शनिचरी अमावस्या के नहान पर हजारों की संख्या में त्रिवेणी पहुंचे श्रद्धालु

उज्जैन शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर शनिवार को श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दिया.श्रावण माह की शनि चारी अमावस्या होने पर देर रात से ही दूर-दूर से आए श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर पुण्य कमाते नजर आए.सुबह होते ही लंबी लंबी लाईनों में लग कर स्नान कर शनि मंदिर के दर्शन कर भक्त निहाल हो गए.

Anand | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 11, 2018, 7:48 PM IST
शनिचरी अमावस्या के नहान पर हजारों की संख्या में त्रिवेणी पहुंचे श्रद्धालु
शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालु स्नान करते हुए
Anand | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 11, 2018, 7:48 PM IST
उज्जैन शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर शनिवार को श्रद्धालुओं का सैलाब दिखाई दिया.श्रावण माह की शनि चारी अमावस्या होने पर देर रात से ही दूर-दूर से आए श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान कर पुण्य कमाते नजर आए.सुबह होते ही लंबी लंबी लाईनों में लग कर स्नान कर शनि मंदिर के दर्शन कर भक्त निहाल हो गए. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया और अपने पहने हुए जूते चप्पल भी दान के रूप में छोड़ गए. मान्यता है कि आज के दिन अपने जूते चप्पल मंदिर के बाहर दान करने से शनि की बुरी दशा से मुक्ति मिलती है.हालांकि परपंरा भी है कि यह सब दान में छोड़े गए जूते चप्पलों को प्रशासन बाद में इकट्टा कर नीलामी कर देता है.

श्रावण माह की शनिचरी अमावस्या पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उज्जैन के प्राचीन शनि मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ पड़े. कहा जाता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने इस मंदिर की स्थापन की थी.यह देश का पहला ऐसा मंदिर भी है जहां शिव के रूप में शनि की पूजा की जाती है और लोग मनोकामना कर शनि कृपा पाने के लिए तेल चढ़ाते हैं.लोगों ने रात 12 बजे बाद से ही फव्वारों में नहान शुरू कर दिया लेकिन मुख्य नहान सुबह सूर्योदय के बाद अमावस्या पर्व काल में ही किया गया.

प्रशासन उमड़ने वाली भीड़ को देखते ने रात से ही सतर्क था.नदी में जल भराव होने के कारण अधिकतर श्रद्धालुओं को  नदी में नहीं जाने दिया गया. इसलिए बेरिकेड्स से होकर पहले फव्वारों में नहान करवाया गया फिर शनि दर्शन. बेरिकेड्स से होकर लोग लाइन में लगकर पहले त्रिवेणी संगम पर स्नान करने गए.उसके बाद शनि मंदिर में आकर दर्शन पूजन किया. शाम तक काफी शांति के साथ बिना किसी घटना दुर्घटना के संपन्न होने पर पुलिस- प्रशासन के अधिकारियों ने राहत की सांस ली.
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