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बाढ़ पीड़ितों पर बरसे एसडीएम, कहा- बिना अनुमति आए तो दर्ज करा दूंगा केस !

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 4, 2019, 7:22 PM IST
बाढ़ पीड़ितों पर बरसे एसडीएम, कहा- बिना अनुमति आए तो दर्ज करा दूंगा केस !
एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंची महिलाओं को धमकाते हुए एसडीएम हरदा हरिसिंह चौधरी

ज्ञापन लेने पहुंचे एसडीएम हरिसिंह चौधरी महिलाओं पर भड़क गए और केस दर्ज कराने की धमकी दे डाली, फरियादी महिलाओं का कहना था कि एसडीएम चौधरी ने ही उनके क्षेत्र का पूरा दौरा किया था बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई...

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हरदा. बाढ़ और बारिश की मार झेल रही महिलाएं जब एसडीएम को ज्ञापन देने पहुंची तो उलटे उन्होंने उनको ही धमका दिया कि आइंदा बिना नोटिस के यहां आईं तो केस दर्ज करा देंगे. जी हां यह मामला हरदा के वार्ड क्रमांक 32 का है. बता दें कि हरदा जनपद के वार्ड क्रमांक 32 की रहने वाली महिलाएं शुक्रवार को कांग्रेस महिला सेवादल की अध्यक्ष के साथ कलेक्टर कार्यालय ज्ञापन देने पहुंची थीं.

मीडिया को देख ढीले पड़े तेवर
इन महिलाओं की मांग बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजे की मांग थी. जब महिलाओं का ज्ञापन लेने नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह उनके सामने पहुंचे तो वे एसडीएम (SDM) को बुलाने की मांग पर अड़ गईं. महिलाओं की जिद पर एसडीएम साहेब को आना नागवार गुजरा इसलिए उन्होंने उलटे फरियादी महिलाओं को ही धमका डाला लेकिन जब मीडिया को देखा तब उनके सुर बदलने लगे. news 18 संवाददाता के मुताबिक़ महिलाओं के बुलाने पर आए एसडीएम हरिसिंह चौधरी पहुंचते ही भड़क गए. उन्होंने कांग्रेस महिला सेवादल की जिला अध्यक्ष सुष्मिता चौहान को धमकाते हुए कहा कि 'अब बिना सूचना ज्ञापन देने कोई भी आया तो मामला रजिस्टर्ड करा दुगा. एसडीएम ने कांग्रेस नेत्री से आक्रामक होकर कहा कि आप ही लीडरशिप करते हुए दिखती हैं'. लेकिन मीडिया को देख कर एसडीएम साहेब के तेवर नरम पड़ गए और सफाई देते हुए बोले कि बिना सूचना ज्ञापन नहीं दिया जाता.

ये था मामला

हरदा के वार्ड 32 के सुदामा नगर की रहने वाली 20 से ज्यादा महिलाएं शुक्रवार को कांग्रेस की महिला सेवादल की जिलाध्यक्ष सुष्मिता चौहान के नेतृत्व में ज्ञापन देने कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं. ये सभी महिलाएं गत माह 9 अक्टूबर को हुई भारी बारिश (heavy rainfall) से नुकसान के सर्वे और मुवाअजे की मांग को लेकर पहुंची थी. फरियाद लेकर पहुंची महिलाओं से मिलने पहले नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह पहुंचे लेकिन महिलाओं ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन देकर अपनी फ़रियाद उनके सामने रखी. इन महिलाओं ने सर्वे की त्रुटियों को बताते हुए नायब तहसीलदार से दुबारा सर्वे की मांग की तो उनका जवाब यह था की वे एसडीएम साहब को ज्ञापन दे देंगे, फिर वे जैसा आदेश देंगे वैसा कार्य किया जाएगा.

नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह की बात सुन महिलाओं ने एसडीएम हरिसिंह चौधरी को बुलाने की जिद की. फरियादी महिलाओं का कहना था की एसडीएम चौधरी ने ही उनके क्षेत्र का पूरा दौरा किया था बावजूद इसके अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब वे अपनी बात उनके सामने ही रखेंगी. उसके बाद ये महिलाएं कलेक्टर परिसर में ही धरने पर बैठ गईं. कुछ समय बाद वहां पहुंचे एसडीएम एचएस चौधरी आते ही भड़क गए और उन्होंने जमीन पर बैठी कांग्रेस नेत्री सुष्मिता चौहान (District President of Congress Mahila Seva Dal Sushmita Chauhan) और महिलाओं को उंगली दिखाते हुए सीधे केस दर्ज कराने की धमकी दे डाली. इस पर कांग्रेस नेत्री ने जब महिलाओं का पक्ष रखना चाहा की तो एसडीएम ने उन पर महिलाओं को भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि 'जब भी वे गए हैं आप ही (कांग्रेस नेत्री सुष्मिता चौहान) लीडरशिप करती मिली हैं. अब मैं बिना सूचना दिए ज्ञापन देने पर केस रजिस्टर्ड करा दूंगा'.

हालांकि मीडिया के सामने नरम पड़ते हुए एसडीएम ने कहा कि ज्ञापन देने का तरीका होता है पहले सुचना दी जाती है. उन्होंने कहा आपको क्या पता वे कहां से आए हैं? कौन से जरूरी काम छोड़कर आए हैं. फिर उन्होंने महिलाओं को आश्वासन भी दिया कि 'सब्र रखें, सबका काम होगा'. अब ऐसे में सब्र रखने के सिवा फरियादियों के पास चारा ही क्या है ?
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कांग्रेस नेत्री का छलका दर्द
एसडीएम के रवैये से आहत कांग्रेस महिला सेवादल की जिलाध्यक्ष सुष्मिता चौहान ने कहा कि एसडीएम ने उनसे धमकी भरे लहजे में बात की है. ये महिलाएं पिछले एक माह से परेशान हैं. उनके घरों में खाने को भी नहीं है, आज महिलाओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर उन्हें कॉल करके बुलाया था. उन्होंने कहा अगर महिलाएं जानकारी के आभाव में पहले से एप्लिकेशन नहीं दे पाई तो एसडीएम को इस तरह बात नहीं करनी चाहिए. यह लोकतंत्र है जनता अपनी बात रख सकती है. उन्होंने कहा कि एक माह हो गए हैं लेकिन इन महिलाओं की कोई सुनवाई नहीं हुई.

एसडीएम की सफाई!
news 18 के सवालों के जवाब में एसडीएम हरिसिंह चौधरी ने कहा कि बात कहने का अधिकारी सबको है पर वे ऑफिस आए, उन्होंने कहा कि पहले भी यह मैडम (कांग्रेस नेत्री ) चाहे जहां बैठ जाती हैं. पहले भी इन्होने महिलाओं को रोड पर बैठा दिया था. हर व्यक्ति बात कहने का अधिकारी है और मेरे ऑफिस में आ सकता है. मेरे नायब तहसीलदार ने ज्ञापन लेने का प्रयास किया तो बोले कि हम तो एसडीएम साहब को ज्ञापन देंगे अगर अधिकारी ज्ञापन ले रहा है तो देना चाहिए.

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First published: October 4, 2019, 7:19 PM IST
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