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उज्जैन में मना रेल इंजनों के 'दादाजी' का जन्मदिन, अफसरों और कुली सबने मिलकर गाया-Happy birthday to you...

ये इंजन रिटायरमेंट के बाद 14 साल से उज्जैन स्टेशन पर खड़ा है.
ये इंजन रिटायरमेंट के बाद 14 साल से उज्जैन स्टेशन पर खड़ा है.

Oldest Rail Engine: इस इंजन की खासियत ये है कि ये जिस नैरोगेज ट्रेन में लगा, उसमें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सिंधिया घराने के जीवाजीराव सिंधिया जैसी हस्तियां सफर कर चुके हैं.

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उज्जैन. उज्जैन (Ujjain) में आज रेल इंजन का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया. इंजन 87 साल का हो चला है. उसके जन्मदिन (Birthday) के जश्न में रेलवे अधिकारी से लेकर कुली तक शामिल हुए.सबने मिलकर केक काटा. 87 साल पहले रेलवे में अपनी सेवा दे चुका यह इंजन 14 साल से उज्जैन रेलवे स्टेशन के बाहर रखा है. इस इंजन का यहां का स्टाफ हर साल जन्मदिन मनाता है. स्टेशन स्टाफ कुलियों संग केक काट कर यादें ताज़ा करता है. इस इंजन की खासियत ये है कि ये जिस नैरोगेज ट्रेन में लगा उसमें देश के पहले और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सिंधिया घराने के जीवाजीराव सिंधिया जैसी हस्तियां सफर कर चुके हैं.

उज्जैन-आगर के बीच 70 के दशक के पूर्व नैरोगेज ट्रेन चलती थी. 87 साल पूर्व भाप का इंजन उज्जैन और आगर के बीच चला करता था. नैरोगेज ट्रेन बंद होने के बाद से ही इंजन बेकार हो गया. और 14 साल से रेलवे के उज्जैन डिपो में खड़ा था. इसे 2006 में याद के रूप में स्टेशन परिसर के बाहर खड़ा कर दिया गया.तब से ही रेलवे स्टाफ और कुली इस इंजन का जन्मदिन मनाते आ रहे हैं.

जश्न में शामिल जनता
हर साल की तरह इस साल भी इंजन को फूल-मालाओं से सजाया गया और कुलियों संग केक काट कर रेलवे स्टाफ ने इस पल को यादगार बनाया. कुली शफी बाबा के अुनसार उन्होंने इस ट्रेन में चाय बेची थी और इस इंजन के साथ उनकी बरसों की यादें जुड़ी हुई हैं. इसलिए वो हर साल इस भाप इंजन का जन्म दिन मनाते हैं. इंजन के जन्मदिन के इस जलसे में बड़ी संख्या में शहर के लोग भी इकट्ठे होते हैं.हालांकि कोरोना के कारण इस बार किसी को आमंत्रित नहीं किया गया था.
ट्रेन में सफर कर चुकी हस्तियां


ये भाप इंजन दरअसल सिंधिया घराने के तत्कालीन महाराज जीवाजीराव सिंधिया की धरोहर है. कुली शफी बाबा के अनुसार ये भाप इंजन यहां चलने वाली नैरोगेज ट्रेन में लगाया जाता था. उस ट्रेन में देश के पहले और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने भी सफर किया था. कभी स्वयं जीवाजीराव सिंधिया भी उस ट्रेन में सवार हुए थे.इस इंजन की हर साल जनवरी में वर्षगांठ मनायी जाती है.

इंजन की खूबियां
उज्जैन से आगर और आगर से उज्जैन के बीच करीब 70-80 किमी चलने वाले इस भाप इंजन में 22 खूबियां हैं.ये जेड-बी टाइप का इंजन है जिसका नंबर 77 है.इसकी कुल 20 साल की सर्विस रही. वॉटर कैपेसिटी 1300 गैलन और कोयले की क्षमता 2.25 टन है. इंजन का कुल वजन 27.5 टन. इसे डब्ल्यू.जी. बैगनालिट्टो ने बनाया था. उस वक्त इसे बनाने में 1 लाख 61 हजार 276 रुपए खर्च हुए थे. 13 अप्रैल 1988 को इसने आखिरी सफर तय किया था. उसके बाद रेलवे डिपो में खड़ा रहा और फिर 25 जून 2006 को इसे उज्जैन स्टेशन पर लाकर खड़ा कर दिया गया.
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