मुख्‍यमंत्री शिवराज ने किया बेटी सोना का कन्‍यादान, देखें तस्वीरें

विदिशा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत यूं तो हजारों लड़ककियों के हाथ पीले कर कन्यादान करवाया जाता है, लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्‍नी साधना अपनी धर्मपुत्री सोना का कन्‍यादान अपने हाथों से किया। विवाह की सारी रस्में बेतवा तट स्थित श्री बाढ़वाले गणेश मंदिर परिसर में संपन्न हुई।

Vandana jain | News18
Updated: February 13, 2015, 7:41 AM IST
मुख्‍यमंत्री शिवराज ने किया बेटी सोना का कन्‍यादान, देखें तस्वीरें
विदिशा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत यूं तो हजारों लड़ककियों के हाथ पीले कर कन्यादान करवाया जाता है, लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्‍नी साधना अपनी धर्मपुत्री सोना का कन्‍यादान अपने हाथों से किया। विवाह की सारी रस्में बेतवा तट स्थित श्री बाढ़वाले गणेश मंदिर परिसर में संपन्न हुई।
Vandana jain | News18
Updated: February 13, 2015, 7:41 AM IST
विदिशा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत यूं तो हजारों लड़ककियों के हाथ पीले कर कन्यादान करवाया जाता है, लेकिन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्‍नी साधना अपनी धर्मपुत्री सोना का कन्‍यादान अपने हाथों से किया। विवाह की सारी रस्में बेतवा तट स्थित श्री बाढ़वाले गणेश मंदिर परिसर में संपन्न हुई।



गौरतलब है कि करीब 15 साल पहले तत्कालीन सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निराश्रित बालिकाओं के पालन-पोषण के लिए इस विदिशा में सुंदर सेवा आश्रम शुरू किया था। आश्रम की सभी बालिकाओं के आवास, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था पिछले 15 साल से मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्‍नी स्वयं करते हैं। इस आश्रम की 7 बेटियों में से सबसे बड़ी बेटी सोना की शादी गुरुवार को संपन्न हुई।

एक मां जिस तरह अपनी बेटी के विवाह में सारी रस्‍में निभाती हैं, उसी तरह सीएम की पत्‍नी साधना सिंह सोना के सारे रिवाज अपने हाथों से पूरे किए। प्रदेश सरकार के अनेक मंत्री और विधायक इस विवाह समारोह में शामिल होकर सोना को अपना आशीर्वाद दिए।

हाईस्कूल तक 22 साल की पढ़ी सोना की शादी उसी के समाज के त्रिलोक चंद से हुई। सीहोर जिले के बुदनी तहसील के ग्राम बक्तरा निवासी त्रिलोक को खुद साधना सिंह ने अपनी मुंहबोली बेटी के लिए पंसद किया। पेशे से टेक्निशियन त्रिलोक का भरा-पूरा परिवार है।



बीते मंगलवार को सोना की मेंहदी की रस्‍म निभाई गई थी। हता दें, सोना खोआ गांव के एक मजदूर की बेटी है। 2000 में शिवराज सोना के गांव में दौरे पर गए थे। सात साल की उम्र में मां का साया सिर से उठ जाने और पिता के घर छोड़कर कहीं चले जाने के बाद वह अपने चाचा-चाची के पास जैसे-तैसे दिन काट रही थी। उसकी परवरिश के लिए ग्रामीणों ने शिवराज सिंह से आर्थिक मदद की गुहार लगाई, तो वह तुरंत तैयार हो गए। उसके भविष्य की बेहतरी के लिए वह उसे अपने सुंदर सेवा आश्रम ले आए। तब से अब तक उसकी परवरिश इसी आश्रम में हुई।
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First published: February 12, 2015, 7:41 PM IST
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