'बाल आश्रम' को है कैलाश सत्‍यार्थी से दिवाली गिफ्ट का इंतजार

News18
Updated: October 11, 2014, 4:32 PM IST
'बाल आश्रम' को है कैलाश सत्‍यार्थी से दिवाली गिफ्ट का इंतजार
वर्ष 2014 का शांति का नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले कैलाश सत्‍यार्थी का दिवाली पर विराट नगर स्थित बाल आश्रम के बच्‍चे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दिवाली, दशहरा सहित अन्‍य त्‍योहारों पर कैलाश बाल आश्रम के बच्‍चों के साथ ही समय बिताते हैं। कैलाश ने इस शहर में कई बाल मजदूरों को खदानों से छुड़ाकर नई आजादी दी थी।

वर्ष 2014 का शांति का नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले कैलाश सत्‍यार्थी का दिवाली पर विराट नगर स्थित बाल आश्रम के बच्‍चे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दिवाली, दशहरा सहित अन्‍य त्‍योहारों पर कैलाश बाल आश्रम के बच्‍चों के साथ ही समय बिताते हैं। कैलाश ने इस शहर में कई बाल मजदूरों को खदानों से छुड़ाकर नई आजादी दी थी।

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वर्ष 2014 का शांति का नोबेल पुरस्‍कार पाने वाले कैलाश सत्‍यार्थी का दिवाली पर विराट नगर स्थित बाल आश्रम के बच्‍चे बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दिवाली, दशहरा सहित अन्‍य त्‍योहारों पर कैलाश बाल आश्रम के बच्‍चों के साथ ही समय बिताते हैं। कैलाश ने इस शहर में कई बाल मजदूरों को खदानों से छुड़ाकर नई आजादी दी थी।

हाल ही में दशहरा के दौरान कैलाश सत्‍यार्थी बाल आश्रम आए थे। इस दौरान वे यहां चार दिन रहे और अधिकतर समय यहीं के बच्‍चों के साथ वक्‍त बिताया। वैसे भी लगभग हर बार सत्‍यार्थी दशहरा में अपना वक्‍त इसी आश्रम के बच्‍चों के साथ गुजारते हैं।

बाल आश्रम के मैनेजर निपेंद्र सिंह ने बताया, 'कैलाश सत्‍यर्थी को राजस्‍थान से बेहद लगाव है। औपचारिक रूप से उन्‍होंने यहीं से आंदोलन की शुरुआत की थी। 1997 में बाल आश्रम की स्‍थापना की गई थी। यह साउथ एशियन कोअलिशन ऑफ चाइल्‍ड सर्विट्यूड (एसएसीसीएस) से जुड़ा एशिया का पहला संगठन है। राजस्‍थान के अलावा अन्‍य राज्‍यों में हमारा बच्‍चों के अधिकार और उनकी शिक्षा के लिए लड़ाई जारी है।'

हाल ही में बाल आश्रम ने 65 बच्‍चों को कोयला और पत्‍थर के खदानों से मुक्‍त कराया है। इनमें से कुछ आदिवासी बच्‍चे हैं जिन्‍हें रिश्‍तेदारों ने इसमें धकेला था।

गौरतलब है कि बाल मजदूरी के खिलाफ काम करने वाले मशहूर कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान के कट्टपंथियों के सामने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार को लेकर उठ खड़ी होने वाली किशोरी मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से वर्ष 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है।

कैलाश सत्यार्थी 'बचपन बचाओ' आंदोलन के प्रमुख हैं। उन्‍होंने वर्षों से बाल श्रम उन्मूलन के लिए न केवल प्रचार किया, बल्कि फैक्ट्रियों और मिठाई की दुकानों पर पर छापामारी कर अवैध रूप से रखे गए और बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किए गए बाल श्रमिकों को मुक्त कराया।

कैलाश सत्‍यार्थी का जन्‍म मध्य प्रदेश के विदिशा में 11 जनवरी 1954 को हुआ था। सत्यार्थी विदिशा, भोपाल फिर प्रदेश के अन्य जिलों और शहरों में बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान छेड़कर दिल्ली पहुंचे।
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वहां बचपन बचाओ आंदोलन के माध्यम से दुनियाभर में इस मुहिम को पहुंचाया और अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इससे जोड़ा। इस आंदोलन को विश्‍वव्‍यापी बनाया। कैलाश सत्यार्थी ने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए भी काफी काम किया है।

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First published: October 11, 2014, 8:46 AM IST
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