21 जून सबसे बड़ा दिन-छोटी रात : बादलों ने कर दिया 'खेला', नहीं दिखी गायब होती परछाई

लोग इंतजार ही करते रहे और बादलों ने सारा खेल बिगाड़ दिया.

भारत में चार वेधशाला हैं. इसमें से एक उज्जैन में स्थित है. यहां कालगणना का केंद्र होने के साथ ही कर्क रेखा उज्जैन से होकर गुजरी है. इसलिए खगोलीय दृष्टि से इसका महत्व बढ़ जाता है.

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उज्जैन. हमारी परछाई (Shadow) कभी भी हमारा साथ नहीं छोड़ती. लेकिन 21 जून को हर साल कुछ समय के लिए परछाई हमारा साथ छोड़ देती है. ऐसा इस कारण होता है क्योंकि सूर्य (Sun) कर्क रेखा पर लम्बवत स्थिति में रहता है. उज्जैन के ऊपर से कर्क रेखा गुजरती है. इसलिए यहां खास तौर से ये नजारा देखा जाता है. लेकिन इस साल सूरज की बादलों से लुका-छिपी ने निराश किया. प्रकृति का ये अदभुत नजारा नहीं दिख पाया.

पृथ्वी सूर्य के चारों और परिक्रमा करती है. 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लंबत रहता है. इसलिए परछाई आप का साथ छोड़ देती है. ऐसा सिर्फ मुश्किल से एक मिनट के लिए होता है. इस दिन हर साल उज्जैन की जीवाजी वेध शाला में इसका नजारा किया जाता है. लेकिन इस बार मौसम ने साथ नहीं दिया. बादल होने के कारण सूरज बार बार बादलों की ओट में चला गया. इसलिए वो एक मिनट का समय इसी लुकाछिपी में चला गया. परछाई के गायब होने का दृश्य कोई भी नहीं देख पाया.

इस कारण गायब होती है परछाई
उज्जैन स्थित जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक राजेंद्र गुप्त ने बताया की पृथ्वी सूर्य के चारों और परिक्रमा करती है 21 या 22 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत स्थिति में रहता है. इस बार 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत था. उसकी चरम क्रांति 23 डिग्री 26 मिनिट 15 सैकेंड थी. इसलिए कर्क रेखा के नजदीक जितने भी स्थान हैं वहां आज दोपहर 12 बजे के लगभग परछाई नहीं दिखाई देती.

13 घंटे 34 मिनिट का दिन
उज्जैन में ये स्थिति दोपहर 12.28 पर होना थी. इस स्थिति को शंकु यंत्र के माधयम से देखा गया. आज उत्तरी गोलर्ध में सबसे बड़ा दिन है. उज्जैन में आज 13 घंटे 34 मिनिट का दिन और 10 घण्टे 26 मिनिट की रात होगी. आज से सूर्य दक्षिण की और गति करना प्रारम्भ कर देता है जिससे दिन छोटा और रात बड़ी हो जाती है. इसके बाद 23 सितम्बर को 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होगी.

4 वेध शाला
भारत में चार वेधशाला हैं. इसमें से एक उज्जैन में स्थित है. यहां कालगणना का केंद्र होने के साथ ही कर्क रेखा उज्जैन से होकर गुजरी है इसलिए भी इसका महत्व बढ़ जाता है. कर्क रेखा पर स्थित शंकु यंत्र पर 21 जून को 12 बजकर 26 मिनट पर पड़ने वाली सूर्य की किरण गायब ही जाती है. जब सूर्य भूमध्य रेखा पर आता है, तो पूरे विश्व में दिन और रात बराबर होते हैं. इस खगोलीय घटना के कारण भूमध्य रेखा और कर्क रेखा के बीच रहने वाले लोगों की दोपहर में सूर्य की रोशनी से परछाई नहीं बनती. उज्जैन के जीवाजी वेधशाला पर लोगों को इस खगोलीय नजारे को दिखाने की तैयारी की गयी थी. लेकिन सबको बादलों ने निराश कर दिया.

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