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भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल बनें दूल्हा

भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल बनें दूल्हा

भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल दूल्हा बन गये हैं.

भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल दूल्हा बन गये हैं.

भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल दूल्हा बन गये हैं.

भस्म रमाने वाले भूतभावन बाबा महाकाल दूल्हा बन गये हैं. इसके साथ ही उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिव नवरात्रि के शुरूआत हो गई है.

महाकाल के दरबार में भगवान महाकाल और माता पार्वती के विवाह उत्सव का उल्लास भी बिखरने लगा है. रविवार को शिव नवरात्रि के पहले यहां मनाये जाने वाले विवाह उत्सव के तहत पहले दिन भस्म रमाने वाले बाबा महाकाल को हल्दी लगाई गई और दूल्हा स्वरूप में उनका आकर्षक श्रृंगार किया गया.

महाशिवरात्रि का पर्व यूं तो हर ज्योतिर्लिंग और शिवालय में मनाया जाता है, लेकिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व खास होता है.

दरअसल, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व भूतभावन बाबा महाकाल और माता पार्वती के विवाह उत्सव और शिव नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है.

इस दौरान पूरे नौ दिन तक महाकाल के दरबार में देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव का उल्लास रहता है. भस्म रमाने वाले बाबा महाकाल दूल्हा बनते हैं. उन्हें हल्दी लगाई जाती है और हल्दी और चंदन से ऊबटन कर उनका नित नया मनमोहक श्रृंगार किया जाता है.

भगवान महाकाल और माता पार्वती के विवाह प्रसंग के रूप में मनाई जाने वाली शिव नवरात्रि का पहला दिन था. लिहाजा, दूल्हा बने बाबा महाकाल को हल्दी लगाकर आकर्षक और मनोहारी श्रृंगार किया गया.

इससे पहले सुबह महाकाल मंदिर में राजाधिराज बाबा महाकाल का विशेष अभिषेक पूजन किया गया. मान्यता है कि शिव नवरात्रि के नौ दिन दूल्हा स्वरूप में होने वाले राजाधिराज बाबा महाकाल के श्रृंगार के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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