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Ujjain : सावन के आखिरी सोमवार पर शाही ठाठ बाट से नगर भ्रमण पर निकले महाकाल

सावन के बाद अब भादों के 3 सोमवार को महाकाल की सवारी निकाली जाएगी.

सावन के बाद अब भादों के 3 सोमवार को महाकाल की सवारी निकाली जाएगी.

Ujjain : सवारी की शुरुआत तोप की आवाज और केसरिया ध्वज लहराते हुए की गई. उसके बाद पुलिस बैण्ड ने धुन बजा कर बाबा का स्वागत किया. मंदिर के मुख्य द्वार से क्षिप्रा तट तक सांस्कृतिक कला कही जाने वाली भव्य रंगोली के वी पंड्या ने बनायी थी. जहां से सवारी निकलनी थी उस पूरे रास्ते पर रेड कारपेट बिछाया गया था और रंगबिरंगे झंडे लगाए गए थे.

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उज्‍जैन. बाबा महाकाल (Baba Mahakal) की सावन माह की आखिरी सवारी ठाठ बाट से निकली. बाबा महाकालेश्‍वर पालकी में मनमहेश और हांथी पर चंद्रमौलेश्वर के स्‍वरूप में भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर शाही ठाठ बाट के साथ निकले. आज सवारी में भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए. क्षिप्रा नदी और पूजन के दौरान आरती में वो मौजूद थे.

सवारी निकलने से पहले सभा मंडप में सरकारी पुजारी पं.घनश्‍याम शर्मा ने पूजन करवाया. सबसे पहले महाकाल की पूजा और फिर आरती की गयी. कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र कुमार शुक्ल, मंदिर प्रशासक और एडीएम नरेंद्र सुर्यवंशी अपने परिवार साथ पूजन में शामिल हुए. पूजन के बाद पालकी को कंधा देकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने आगे बढ़ाया.

भादों में तीन सवारी निकलेंगी
मंदिर के मुख्य द्वार पर बाबा को सरकारी सम्मान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. कोरोना काल के कारण आम भक्तों को इसमें शामिल होने की छूट नहीं थी. सिर्फ पुलिस और पुजारी पंडे ही इसमें शामिल हुए. लॉ एंड ऑर्डर के लिए पुलिस को चप्पे चप्पे पर तैनात किया गया था. भक्तों ने महाकाल के सुबह 5 से 1 दर्शन किये और फिर शाम 7 से 9 बजे तक मंदिर के द्वार खोले गए. भादौ माह के 3 सोमवार में भी बाबा नगर भ्रमण पर निकलेंगे.

बाबा का ऐसे हुआ स्वागत
सवारी की शुरुआत तोप की आवाज और केसरिया ध्वज लहराते हुए की गई. उसके बाद पुलिस बैण्ड ने धुन बजा कर बाबा का स्वागत किया. मंदिर के मुख्य द्वार से क्षिप्रा तट तक सांस्कृतिक कला कही जाने वाली भव्य रंगोली के वी पंड्या ने बनायी थी. जहां से सवारी निकलनी थी उस पूरे रास्ते पर रेड कारपेट बिछाया गया था और रंगबिरंगे झंडे लगाए गए थे. आतिशबाजी से बाबा का स्वागत किया गया. रास्ते में सजायी गयी रंगोली में कोरोना से बचने का संदेश दिया गया था.रंग गुलाल उड़ाए गए. महाकालेश्वर मन्दिर से सवारी हरसिद्धि मन्दिर के सामने से होकर नृसिंह घाट पर झालरिया मठ होते हुए रामघाट पहुंची. रामघाट पर बाबा का अभिषेक किया गया. आरती के बाद सवारी हरसिद्धि मंदिर पहुंची जहां महाकाल की आरती की गई. उसके बाद सवारी वापिस मंदिर आ गयी और फिर महाकाल मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए.

व्यवस्था की तारीफ-कैलाश विजयवर्गीय ने मंदिर और सवारी मार्ग में की गयी व्यवस्था की तारीफ़ की. उन्होंने कहा परिस्थिति अनुकूल नहीं होने के बाद भी उज्जैन के लोगों ने कोविड के प्रोटोकॉल का पालन किया. 7

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