पूरी हुई हमसफर की तलाश : बाघिन से मिलने के लिए दहाड़ मारकर बाड़े से कूदा बाघ, ये Video देखना न भूलें

संजय टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिन का कुनबा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

Sidhi. बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन SD 30 को इसी रेंज में रखा गया है. बाघ SD 27 को भी मोहन रेंज के खरसूती बीट में छोड़ा गया है. अब दोनों बाघ बाघिन आस पास के जंगलों में घूम रहे हैं.

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सीधी. सीधी स्थित संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay tiger reserve) की बाघिन को उसका हमसफर मिल गया है.बाघिन से मिलने के लिए बाघ दहाड़ा और अपने पिंजरे से बाहर छलांग लगा दी. और फिर छलांग लगाता हुआ बाघिन को ढूंढते हुए जंगल में चला गया है.

सीधी के संजय गांधी व्हाइट टाइगर मोहन रेंज में पिछले दिनों आई बाघिन को उसक हमसफर मिल गया है. जब बाघ मिलने पहुंचा तो एक लंबी दहाड़ के साथ ही छलांग लगाते हुए इधर उधर जंगल में बाघिन की तलाश करने लगा. अब व्हाइट टाइगर मोहन रेंज के जंगल में बाघ और बाघिन का जलवा रहेगा. इस क्षेत्र में एक लंबे अंतराल के बाद बाघिन SD-30 और उसके हमसफर बने बाघ SD-27 को रखा गया है. संजय टाइगर रिजर्व के CCF का मानना है कि इससे बाघों का कुनवा बढ़ेगा.

बाघों का कुनबा
सीधी के दुबरी संजय टाइगर में बाघों की भरमार है. यहां 15 से अधिक बाघ और बाघिन हैं. उसके साथ ही सात नन्हें शावक हैं जो सैनानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं. इस टाइगर रिजर्व में चार रेंज हैं. इसमें व्हाइट टाइगर मोहन रेंज का नाम सफेद टाइगर मोहन के नाम पर रखा गया है. लेकिन इस क्षेत्र से मोहन के रीवा राज घराने में चले जाने के बाद से ये सूना पड़ा था. एक लंबे अंतराल के बाद पिछले कुछ दिन से यहां बाघों का आना जाना होता था लेकिन बाघ यहां कभी ठहरते नहीं थे.

हमसफर का साथ
पिछले दिनों बांधवगढ़ से लाई गाई बाघिन  SD-30 को पहले एक बाड़े में रखा गया. उसके बाद उसे मोहन रेंज में 9 जून को छोड़ने की कवायद विभाग की ओर से की गयी.बाघिन 10 जून की सुबह उस रेंज में सैर पर निकली. फिर रिजर्व टीम ने उसके हमसफर की तलाश शुरू की जो 12 जून को सुबह पूरी हो गई. टीम ने बाघ SD -27 को बाघिन का हमसफर चुना. उसे जंगल से उठाकर उसी बाड़े में कैद किया जिस बाड़े में बाघिन को रखा गया था,ताकि बाघ बाघिन की आबो हवा से वाकिफ हो सके. उसके बाद बाघ को बाड़े से उस क्षेत्र में आजाद किया गया जहां वो अपने हमसफर से मिल सके.

कुनबा बढ़ाने की तैयारी
मोहन रेंज में पहुंचते ही बाघ ने एक लंबी दहाड़ के साथ बाड़े से छलांग लगा दी और दौड़ता हुआ बाघिन की तलाश करने लगा. संजय टाइगर रिजर्व के CCF, Y. P.सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुल चार कोर रेंज हैं. इसमें पोड़ी बस्तुआ और दुबरी रेंज में टाइगर रहते थे. मोहन रेंज में बाघ आते जाते थे लेकिन कभी वह ठहरते नहीं थे. इसलिए बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन SD 30 को इसी रेंज में रखा गया है. बाघ SD 27 को भी मोहन रेंज के खरसूती बीट में छोड़ा गया है. अब दोनों बाघ बाघिन आस पास के जंगलों में घूम रहे हैं. उनकी निगरानी के लिए दो अलग अलग टीमों को लगाया गया है, जो उनकी मानिटरिंग कर रहा है. बाघ बाघिन की मैटिंग का प्रयास किया जा रहा है ताकि उनका कुनबा बढ़ सके.

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