सैकड़ों आदिवासियों के कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा चुके हैं. टाइगर रिजर्व के तीन कैम्पों को उजाड़ चुके हैं.साथ ही दर्जन भर से अधिक लोगों को जख्मी कर दिया. एक आदिवासी की मौत भी हो चुकी है.लेकिन इतना सब होने के बाद भी इन हाथियों को कंट्रोल करने का कोई उपाय नहीं हो पाया है. बल्कि वन विभाग अब इन्हें यहीं रोकने की फिराक में है.



एक्शन प्लान की ज़रूरत
अधिकारियों का कहना है टाइगर रिजर्व इलाके में बांस और पानी की व्यवस्था है.इसलिए ये हाथियों के रुकने के लिए अच्छी जगह है.हर साल हाथी यहां दिसंबर जनवरी के महीने में आते है और चार-पांच महीने रुकने के बाद फिर वापस छत्तीसगढ़ चले जाते हैं. बीजेपी विधायक कुंवर सिंह टेकाम का कहना है इलाके में हाथियों की दहशत तो है. वन विभाग हाथियों को छत्तीसगढ़ वापस भेजता है. लेकिन अब प्रदेश सरकार को कोई ठोस कार्य योजना बनाएं ताकि हाथियों का यहां आना रोका जा सके.
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