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UJJAIN : CBRI की टीम ने माना महाकालेश्वर मंदिर का ढांचा आज भी काफी मजूबत और सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBRI की टीम मंदिर की जांच कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBRI की टीम मंदिर की जांच कर रही है.

Ujjain : महाकाल मंदिर के दूसरे तल पर नागचंद्रेशवर मंदिर है जो साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर खुलता.मंदिर का एक ही संकरा रास्ता है.CBRI टीम की सलाह के बाद मंदिर समिति बहुत जल्द ही इसमें बदलाव करने जा रही है.

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उज्जैन.सुप्रीम कोर्ट (SC) के आदेश पर उज्जैन आयी केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की की टीम ने माना है कि महाकाल मंदिर का ढांचा काफी मज़बूत और सुरक्षित है.टीम ने मीडिया से बात नहीं की लेकिन कलेक्टर ने उनसे चर्चा के बाद ये जानकारी दी.सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBRI महाकाल मंदिर के ढांचे की जांच कर रही है.

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग क्षरण को लेकर लगी याचिका पर 7 सितंबर 2017 सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पूरे स्ट्रक्चर की मजबूती जांचने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की को आदेश दिया था. दो दिन के लिए महाकालेश्वर मंदिर  पंहुची टीम ने मीडिया से जानकारी  साझा करने से इंकार कर दिया.लेकिन उज्जैन कलेक्टर आशीष ने जानकारी दी कि CBRI की टीम ने बताया है कि महाकाल मंदिर का स्ट्रक्चर काफी मजबूत है.एक दो जगह कमियां मिलीं है. अपनी रिपोर्ट में उसका जिक्र कर सुप्रीम कोर्ट  को सौपेंगे.

CBRI के अधिकारी संतुष्ट
उज्जैन कलेक्टर और महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह ने बताया कि रुड़की सेंट्रल बिल्डिंग इंस्टीटूट के साइंटिस्ट डॉ अचल मित्तल और एक प्रोफ़ेसर जांच के लिए आए हैं.दोनों सदस्य मंदिर भवन की मजबूती के बारे में कोर्ट में रिपोर्ट पेश करेंगे.कलेक्टर ने टीम के साथ चर्चा की है.दोनों ने अपना मत रखा और बताया कि महाकालेश्वर मंदिर का स्ट्रक्चर काफी मजबूत है. हालांकि एक दो जगह कमियां हैं उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देंगे.



नागचंद्रेश्वर मंदिर के रास्ते में होगा बदलाव
महाकाल मंदिर के दूसरे तल पर नागचंद्रेशवर मंदिर है जो साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर खुलता.इस दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं. हैं.मंदिर में दर्शन करने के लिए कोई बड़ा रास्ता नहीं है इसलिए काफी दिक्कत होती है.प्रशासन हर साल यहां लोहे की अस्थायी सीढ़ियां बनवाता है.उस पर चल कर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं. लेकिन अब CBRI टीम की सलाह  के बाद मंदिर समिति बहुत जल्द ही इसमें बदलाव करने जा रही है.
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