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गजब देसी तकनीक : चूना गुड़ मैथी उड़द से हो रहा है महाकाल गेट का रेनोवेशन, एक हजार साल नहीं टूटेगा जोड़

इस गेट के रेनोवेशन पर 2.12 करोड़ रुपये खर्च होंगे

इस गेट के रेनोवेशन पर 2.12 करोड़ रुपये खर्च होंगे

Ujjain. चुनाई के लिए मटेरियल तैयार होने में 15 से 17 दिन का वक्त लगता है. इस मटेरियल से तैयार इमारत सालों-साल मजबूती के साथ टिकी रहती है. इस मटेरियल से तैयार भवन पूरी तरह वातानुकुलित और पर्यावरण के अनुकूल हैं. सीमेंट से बने मकान की तुलना में इसका तापमान चार से पांच डिग्री कम रहता है.

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उज्जैन. उज्जैन (Ujjain) में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है. इसमें महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) का विस्तारीकरण भी शामिल है. मंदिर के प्रवेश द्वार का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है. लेकिन इसमें सीमेंट के बजाए पुरानी देसी तकनीक अपनायी जा रही है. चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी से मंदिर के गेट को चमकाया जा रहा है. दावा है कि ये तकनीक अपनाने से एक हजार साल तक गेट मजबूती से खड़ा रहेगा.

श्रीमहाकालेश्वर मंदिर से रामघाट जाने वाले रास्ते पर जीर्णशीर्ण हो चुके महाकाल द्वार की मरम्मत की जा रही है. स्मार्ट सिटी के तहत यहां काम चल रहा है. लेकिन इस द्वार की मरम्मत ऐसे की जा रही है जिसे देखकर एकबारगी लगेगा कि कहीं किचन का कोई काम चल रहा है या कोई व्यंजन बनाने की तैयारी की जा रही हो. इस महाकाल द्वार का जीर्णोंद्धार चंदेरी और ललितपुर से आए कारीगर कर रहे हैं. वो चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी से गेट की मरम्मत कर उसे नया स्वरूप दे रहे हैं. इनका दावा है कि 1000 साल तक अब इस गेट को कोई टस से मस नहीं कर पाएगा. गेट की चमक हमेशा एक जैसी रहेगी.

देसी चीजों का कमाल
श्रीमहाकालेश्वर मंदिर से रामघाट जाने को पुरातन स्वरूप में बने प्राचीन महाकाल द्वार का जीर्णोंद्धार चंदेरी और ललितपुर के कारीगर चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी से कर रहे हैं। क्योंकि उनका कहना है पुरात्व के काम में सीमेंट का उपयोग प्रतिबंधित रहता है। सीमेंट से ज्यादा चूने की गई चुनाई ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद रहती है। सीमेंट की मजूबती 80 वर्षो तक रहती है लेकिन चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी की तकनीक से 1000 वर्ष तक मजबूती बनी रहेगी।

2.12 करोड़ में होगा काम
महाकाल थाने के पास बना ये गेट महाकाल मंदिर से करीब 100 मीटर दूर है. इस द्वार के रास्ते रामघाट सीधे पहुंचा जा सकता है. पिछले कुछ वर्षों से यह रास्ता द्वार जीर्णशीर्ण होने से बंद था. उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने महाकाल मंदिर परिसर विस्तार परियोजना शुरू की है. इस पर कुल 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी. गेट का जीर्णोद्धार भी इसी के अंतर्गत हो रहा है. इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा. प्रोजेक्ट की लागत 2.12 करोड़ रुपये है.

ये जोड़ एक हजार साल नहीं टूटेगा
गेट का जीर्णोद्धार करने चंदेरी से कारीगर आए हैं. ऐसे ही एक मिस्त्री अनोखीलाल ने बताया कि पुरातत्व के काम में सीमेंट के उपयोग की मनाही रहती है. क्योंकि सीमेंट से किया गया काम ज्यादा से ज्यादा 100 साल तक ही टिकता है. लेकिन चूने से हुआ काम 1000 वर्ष से ज्यादा रहती है. मैं भी 10 साल से यही काम कर रहा हूं. ग्वालियर के मोती महल, गुजरी महल, चाचोड़ा, कटनी, विजय राघौगढ़ के कई किले-मंदिरों सहित राजस्थान में भी कई जगह काम किया है. अब महाकाल मंदिर के द्वार का जीर्णोंद्वार का काम करना किस्मत की बात है. अन्य कारीगर रामगोपाल अहिरवार और ललितपुर से आए वृंदावन अहिरवार ने बताया कि छत, दीवारों को अधिक मजबूती देने के लिए चूने का जो चमत्कारी मटेरियल तैयार होता है, उसमें गुड़, मैथी, गूगल, बिल्व पत्र के फल, उड़द का पानी, ईट का चूरा, रेत, चुना मिलाया जाता है.

15 दिन में माल तैयार

चुनाई के लिए मटेरियल तैयार होने में 15 से 17 दिन का वक्त लगता है. इस मटेरियल से तैयार इमारत सालों-साल मजबूती के साथ टिकी रहती है. इस मटेरियल से तैयार भवन पूरी तरह वातानुकुलित और पर्यावरण के अनुकूल हैं. सीमेंट से बने मकान की तुलना में इसका तापमान चार से पांच डिग्री कम रहता है.

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