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बुंदेलखंड ग्राउण्ड रिपोर्टः महीने में एक बार होती है पानी की सप्लाई

उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा ने बुंदेलखंड में ऐतिहासिक सफलता हासिल की. इस सूखाग्रस्त इलाके में एमपी के विकास का मॉडल को लेकर खूब प्रचार किया था. यूपी में मतगणना के ठीक एक पखवाड़े के बाद न्यूज18 टीम ने मध्य प्रदेश के तहत आने वाले बुंदेलखंड का जायजा लिया.

उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा ने बुंदेलखंड में ऐतिहासिक सफलता हासिल की. इस सूखाग्रस्त इलाके में एमपी के विकास का मॉडल को लेकर खूब प्रचार किया था. यूपी में मतगणना के ठीक एक पखवाड़े के बाद न्यूज18 टीम ने मध्य प्रदेश के तहत आने वाले बुंदेलखंड का जायजा लिया.

उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा ने बुंदेलखंड में ऐतिहासिक सफलता हासिल की. इस सूखाग्रस्त इलाके में एमपी के विकास का मॉडल को लेकर खूब प्रचार किया था. यूपी में मतगणना के ठीक एक पखवाड़े के बाद न्यूज18 टीम ने मध्य प्रदेश के तहत आने वाले बुंदेलखंड का जायजा लिया.

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    उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा ने बुंदेलखंड में ऐतिहासिक सफलता हासिल की. इस सूखाग्रस्त इलाके में एमपी के विकास का मॉडल को लेकर खूब प्रचार किया था. नतीजा यह रहा कि भाजपा ने यहां सभी 19 सीटें जीत इतिहास रच दिया.

    यूपी में मतगणना के ठीक एक पखवाड़े के बाद न्यूज18 टीम ने मध्य प्रदेश के तहत आने वाले 'बुंदेलखंड' का जायजा लिया, जहां गरमी शुरू होते ही लाखों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जद्दोजहद में जुटे हैं. बुंदेलखंड के तहत आने वाले छह जिलों में से अधिकांश जगह पानी को लेकर बेहद खराब हालात है.

    एक महीने में एक बार नल से पानी की सप्लाई

    टीकमगढ़ जिले के ग्रामीण अंचलों में घंटों इंतजार करने के बाद ग्रामीणों को पानी नसीब हो रहा है. जिले के मोहनगढ़, बनगाय, दिगौडा और निवाडी में गरमी शुरू होने के पहले ही जलसंकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. जिले के बनगाय में तो हालत ये है कि आठ में से छह हैंडपंप सूख गए है. दो हैंडपंप पर घंटों इंतजार के बाद एक डिब्बा पानी नसीब हो रहा है.

    निवाडी के हालात तो इससे भी बुरे है. यहां एक महीने में एक बार नल से पानी की सप्लाई हो रही है. लोग 200 लीटर की टंकी 20 रुपए और एक डिब्बा पानी दो रुपए में खरीद कर गुजारा कर रहे है.

    नाम 'सागर', फिर भी पानी की किल्लत

    बुंदेलखंड के सबसे बड़े शहर सागर के हालात भी बिगड़ते जा रहे है. यहां पिछले 60 दिनों में बमुश्किल 20 दिन पानी की सप्लाई हुई है. शहर में लीकेज मरम्मत के नाम पर नगर निगम ने पानी अघोषित कटौती शुरू कर दी गई है.

    राजघाट का लेवल घटने के बाद प्रशासन आधिकारिक तौर पर कटौती प्लान जारी नहीं करते हुए लीकेज मरम्मत के नाम पर कटौती कर रहा है. शहर में पहले से ही एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई होती है, लेकिन तीन-तीन दिन अघोषित कटौती की जा रही है.

    छतरपुर में कलेक्टर के आदेश, 'पानी का इंतजाम करो'

    बुंदेलखंड के तहत आने वाले छतरपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में दिन-प्रतिदिन हालात बदतर होते जा रहे है. यहां के बकस्वाहा में हालात सबसे खराब है. जहां लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए दिन-रात मशक्कत करनी पड़ रही है. खास बात है कि इस बार अच्छी बारिश होने के बावजूद जलसंकट दूर नहीं हुआ है. हालात की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रमेश भंडारी ने सभी अधिकारियों को जरूरी इंतजाम करने के लिए निर्देश जारी कर दिए है.

    पन्ना में भी संकट के बादल

    अंचल के पन्ना जिले के ग्रामीण इलाकों में भी मार्च महीने में जलसंकट गहराने लगा है. जिले के कल्दा पठार इलाके में खासतौर पर पानी की किल्लत महसूस की जा रही है. वहीं, जिले के बाकी इलाकों में भी अप्रैल और मई में पानी का संकट बढ़ने की आशंका है.

    दतिया के ग्रामीण अंचल के हालत बदतर

    ग्वालियर-चंबल अंचल से सटे दतिया जिले के ग्रामीण इलाकों में भी हालात कुछ खास अच्छे नहीं है. यहां कई जगहों पर पानी के लिए मशक्कत करना आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है.

    दमोह में हालात बेहतर

    इस अंचल के तहत आने वाले दमोह जिले में हालात थोड़े बेहतर है. लेकिन गरमी के तीन महीने यहां के लोगों के लिए भी आसान नहीं रहने वाले है. आशंका जताई जा रही है कि अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से यहां लोगों के लिए जरूरत का पानी मिलना आसान नहीं होगा.

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