विदिशा के इस गांव में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में नदी के बीचोबीच नाव में बैठीं ये बच्चियां नौका विहार नहीं कर रही हैं. ये पढ़ने की लालसा में जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार कर स्कूल जा रही हैं. जी हां, यह हकीकत है विदिशा जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर बंधेरा गांव की.

Bharat Rajput | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 4, 2017, 2:20 PM IST
Bharat Rajput | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: September 4, 2017, 2:20 PM IST
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में नदी के बीचोबीच नाव में बैठीं ये बच्चियां नौका विहार नहीं कर रही हैं. ये पढ़ने की लालसा में जान हथेली पर रखकर उफनती नदी पार कर स्कूल जा रही हैं. जी हां, यह हकीकत है विदिशा जिला मुख्यालय से महज आठ किमी दूर बंधेरा गांव की. यहां नाव ही आवागमन का मुख्य साधन है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुरूप ग्राम उदय से भारत उदय कार्यक्रम देश भर में चलाया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या सुनने के बाद उनके निराकण के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को निर्देशित भी किया गया, लेकिन लगता है कि यह कार्यक्रम सिर्फ कागजों में बन कर रह गया. हकीकत क्या है यह बंधेरा गांव को देखने के बाद पता चलता है.

यहां शिक्षा के लिए माध्यमिक विद्यालय है लेकिन हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए बच्चियों को छह किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, वो भी जान हथेली पर रखकर. उफनती नदी में तेज बहाब के बीच नाव में बैठीं ये बच्चियां पढ़ने पलोह गांव जा रही हैं.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ बरसात में ही ऐसे हालात बनते हैं. बल्कि हमेशा ऐसे ही नदी पार कर ये दूसरे गांव पहुंच पाते हैं. स्टाप डेम से गिरने का डर तो कहीं नदी में मगरमच्छ के डर से भयभीत ये बच्चियां पढ़ाई करने डगमगाती नाव में आखिरकार स्कूल पहुंच ही जाती हैं.

इतना ही नहीं नाव यहां यातायात का मुख्य साधन बन चुकी है. गांव में इलाज के लिए आ रहे डॉक्टर भी नाव में ही सवार होकर गांव पहुंच कर मरीजों का इलाज करते हैं. नदी के दोनों और चार से पांच गांव के ग्रामीण नाव के सहारे ही एक दूसरे के पास पहुंच पाते हैं.

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First published: September 4, 2017, 12:19 PM IST
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