अयोध्या के राम मंदिर में जींस पहनकर जा सकेंगी लड़कियां, नहीं होगा कोई ड्रेस कोड

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव राय ने राम मंदिर के कई पहलुओं पर चर्चा की.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव राय ने राम मंदिर के कई पहलुओं पर चर्चा की.

अयोध्या में श्रीराम का मंदिर 3 साल में बन जाएगा. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर में लड़कियां जींस भी पहनकर आ सकती हैं. महिलाओं के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं होगा.

  • Last Updated: March 21, 2021, 4:46 PM IST
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उज्जैन. अयोध्या में बन रहे श्रीराम के मंदिर में लड़कियां जींस पहनकर जा सकेंगी. मंदिर के लिए कोई ड्रेस कोड नहीं होगा. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि ड्रेस कोड तो दक्षिण के मंदिरो में होता है. यहां महिलाओं को पूरी आजादी मिलेगी. स्कूल में जीन्स पहनने वाली बच्चियों को मंदिर में कौन रोकेगा.

राय रविवार को महाकाल के दर्शन करने यहां आए थे. उन्होंने मंदिर परिसर के बाहर मीडिया से खुलकर बात की. इसके बाद वे आचार्य मुनि विद्यासागर जी से मिलने रवाना हो गए. उन्होंने कहा-  राम मंदिर के निर्माण के बाद रोज करीब 50 हजार श्रद्धालु दर्शन करने आएंगे. उनसे जब नेताओं के लड़कियों की जींस पर टिप्पणी का सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कर दिया कि राम मंदिर में कोई भी ड्रेस कोड लागू नहीं होगा.

3 सालों में हो जाएगा मंदिर का निर्माण

ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि राम मंदिर का  निर्माण 3 साल में पूरा होगा. मंदिर की तैयारी बहुत अच्छी चल रही है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ये लड़ाई मंदिर निर्माण की लड़ाई नहीं थी, बल्कि, भारत के सम्मान की लड़ाई थी. 500 साल की ग्लानि यात्रा का गौरव यात्रा के रूप में समापन हुआ है. ये पूरा मंदिर पत्थरों का होगा, जिसमें बुजुर्गों के लिए रेम और लिफ्ट भी लगाई जाएगी.
मंदिर निर्माण के लिए मिर्जापुर से लाए जाएंगे नींव के पत्थर

मंदिर निर्माण के लिए मिर्जापुर से पत्थर और जोधपुर के सैंड स्टोन लाए जा रहे हैं. इन पत्थरों का उपयोग राम मंदिर के लिए खोदी गयी नींव को भरने के लिए किया जाएगा. यह अनुमान भी लगाया गया था कि मार्च तक राम मंदिर की नींव खुदाई का काम पूरा हो जाएगा. बुनियाद के लिए मजबूत मिट्टी भी मिल चुकी है. मार्च में टेस्टिंग के बाद अप्रैल में राम मंदिर की नीव का कार्य शुरू हो जाएगा. इसमें सबसे पहले खोदी गई भूमि की पत्थरों और मटेरियल से भरने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें बड़ी मात्रा में पत्थरों का उपयोग होगा. इसीलिए पत्थरों को राम जन्मभूमि परिसर की अस्थाई कार्यशाला में एकत्रित किया जाएगा और वही से उसे उठाकर नींव में भरा जाएगा.
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