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देश में पहली बार हो रही बैक्टीरियल इन्फेक्शन और वायरस पर रिसर्च, MP का यह शहर भी शामिल

मध्य प्रदेश में बैक्टीरियल इंफेक्शन और वायरस पर रिसर्च

मध्य प्रदेश में बैक्टीरियल इंफेक्शन और वायरस पर रिसर्च

MP News: पहली बार उज्जैन में बैक्टीरियल इन्फेक्शन (bacterial infection) और वायरल पर रिसर्च की जा रही है. मरीज में बैक्टीरियल इन्फेक्शन का पता लगाकर सही इलाज करने में मदद मिलेगी.

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उज्जैन. केंद्र सरकार की पहल पर आईसीएमआर ( Indian Council of Medical Research )और फाइण्ड (फाउंडेशन ऑफ़ न्यू इनोवेशन डाइगोनिस्टिक) देश में पहली बार उज्जैन में बैक्टीरियल इन्फेक्शन और वायरल पर रिसर्च की जा रही है. मरीज में बैक्टीरियल इन्फेक्शन व वायरल का पता लगाकर उचित एंटीबायोटिक व दवाइयों का चयन कर बीमारियों का सही इलाज करने में मदद मिलेगी. साथ ही किए जाने वाले टेस्ट पर भी लगाम लगेगी. एक साल तक चलने वाले इस शोध में 1600 वयस्क और 1500 बच्चों पर होगा टेस्ट. रिसर्च की रिपोर्ट केंद्र सरकार और आईसीएमआर को सौंपने के बाद ट्रीटमेंट का प्लान देशभर के अस्पतालों में लागू होगा.

बैक्टीरियल इन्फेक्शन और वायरल पर चल रही रिसर्च में दुनिया के 11 देश भाग ले रहे है. भारत में आईसीएमआर दिल्ली और फाइंड द्वारा करवाई जा रही रिसर्च में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन , पीजीआई चंडीगढ़, आईसीएमआर कोलकाता और छत्तीसगढ़ गनियारी अस्पताल में शोध होगा. उज्जैन में बुखार से पीड़ित 6 महीने के बच्चे से लेकर 60 साल के बुजुर्गों को होने वाले बुखार और वायरल इन्फेक्शन की महंगी जांच मुफ्त में होगी. इसमें मरीजों में पाए जाने वाले वायरल संक्रमण और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का पता लगाया जा रहा है. इसके आधार पर एंटीबायोटिक व दवाइयों का चुनाव कर बीमारियों इलाज किया जाएगा.

जानें कैसा होगा रिसर्च

डॉ. आशीष पाठक ने बताया कि केंद्र सरकार यूनिक रिसर्च करवा रही है जिसको आईसीएमआर (Indian Council of Medical Research )और फाइण्ड (फाउंडेशन ऑफ़ न्यू इनोवेशन डाइगोनिस्टिक) के माध्यम से होना है. इसमें 6 महीने के बच्चे से लेकर 60 वर्ष के बुजुर्ग तक उन लोगों पर रिसर्च होगा जिन्हें कम अवधि का बुखार आ रहा है जैसे सात दिन या उससे कम दिनों का बुखार हो. शोध से पता लगाया जा सकेगा की कीस बुखार के लिए कोनसी जांच जरूरी है. आने वाले दिनों में शोध के निष्कर्ष से मरीजों को फायदा मिलेगा. उन्हें अलग-अलग जांच नहीं करवाना होगी. डॉक्टर एक जांच लिखेंगे और उसी से बिमारी पकड़ में आएगी.

सभी जांच फ्री

ये प्रोजेक्ट इसलिए किया जा रहा है कि कौन सा वायरस है और कौन सा बैक्ट्रिया जनित बुखार है. अब शोध से ये पता लग सकेगा कि कितने प्रकार के वायरल और कितने बेक्टेरियल बुखार बढ़े और छोटो को हो रहे है. जिन लोगों को शोध में ले रहे है उनकी 12 से 15 प्रकार की जांच की जाएगी. डॉक्टर का कहना है कि बेक्टेरिया का पता लगते ही हम उसे बेस्ट एंटीबॉयोटिक दवाई देंगे. अमूमन देखने में आया है कि वायरल और बैकटीरयल बीमारी के लक्षण एक जैसे होते है. ऐसे में पहचनाना मुश्किल होता है की कौन सा इन्फेक्शन है.

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मरीज का डाटा होगा स्टोर

मरीज में बुखार के सिम्टम दिखते ही मरीज का पूरा डाटा टेबलेट में स्टोर किया जा रहा है. दरअसल एक एप आईसीएमआर ने आरडी गार्डी कॉलेज को शोध के लिए दिया है जिसमें सभी मरीजों का डेटा स्टोर किया जा रहा है. इसके बाद जरूरी जांच के लिए छोटे उपकरणों की मदद से रेपिड टेस्ट किए जा रहे है जिसमें तत्काल रिपोर्ट सामने आ रही है और मरीज को क्या इलाज दिया जाना है, इसके निष्कर्ष पर पहुंचा जा रहा है.

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