घर-खेत पानी-पानी, सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद माना डूब प्रभावित !
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घर-खेत पानी-पानी, सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद माना डूब प्रभावित !
किसान कुंवर सिंह लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावित माने गए

इस किसान ने 7 साल की कानूनी लड़ाई लड़ी, उसके घर में घुसा 3 फीट पानी बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट कि दखल पर उसे डूब प्रभावित माना गया

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बड़वानी: सरदार सरोवर बांध (Sardar sarovar dam) के डूब क्षेत्र में आने के बावजूद किसान कुंवर सिंह को अपने हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी. 7 साल कि इस कानूनी लड़ाई में कुंवर सिंह को जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिली तब तक उनके घर में 3 फीट पानी भर चुका था. ऐसे और भी कई मामले पानी बढ़ने के साथ-साथ सामने आ रहे हैं.

प्रशासन पर आरोप
ये सिर्फ एक किसान कुंवर सिंह का मामला नहीं है बल्कि ऐसे और भी कई मामले हैं. सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में आए दिन अलग अलग मामले सामने आ रहे हैं. बड़वानी जिले के ग्राम जांगरवा निवासी कुंवरसिंह बताते हैं कि लंबी लड़ाई लड़ने के बाद अभी एक हफ्ते पहले उन्हें डूब प्रभावित माना गया है. लेकिन इस लड़ाई ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया वर्तमान में उनके घर में 2 से 3 फीट पानी भरा हुआ है. कुंवर सिंह का कहना है कि जब तक उसे पुनर्वास का लाभ नहीं मिलेगा, तब तक वह अपना घर नहीं छोड़ेगा.

किसान कुंवर सिंह news 18 के साथ बातचीत में प्रशासन पर आरोप लगाते हैं कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी नहीं माना. वो बताते हैं कि उनकी खेती कि जमीन और घर दोनों ही डूब में आ रहे हैं इसके बावजूद प्रशासन ने उन्हें डूब प्रभावित नहीं माना अपने हक लिए उन्हें 7 साल कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. कुंवर सिंह ने बताया कि वह सात साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है पहले उसे स्थानीय स्तर पर अपात्र माना गया तो उसने सुप्रीम कोर्ट तक में गुहार लगाई.



चार घंटे में पात्र से अपात्र


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शिकायत निवारण प्राधिकरण (Grievance Redressal Authority) ने अनगिनत चक्कर लगवाने के बाद दो साल पहले उसे डूब प्रभावित माना और धार जिले में जमीन के बदले जमीन देने की बात कही. लेकिन इसके चार घंटे बाद ही उसे अपात्र घोषित कर दिया गया. इस पर कुंवरसिंह ने पुनर्विचार के लिए आवेदन दिया जिसके बाद गत तीन सितंबर को एनवीडीए ने उसे एक पत्र सौंपा है, इसमें उसकी करीब 28 प्रतिशत खेती डूब में मानी गई है और उसे पात्र बताया गया है.

गौरतलब है डूब प्रभावितों में पुनर्वास का लाभ 25 प्रतिशत से अधिक जमीन के डूबने पर दिया जाता है. निर्णय आ जाने के बावजूद कुंवर सिंह डरे हुए हैं उनका कहना है कि सिर्फ पत्र पर वो विश्वास नहीं कर सकते. वो अविश्वास के साथ कहते हैं कि यदि पत्र पर विश्वास कर घर छोड़ दिया और बाद में फिर अपात्र करार दे दिया तो क्या करेंगे? कुंवरसिंह ने मांग की है कि उसे जमीन के बदले जमीन या मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक वह अपना घर नहीं छोड़ेंगे भले ही वो पूरी तरह से डूब जाए.

कुंवरसिंह की पत्नी गोदावरी बाई को 7 सदस्यों वाले परिवार के भविष्य की चिंता सता रही है


भविष्य की चिंता
कुंवरसिंह की पत्नी गोदावरी बाई ने बताया कि परिवार में सात सदस्य हैं. खेती डूब गई तो आजीविका का कोई साधन नहीं है. अब घर और खेत दोनों डूब रहे हैं, ऐसे में छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे? हालांकि कुंवरसिंह को भूखंड और आवास निर्माण के लिए तीन लाख रुपए मिल चुके हैं लेकिन जमीन न मिलने कि दशा में उसने फिलहाल घर नहीं बनाया है. कुंवर सिंह ने तो अपने हक कि लड़ाई लड़ ली लेकिन न जाने कितने डूब प्रभावित हैं जो अपने हक लड़ाई भी नहीं लड़ सकते उन्हें तो बस मदद कि दरकार है.

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