• Home
  • »
  • News
  • »
  • madhya-pradesh
  • »
  • शनिचरी अमावस्या: MP के इस जिले में उड़ी कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां, शनि मनाकर ही माने लोग

शनिचरी अमावस्या: MP के इस जिले में उड़ी कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां, शनि मनाकर ही माने लोग

एमपी के उज्जैन में शनिचरी अमावस्या पर लगा कि यहां कोरोना नहीं है.

Shanichari Amavasya News: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में शनिचरी अमावस्या पर लोगों ने घाटों पर स्नान किया. प्रशासन के मना करने के बावजूद लोग नहीं माने. लोगों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया. प्रशासन इनके सामने बेबस नजर आया.

  • Share this:
उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन से बड़ी खबर है. यहां शनिचरी अमावस्या पर प्रशासन के मना करने के बावजूद लोग घाटों पर भारी भीड़ पहुंच गई. किसी भी श्रद्धालु को शिप्रा नदी के त्रिवेणी और राम घाट पर स्नान की इजाजत नहीं थी. लेकिन, लोग नहीं माने. शनिवार को सुबह  देखते ही देखते घाटों पर भीड़ जुटना शुरू हो गई और लोगों ने स्नान किया.

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के चलते कलेक्टर ने दो दिन पहले ही आदेश जारी कर स्नान और भीड़ इकट्ठी करने पर प्रतिबंध लगा दिया था. प्रशासन एक दिन पहले तक सचेत भी दिखाई दिया. क्योंकि, इस बार दो अमावस्या होने से ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना ज्यादा थी. इसीके मद्देनजर शिप्रा नदी के राम घाट और त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालुओं के आने पर प्रतिबंध लगा दिया था. प्रशासन ने घाट की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड भी लगा दिए, लेकिन लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा. लोगों ने कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाईं और स्नान किया.

शनिदेव ने भोलेनाथ से क्या मांगा था वरदान
शनिदेव न्याय के देवता कहे जाते हैं. शनि देव ने भगवान शिव (Lord Shiva) से वर मांगा था, 'मुझे सूर्य से अधिक शक्तिशाली व पूज्य होने का वरदान दें. इसपर शिव जी ने कहा कि तुम नौ ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान पाने के साथ ही सर्वोच्च न्यायाधीश व दंडाधिकारी रहोगे. साधारण मानव तो क्या देवता, असुर, सिद्ध, विद्याधर, गंधर्व व नाग सभी तुम्हारे नाम से भयभीत होंगे.' मान्यता के अनुसार, शनिवार के दिन शनि देव शनिदेव को तेल और एक रुपये (Offer 1 Re. and Oil On Shani Dev) चढ़ाने से उनकी कृपा मिलती है. आइए जानते हैं शनिदेव के जन्म की कथा...

मां की तपस्या से शनि का वर्ण हुआ काला
पौराणिक कथा के अनुसार, कश्यप मुनि के वंशज भगवान सूर्यनारायण की पत्नी स्वर्णा (छाया) की कठोर तपस्या से ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि का जन्म हुआ. माता ने शंकर जी की कठोर तपस्या की. तेज गर्मी व धूप के कारण माता के गर्भ में स्थित शनि का वर्ण काला हो गया. पर इस तप ने बालक शनि को अद्भुत व अपार शक्ति से युक्त कर दिया.

सूर्य देव ने पत्नी छाया पर जताया संदेह
सेएक बार जब भगवान सूर्य पत्नी छाया से मिलने गए तब शनि ने उनके तेज के कारण अपने नेत्र बंद कर लिए. सूर्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से इसे देखा व पाया कि उनका पुत्र तो काला है जो उनका नहीं हो सकता. सूर्य ने छाया से अपना यह संदेह व्यक्त भी कर दिया. इस कारण शनि के मन में अपने पिता के प्रति शत्रुवत भाव पैदा हो गए. शनि के जन्म के बाद पिता ने कभी उनके साथ पुत्रवत प्रेम प्रदर्शित नहीं किया. इस पर शनि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया.

इस तरह बन गए सर्वोच्च न्यायाधीश-दंडाधिकारी
जब भगवान शिव ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो शनि ने कहा कि पिता सूर्य ने मेरी माता का अनादर कर उसे प्रताड़ित किया है. मेरी माता हमेशा अपमानित व पराजित होती रही. इसलिए आप मुझे सूर्य से अधिक शक्तिशाली व पूज्य होने का वरदान दें. तब भगवान आशुतोष ने वर दिया कि तुम नौ ग्रहों में श्रेष्ठ स्थान पाने के साथ ही सर्वोच्च न्यायाधीश व दंडाधिकारी रहोगे. साधारण मानव तो क्या देवता, असुर, सिद्ध, विद्याधर, गंधर्व व नाग सभी तुम्हारे नाम से भयभीत होंगे.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज