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ऐसा मंदिर जहां होती है 5 हजार साल पुराने दोस्तों की पूजा

आपने कृष्ण-राधा के मंदिर तो कई देखे होंगे. लेकिन उजैन के एक मंदिर में कृष्ण राधा के संग नहीं बल्कि अपने खास दोस्त सुदामा के साथ विराजे हुए हैं. यह खास मंदिर समर्पित है सुदामा और कृष्ण की दोस्ती को. कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की दोस्ती को समर्पित इस मंदिर का नाम है नारायण धाम.

आपने कृष्ण-राधा के मंदिर तो कई देखे होंगे. लेकिन उजैन के एक मंदिर में कृष्ण राधा के संग नहीं बल्कि अपने खास दोस्त सुदामा के साथ विराजे हुए हैं. यह खास मंदिर समर्पित है सुदामा और कृष्ण की दोस्ती को. कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की दोस्ती को समर्पित इस मंदिर का नाम है नारायण धाम.

आपने कृष्ण-राधा के मंदिर तो कई देखे होंगे. लेकिन उजैन के एक मंदिर में कृष्ण राधा के संग नहीं बल्कि अपने खास दोस्त सुदाम ...अधिक पढ़ें

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    आपने कृष्ण-राधा के मंदिर तो कई देखे होंगे. लेकिन उजैन के एक मंदिर में कृष्ण राधा के संग नहीं बल्कि अपने खास दोस्त सुदामा के साथ विराजे हुए हैं. यह खास मंदिर समर्पित है सुदामा और कृष्ण की दोस्ती को. कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की दोस्ती को समर्पित इस मंदिर का नाम है नारायण धाम.

    सुदामा संग विराजे हैं कृष्ण

    नारायण धाम मंदिर उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित है. यह पूरे देश में एक मात्र मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अपने मित्र सुदामा के साथ मूर्ति रूप में विराजित हैं. श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता का प्रमाण नारायण धाम मंदिर में स्थित पेड़ों के रूप में आज भी देखा जा सकता है.

    मंदिर का महत्व

    दोस्ती को समर्पित इस मंदिर को उसी स्थान पर बनाया गया है जहां से कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की शुरुआत हुई थी. भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा के लिए जब उज्जैन में स्थित गुरु सांदीपनि के आश्रम में आए, तो यहां उनकी दोस्ती सुदामा नाम के गरीब ब्राह्मण से हुई.

    श्रीमद्भागवत के अनुसार एक दिन गुरु माता ने श्रीकृष्ण और सुदामा को लकड़ियां लाने के लिए भेजा. आश्रम लौटते समय तेज बारिश शुरू हो गई और श्रीकृष्ण-सुदामा एक पेड़ पर चढ़कर बारिश से बचते हुए आराम करने लगे.

    मान्यता है कि नारायण धाम वही स्थान है जहां श्रीकृष्ण और सुदामा बारिश से बचने के लिए रुके थे. लोगों का यह भी मानना है कि मंदिर के आसपास जो हरे-भरे पेड़ हैं वो उन्हीं लकड़ियों से फले-फूले हैं जो श्रीकृष्ण और सुदामा ने इकट्ठी की थी.

    Tags: Lord krishna

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