Ujjain : नये साल के पहले दिन 46 हजार श्रद्धालुओं ने किये बाबा महाकाल के दर्शन, इनसे हुई रिकॉर्ड आमदनी

कोरोना के कारण अभी भस्म और शयन आरती के दौरान श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक है.

28000 हजार श्रद्धालुओं (devotees) को दर्शन के लिए ऑन लाइन (Online) अनुमति मिली थी. इन्हें दर्शन के लिए कोई फीस नहीं देना पड़ा.मंदिर में इनकी एंट्री बिलकुल फ्री थी. जबकि 6000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 250 रुपए का शुल्क देकर बाबा के दर्शन किये

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उज्जैन.उज्जैन(Ujjain) स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) में नये साल के पहले दिन रिकॉर्ड 46 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. ये आंकड़ा सुबह 6 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक का है. दर्शन का सिलसिला उसके बाद भी जारी था जिसका आंकड़ा शनिवार को मिलेगा.इन श्रद्धालुओं से रिकॉर्ड आय मंदिर समिति को हुई.

नव वर्ष पर महाकाल मंदिर में शीघ्र दर्शन करने वालों की भीड़ अल सुबह 6 बजे से शुरू हो गयी थी. वाहनों की लाइन पूरे मंदिर परिसर से करीब एक किलोमीटर दूर तक लगी हुई थी.बड़ी संख्या में देश के अलग अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां आए थे. सबने घंटों लंबी लाइन में लगकर महाकाल के दर्शन किये.

एक दिन में सबसे ज़्यादा आय
महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि सुबह 6 बजे से तो शाम 7 बजे तक 46 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने महाकाल के दर्शन किये. इनमें से 28000 हजार श्रद्धालुओ को दर्शन के लिए ऑन लाइन अनुमति मिली थी. इन्हें दर्शन के लिए कोई फीस नहीं देना पड़ा.मंदिर में इनकी एंट्री बिलकुल फ्री थी. जबकि 6000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 250 रुपए का शुल्क देकर बाबा के दर्शन किये. इनसे महाकाल मंदिर समिति को  19 लाख रुपए की आय हुई.ये नव वर्ष पर होने वाली अब तक कि सबसे ज्यादा रिकॉर्ड आय है. हालांकि पूरी आय का रिकॉर्ड शनिवार तक मिल पाएगा. कोरोना महामारी के कारण 2 मॉर्च से मंदिर बंद था. मंदिर खुलने के बाद से लेकर ये अब तक की एक दिन में सबसे ज्यादा होने वाली आय है.

आसानी से दर्शन
श्री महाकालेश्वर मंदिर में नव वर्ष  के पहले दिन ऐसा लगा जैसे आस्था का जन सैलाब उमड पड़ा हो.कार्तिकेय मंडप और पालकी स्थान में बेरिकेडिंग हटा कर श्रद्धालुओं को बिना रूकावट सीधे सभी लाइनों में जाने की व्यवस्था थी. इससे अधिक से अधिक श्रद्धालु कम समय में दर्शन कर पाए. कहीं भी भीड़ इकट्ठी नहीं हुई.

हरी ॐ जल से स्नान
ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल को सुबह 4 बजे हरी ॐ जल (ठंड के कारण गर्म जल) से स्नान करवाया गया. बाबा का पंचामृत से अभिषेक हुआ जिसमें दूध, दही, घी, शकर, शहद से बाबा को दोबारा स्नान करवाया गया. उसके बाद बाबा को चंदन का लेप लगाकर सुगंधित द्रव्य चढ़ाए गए. फिर भांग से बाबा का श्रृंगार किया गया. यह पूरी प्रक्रिया पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच हुई बाबा को तैयार कर भस्म आरती की प्रक्रिया प्रारम्भ की गई. श्वेत वस्त्र ओढ़ाकर भस्म रमाई गई.भस्मीभूत होने के बाद ढोल, नगाड़े, झांज, मंजीरे की धुन के बीच बाबा की आरती हुई.

भस्मारती में प्रवेश नहीं
कोरोना के कारण भस्म आरती में इस बार भक्तों के प्रवेश पर रोक रही. आरती के बाद सुबह  6 बजे से भक्तों का प्रवेश शुरू हुआ.  कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए द्वार खोल गए. सुबह 6 बजे से ही श्रद्धलुओं की लंबी कतार बाबा के दरबार में शीश झुकाने के लिए लगने लगी. किसी ने परिवार की सुख शांति के लिये कामना की तो किसी ने देश मे अमन चैन सुख समृद्धि को लेकर शीश झुकाया. ऐसी मान्यता है कि बाबा महाकाल के दर्शन करने से साल भर सुख शांति बनी रहती है.

शयन आरती में प्रवेश पर रोक
शयन आरती में भक्तों के प्रवेश पर रोक है.भक्त सुबह 6 से रात 10 तक ऑनलाइन बुकिंग और गेट पर 251 के दान के माध्यम से ही दर्शन कर पाए.कोरोना से मुक्ति और विश्व कल्याण के लिए महापूजन कर 56 भोग बाबा को परोसा गया.

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