जब तीन थानों की पुलिस लेकर दुल्हन लेने पहुंचा दूल्हा
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जब तीन थानों की पुलिस लेकर दुल्हन लेने पहुंचा दूल्हा
पुलिस के साये में दलित की शादी

शादी में दूल्हा जब पुलिस बल के साथ पहुंचा तो देखने वाले हैरान रह गए. लेकिन दूल्हे के लिए ऐसा करना मजबूरी थी, वर्ना शायद उसकी शादी ही नहीं हो पाती.

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शादी में दूल्हा जब पुलिस बल के साथ पहुंचा तो देखने वाले हैरान रह गए. लेकिन दूल्हे के लिए ऐसा करना मजबूरी थी, वर्ना शायद उसकी शादी ही नहीं हो पाती.

हर पिता का सपना होता है कि उसकी बेटी की शादी धूमधाम से हो. मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले के माणा गांव में रहने वाले चंदर ने भी अपनी बेटी ममता के लिए ऐसा ही सपना देखा था. शादी के दिन जैसे-जैसे करीब आए तो गांव के दबंगों ने शादी में बैंड-बाजा नहीं बजाने का फरमान सुना दिया.

दरअसल, माणा गांव के दबंगों ने परंपरा बना रखी है कि किसी भी दलित परिवार में शादी के दौरान बैंड-बाजे नहीं बजेंगे. शादी का जश्न मनाने पर चंदर को गांव में मिलने वाली सुविधाएं जैसे आम रास्ते से निकलना, कुएं का पानी और मवेशियों को चराने की सुविधा छिनने के साथ ही परिवार का हुक्का-पानी बंद करने की धमकी दी गई.



चंदर ने बेटी की खुशियों पर ग्रहण लगते देख दबंगों के आगे घुटने टेकने के बजाए पुलिस और प्रशासन की शरण ली. चंदर की शिकायत का असर ये हुआ कि रविवार को ममता की शादी के दिन तीन पुलिस थानों का बल गांव में तैनात किया गया. इसके अलावा पुलिस और प्रशासन के अफसर भी इस शादी में बाराती बनकर शामिल हुए.
सांस रोकने के खेल में सचमुच रुक गई सांसें

बैंड-बाजे के साथ बारात जब निकली तो दूल्हा मोटर साइकिल पर सवार होकर आया. उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस के जवान डंडे, बंदूक और आंसू गैस के गोले लेकर मुस्तैद रहे.

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शादी की रस्में पूरी कर पहली बार दलित परिवार की किसी बेटी की विदाई धूमधाम से की गई, जिसकी खुशी चंदर के चेहरे पर भी साफ देखी जा सकती थी.
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