बेमिसाल: सहर ने कालिदास और शंकराचार्य को उर्दू के पाठकों तक पहुंचाया

उज्जैन के निवासी महमूद अहमद सहर ने धर्म के नाम पर सियासत करने वालों को आईना दिखाते हुए कालिदास और शंकराचार्य की रचनाओं को उर्दू के पाठकों तक पहुंचा दिया है. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है.

Anand Nigam | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 13, 2019, 7:16 PM IST
बेमिसाल: सहर ने कालिदास और शंकराचार्य को उर्दू के पाठकों तक पहुंचाया
महमूद अहमद  ( उर्दू में काव्य रचने वाले ) 
Anand Nigam | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 13, 2019, 7:16 PM IST
व्यक्ति में यदि इच्छा शक्ति हो तो कोई धर्म और सामाजिक बंधन आड़े नहीं आता. इसे उज्जैन के 80 वर्षीय महमूद अहमद सहर ने सच कर दिखाया है. सहर साहब के परिवार में उर्दू बोली जाती है. उन्होंने वैदिक भाषा संस्कृत को गले लगाया और अपनी लगन से बिना किसी सहयोग के कालिदास के तीन काव्य संग्रहों को संस्कृत से उर्दू में अनुवाद किया और इनका प्रकाशन भी करवाया. यही नहीं उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य की किताब प्रश्नोत्तर रत्न मलिका का भी उर्दू अनुवाद कर दिया जिसके लिए सहर साहब को साहित्य अकादमी अवार्ड से नवाजा गया है.

कालीदास की रचनाओं का संस्कृत से किया उर्दू में रूपांतरित




उज्जैन के रहने वाले महमूद अहमद सहर के काव्य और रचनाओ में कभी भी मजहब की दीवार सामने  नहीं आई, बल्कि वो इस वक़्त उन लोगों के लिए एक सबक है जो मजहब के नाम पर उन्माद फैलाते हैं. अब तक कालिदास के काव्य को संस्कृत या हिंदी में अनुवाद किया गया है लेकिन कुमारसम्भवम् आज तक किसी भी भाषा में अनुवाद नहीं किया लेकिन उज्जैन के महमूद अहमद ने  1. कुमार संभवम् 2 मेघदूतम, 3. ऋतुसंहारम, 4. घुवंशम सहित तीनों काव्य ग्रंथों को उर्दू में रच डाला.

इसके बाद अभी हाल ही में  महमूद साब ने आदि गुरु शंकराचार्य की किताब को भी उर्दू भाषा में अनुवाद कर दिया जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय साहित्य  अकादमी ने सम्मानित किया है. इसके लिए मध्य प्रदेश से पहली बार नेशनल साहित्य का उर्दू भाषा के लिए अवार्ड महमूद साहब को मिला है.

साहित्य अकादमी अवार्ड से किए गए सम्मानित


पिछली सदी के छठे दशक में महमूद अहमद सहर उर्दू के साथ- साथ हिंदी और संस्कृत का ज्ञान भी हासिल करना शुरू किया. कई लोगों ने इसे मजहब के खिलाफ बताया लेकिन यह इनकीइच्छा शक्ति ही थी कि  संस्कृत का ज्ञान लेना जारी रखा. तभी से कालिदास के काव्य संग्रहों को उर्दू में परिवर्तित करने का ख़याल आया जिसके बाद श्री निवास रथ और अन्य लोगों का सहयोग मिलता रहा. वर्ष 2013 में सहर ने इन काव्य ग्रंथो को उर्दू में परिवर्तित करने के बाद  मेघदूत का प्रकाशन कराया. इसके बाद कुमार सम्भवम् और ऋतुसंहारम् का भी प्रकाशन मशवरा पॉकेट बुक और यूनियन बुक स्टॉल नई दिल्ली से कराया जिसे पाकिस्तान समेत आज 47 से ज्यादा देशों में पढ़ा जा रहा है.

 
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सहर ने कालिदास की ही नहीं आदि शंकराचार्य की रचना का भी उर्दू में किया है अनुवाद


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