95% लंग इंफेक्शन, 80 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट के बाद कोरोना को हराकर घर लौटीं ये बुज़ुर्ग वॉरियर, सुनिए इनकी आपबीती

उषा निगम 40 दिन ICU में भर्ती रहीं.

उषा निगम 40 दिन ICU में भर्ती रहीं.

कोरोना वॉरियर उषा निगम कहती हैं इस बीमारी से निपटने में परिवार का सपोर्ट, खुद का विल पावर और खान-पान का बेहद ख्याल रखना ज़रूरी है.

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उज्जैन. लड़ेंगे तभी जीतेंगे. ये कहानी  है उज्जैन (Ujjain) की एक महिला की. कोरोना (Corona) के कारण उनके लंग्स में 95 प्रतिशत तक इंफेक्शन हो गया था. लेकिन अब वो स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुकी हैं. ये कोरोना वॉरियर कहते हैं कि ये वक्त कोरोना से डरने का नहीं है. हिम्मत रखने और बीमारी से लड़ने का है. ऐसे मुश्किल वक्त में मनोबल बनाए रखने के लिए परिवार का साथ सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.

कोरोना से लड़ाई का जज्बा और घर परिवार वालों का सपोर्ट मिल जाए तो 95 प्रतिशत इंफेक्शन वाला मरीज भी इस भयानक महामारी को मात दे सकता है. उज्जैन जिला सहकारी बैंक की रिटायर्ड मैनेजर उषा निगम का तो यही संदेश है. उन्हें कोरोना हुआ और लग्स में इंफेक्शन इतना बढ़ा तो डाक्टरों ने साफ कह दिया था कि अब बचना मुश्किल है. लेकिन परिवार और मरीज ने हिम्मत नहीं खोयी. 50 दिन से अधिक समय तक आईसीयू और करीब 80 दिन तक लगातर ऑक्सीजन पर रहने के बाद भी आज उषा निगम स्वस्थ होकर घर लौट चुकी हैं और अब अपने परिवार के साथ राजी खुशी से रह रही हैं.

जज़्बे की कहानी

ये है उस जज्बे की कहानी. उज्जैन जिला सहकारी बैंक में मैनजेर के पद पर से रिटायर हुईं 62 वर्षीय उषा निगम अपनी बहन की मौत के बाद गम में उनके घर देवास चली गयीं. वहां से तीन दिन बाद जब घर लौटीं तो उन्हें खांसी और बुखार हो गया. उनके दोनों बेटों ने माधव नगर अस्पताल में जांच और आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया तो 20 अक्टूबर को उषा निगम की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. परिवार ने फौरन उसी दिन उन्हें माधव नगर अस्पताल के कोविड वॉर्ड में भर्ती करा दिया. 22 अक्टूबर को पहला सीटी स्कैन कराया तो रिपोर्ट में लंग्स में इंफेक्शन जीरो आया. लेकिन दो दिन बाद ही 24 तारीख को हालत बिगड़ने लगी. उन्हें फौरन माधव नगर अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा.
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यहां शुरू हुआ मौत से संघर्ष

यहां से उषा निगम का ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष शुरू हुआ. माधव नगर अस्पताल में रेमेडेसिविर के 6 इंजेक्शन लगाने के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ. उसके बाद लगातार हालत बिगड़ने लगी. 29 अक्टूबर को श्रीमती निगम को इंदौर  के अरविंदो अस्पताल रेफर कर दिया गया.यहां 30 अक्टूबर को फिर से सीटी स्कैन  कराया तो मात्र 8 दिन में लंग्स का इंफेक्शन बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया था और हालत बिगड़ती जा रही थी.

परिवार ने दी शक्ति



मां की हालत लगातार ख़राब होती देख बेटों और बहुओं ने उनका साथ और हिम्मत नहीं छोड़ी. वो पीपीई ड्रेस पहनकर अस्पताल में अपनी मां से मिलने गए. उन्हें हिम्मत बंधायी. रोजाना घर का खाना भेजने की व्यवस्था की. रेमडेसिविर के 5 इंजेक्शन का डोज फिर लगा. इस सबके बावजूद उषा निगम की हालत बिगड़ती जा रही थी. डॉक्टरों ने कह दिया था कि अब इनका बचना मुश्किल है.

कुल 12 इंजेक्शन लगे

उषा निगम की फिर जांच की गयी तो वो अब भी कोरोना पॉजिटिव थीं. फिर उन्हें प्लाज्मा चढ़ाया गया. 40-40 हजार के दो इंजेक्शन और लगे. उसके बाद आख़िरकार 12 नवंबर को जाकर उनकी रिपोर्ट निगेटिव आयी.  लेकिन सांस लेने में दिक्कत बरकरार थी. उसके बाद 14 तारीख को उन्हें सामान्य आईसीयू  में शिफ्ट कर दिया गया.



95 प्रतिशत इंफेक्शन

26 नंवबर को फिर सीटी स्कैन किया तो पता चला कि लंग्स में इंफेक्शन बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया है. डॉक्टरों ने कह दिया कि अब मरीज के पास बहुत कम समय है. इसलिए परिवार वाले उन्हें डिस्चार्ज कराकर 2 दिसंबर को ऑक्सीजन सपोर्ट पर घर ले आये. और होम आइसोलेशन में रखा. लेकिन उषा निगम की किस्मत में तो ज़िंदगी खड़ी मुस्कुरा रही थी. वो करीब 20 फरवरी तक घर पर हीऑक्सीजन पर रहीं. बस एक बात जो पॉजिटिव थी वो ये कि परिवार वाले लगातार उनकी हिम्मत बढ़ाते रहे. अब श्रीमती निगम बिलकुल स्वस्थ हैं और अपना काम स्वयं कर लेती हैं

ICU में 40 दिन

उषा निगम की बिमारी की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है की संक्रमित होने के बाद  शुरुआती 4 दिन नॉर्मल कोरोना वॉर्ड  में बाकी  40 दिन आईसीयू में भर्ती रहीं. वो अपने जीवित रहने का श्रेय माधवनगर अस्पताल के डॉक्टरों डॉ एच पी सोनानिया और इंदौर के डॉ रवि डोसी और पूरे स्टाफ को देती हैं. जिन्होंने  मरीज को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किये. साथ ही परिवार का सपोर्ट और खुद के विल पावर ने भी साथ दिया. इस दौरान परिवार ने घर में जन्मदिन-शादी की सालगिरह भी उनके सामने सेलिब्रेट की. इससे भी उषा निगम का हौसला बढ़ा. एक बात और ध्यान देने की है कि बीमारी के दौरान खान पान का भी बेहद ध्यान रखना पड़ता है. ताकि शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता बनी रहे.
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