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जैन संत ने लगाई फांसी: आचार्य विमद सागर का शव पंखे से लटका मिला, पुलिस को संदिग्ध लग रहा मामला

जैन संत ने लगाई फांसी: आचार्य विमद सागर का शव पंखे से लटका मिला, पुलिस को संदिग्ध लग रहा मामला

इंदौर में जैन संत आचार्य श्री 108 विमद सागर का शव पंखे पर लटका मिला.

इंदौर में जैन संत आचार्य श्री 108 विमद सागर का शव पंखे पर लटका मिला.

Acharya Vimad Sagar news: संत श्री 108 विमद सागर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इंदौर के नंदा नगर स्थित एक धर्मशाला के कमरे में उनका शव पंखे से लटका मिला. संत श्री विमद सागर चातुर्मास के लिए यहां आए थे. घटना की जानकारी सबसे पहले उनके शिष्य को लगी. उसके बाद जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु तुरंत मौके पर पहुंच गए.

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इंदौर. इंदौर में दिगंबर जैन संत आचार्य श्री 108 विमद सागर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वे चातुर्मास के लिए यहां आए थे और परदेसीपुरा इलाके में धर्मशाला में रुके हुए थे. घटना की जानकारी लगते ही पुलिस और जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु तुरंत मौके पर पहुंच गए. पुलिस मामले की जांच कर रही है. उसे मामला संदिग्ध नजर आ रहा है. फिलहाल, आत्महत्या की वजह सामने नहीं आई है.

CSP निहित उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि मामला नंदा नगर में जैन मंदिर के पास बनी धर्मशाला का है. जिस वक्त पुलिस जांच करने पहुंची उस वक्त धर्मशाला का कमरा अंदर से बंद था और संत का शव पंखे से लटक रहा था. समाज के लोगों ने उनके शव को पंखे से नीचे उतारा. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पूरी तरह कानूनी तरीके से होगी, क्योंकि मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है. मौके पर एफएसएल की टीम भी पहुंच गई.

रोज सुबह होते थे प्रवचन

गौरतलब है कि आचार्य विमद सागर की उम्र 45 साल थी. वे सागर जिले के शाहगढ़ के रहने वाले थे. संत चातुर्मास के लिए 3 दिन पहले ही यहां आए थे. सबसे पहले उनका शव शनिवार शाम साढ़े 4 बजे शिष्य अनिल जैन ने देखा. उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी. नंदा नगर स्थित पाश्वनार्थ दिगंबर जैन मंदिर के प्रबंधन ने बताया कि आचार्य विमद सागर महाराज यहां रोज सुबह 9 से 10 बजे तक प्रवचन देते थे. इसके बाद वे एक दिन छोड़कर आहारचर्या करते थे. शनिवार को भी वे आहारचर्या पर गए थे. दोपहर करीब ढाई बजे सामयिक के लिए पहुंचे. शाम को ये घटना घट गई.

पूरी तरह शुद्ध आहार लेते थे आचार्य

समाजजनों ने बताया कि आचार्य ने दूध, शक्कर, तेल, का आजीवन त्याग कर रखा था. आहारचर्या के दौरान उनका आहार शुद्धता के साथ तैयार किया जाता था. आचार्यश्री खड़े होकर साधना करते थे. आचार्य विमद सागर 8 महीने पहले रतलाम से विहार कर इंदौर आए थे. बीते 25 दिन पहले ही गुमाश्ता नगर मंदिर से विहार हुआ था. ब्रह्मचर्य से पहले आचार्य श्री 108 विमद सागर जी महाराज का नाम संजय कुमार जैन था. उनका जन्म 9 नवंबर 1976 को हुआ था. उनकी मां का नाम सुशीला और पिता शीलचंद जैन हैं. पिता मलेरिया इंस्पेक्टर रह चुके हैं. उन्होंने 9वीं तक पढ़ाई की थी और 8 अक्टूबर 1992 में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था.

Tags: Indore news, Mp news, Suicide

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