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काश बेटे ने बात मानी होती! माता-पिता दूसरों की जान बचाने के लिए बांट चुके हैं 9 लाख के हेलमेट...
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News18 Madhya Pradesh
Updated: February 4, 2020, 7:06 PM IST
काश बेटे ने बात मानी होती! माता-पिता दूसरों की जान बचाने के लिए बांट चुके हैं 9 लाख के हेलमेट...
एक्सीडेंट में बेटे की मौत के बाद पेरेंट्स हेलमेट फ्री में बांटते हैं

नितिन डेविड का कहना है उन्होंने अपने बेटे को बहुत समझाया था कि ड्राइविंग के दौरान हेलमेट (HELMET) पहने. लेकिन वो नहीं माना. जब उसका एक्सीडेंट (Accident) हुआ तो उसके सिर में चोट थी. बाकी पूरा शरीर सही-सलामत था.

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उज्जैन के एक दंपति ने अपने इकलौते बेटे को सड़क हादसे (road accident) में खो दिया. बेटा हेलमेट (Helmet) नहीं पहने था. अगर पहना होता तो शायद उसकी जान बच जाती. बेटे की मौत ने माता-पिता को तोड़कर रख दिया. लेकिन उस हादसे से सबक लेकर उन्होंने दूसरों के बेटों की जान बचाने का संकल्प ले लिया. वो दिन और आज का दिन ये दंपति अब तक सैकड़ों वाहन चालकों को हेलमेट (Helmet) भेंट कर अपनी ज़िंदगी का सबक बता चुका है.

उज्जैन का डेविड दंपति लोगों को जीने की राह दिखा रहा है. उन्हें बता रहा है कि ज़िंदगी अनमोल है, इसकी हिफाज़त कीजिए. डेविड दंपति सड़क हादसे में अपने इकलौते बेटे को खो चुका है. इनकी निराशा से भरी जिंदगी अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. उन्होंने बेटे की मौत से सबक लेते हुए गरीबों और जरूरतमंदों को हेलमेट बांटने का फैसला किया, ताकि कोई और ऐसे हादसे का शिकार न हो. 4 साल में यह दंपति 9 लाख रुपए से ज्यादा के हेलमेट बांट चुका है.साथ ही, पोस्टर लगाकर भी लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरुक कर रहा है. उन्होंने इसे अपनी ज़िंदगी का मकसद बना लिया है.

इकलौते बेटे को खोया
उज्जैन में रहने वाले नितिन डेविड के बेटे रॉनित की 2015 में रोड एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी. पुणे में एक रोड एक्सीडेंट में रॉनित के सिर में गहरी चोट लगी थी. वो हेलमेट नहीं पहने था. बेटे को खोने के बाद नितिन और उनकी पत्नी जिंदगी से निराश हो गए. एक वक्त तो उन्हें लगा कि जैसे उनका जीवन ही खत्म हो गया है. लेकिन बेटे की मौत से मिला सबक उन्हें जीने की नई वजह दे गया.

9 लाख रुपए के हेलमेट बांटे
नितिन ने अपने बेटे को हेलमेट न पहनने के कारण खोया. अगर वो हेलमेट पहने होता तो शायद उसकी जान बच जाती. लिहाजा, डेविड दंपति ने फैसला किया कि वो शहर के युवाओं को हेलमेट पहनकर गाड़ी चलाने के लिए प्रेरित करेंगे. इतना ही नहीं, जरूरतमंद छात्रों और युवाओं को मुफ्त हेलमेट भी बांटेंगे. बस वो दिन और आज का दिन डेविड दंपति ने इसे अपना लक्ष्य बना लिया. वो 4 साल में 9 लाख से ज्यादा रुपए के हेलमेट युवाओं को बांट चुके हैं.

जागरुकता के लिए लगाते हैं पोस्टरनितिन का कहना है उन्होंने अपने बेटे को बहुत समझाया था कि ड्राइविंग के दौरान हेलमेट पहने. लेकिन वो नहीं माना. जब उसका एक्सीडेंट हुआ तो उसके सिर में चोट थी. बाकी पूरा शरीर सही-सलामत था. एक गंभीर चूक ने हंसती-खेलती ज़िंदगी छीन ली. बेटा तो ज़िंदगी की जंग हार ही गया. डेविड दंपति भी जीते जी ज़िंदा लाश बन गए. लेकिन अब दूसरों के घर का चिराग ना बुझे, यही डेविड दंपति के जीवन का लक्ष्य है. उज्जैन के किसी चौराहे, पेट्रोल पंप और व्यस्त सड़कों पर उन्हें हेलमेट बांटते देखा जा सकता है. वो हेलमेट भी बांटते हैं और जागरुकता के पोस्टर भी लगाते हैं.

(उज्जैन से आनंद निगम की रिपोर्ट)

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First published: February 4, 2020, 7:02 PM IST
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