# Assembly Election : सिरोंज विधान सभा सीट पर कांटे की टक्कर, किस करवट बैठेगा ऊंट!

वर्तमान में कांग्रेस के गोवर्धन उपाध्याय विधायक हैं. जिन्होंने सरकार के कद्दावर मंत्री व्यापम घोटाले के आरोपी लक्ष्मीकांत शर्मा को पराजित किया था. भाजपा की झोली से सीट छीनने वाले गोवर्धन उपाध्याय 1985 में भी विधायक रह चुके हैं

News18 Madhya Pradesh
Updated: September 27, 2018, 3:38 PM IST
# Assembly Election : सिरोंज विधान सभा सीट पर कांटे की टक्कर, किस करवट बैठेगा ऊंट!
(File Photos)
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Updated: September 27, 2018, 3:38 PM IST
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा सीट पर घमासान तेज है. कांग्रेस के मौजूदा विधायक अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, तो पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा भी अपनी सक्रियता की वजह से टिकट मांग रहे हैं. इसके अलावा भी कांग्रेस और बीजेपी में दावेदारों की फेरिस्त लंबी है. कुल मिलाकर सिरोंज विधानसभा में मुकाबला दिलचस्प होगा.

दरअसल, वर्तमान में कांग्रेस के गोवर्धन उपाध्याय विधायक हैं. जिन्होंने सरकार के कद्दावर मंत्री व्यापम घोटाले के आरोपी लक्ष्मीकांत शर्मा को पराजित किया था. भाजपा की झोली से सीट छीनने वाले गोवर्धन उपाध्याय 1985 में भी विधायक रह चुके हैं. हालांकि विधायक के बारे में आम राय यह बन चुकी है कि अब यह चुनाव नहीं लड़ेंगे. पूरे कार्यकाल में निष्क्रियता के चलते यह ना तो जनता को खुश कर पाए और ना ही कार्यकर्ताओं को, जिसके चलते कांग्रेस मे प्रत्याशी बदलने की मांग जोरों पर है. (इसे पढ़ें- 'गौशाला' और 'राम-पथ' के बाद कमलनाथ का एक और बड़ा ऐलान!)



क्या हैं समास्याएं
कांग्रेस विधायक ने सिरोंज को जिला बनवाने और रेलवे लाइन लाने का वायदा किया था. लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ, वहीं सिरोंज अस्पताल मे स्टाफ बढाने के साथ सुविधाएं बढाने का वायदा भी पूरा नहीं हो पाया और अस्पताल की व्यवस्थाएं और खराब हो गईं. क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के साधनों की समस्या सबसे बड़ी समस्या है. पिछले पांच सालों में इस क्षेत्र में कोई भी काम नहीं हो पाया है.

जातीय समीकरण
204477 मतदाताओं वाली सिरोंज विधानसभा मे 282 मतदान केंद्र हैं. यहां 109340 पुरुष और 15147 महिला मतदाता हैं. 35000 मुस्लिम मतदातों के साथ 32000 अनुसूचित जाती और जनजाति के मतदाताओं के साथ यादव समाज 16000 कुशवाह समाज 16000 और ब्राहमण समाज के 12000 वोट हैं.

2018 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल में दावेदारों की संख्या बढ़ी है. बीजेपी के पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत शर्मा के समय यहां भाजपा के दावेदारों की संख्या कम रही थी, लेकिन शर्मा के पार्टी से बाहर रहने और पार्टी द्वारा वापसी की आधिकारिक घोषणा ना किए जाने के कारण कार्यकर्ता अभी शर्मा को दावेदार नहीं मान पा रहे हैं.
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लक्ष्मीकांत शर्मा लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और हाईकमान के सामने चुनाव लड़ने की इच्छा भी जाहिर कर चुके हैं. फिलहाल लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं. पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रघुवीर सिंह रघुवंशी भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर अपनी दावेदारी कर रहे हैं, वहीं सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटे सुधीर यादव यादव समाज के वोटों के साथ टिकिट की आस में बैठे हैं.

विदिशा के साथ सिरोंज से भी दावेदार जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा ब्राहण नेता के रूप मे उभरे हैं और लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ बेहद नजदीकी है. लक्ष्मीकांत और उमाकांत शर्मा के टिकट ना मिलने की हालत में श्यामसुंदर शर्मा के नाम पर समझौता किया जा सकता है. रमेश यादव भी यहां से दावेदारी जाता रहे हैं लक्ष्मीकांत के ख़ास यादव की पत्नी नगरपालिका अध्यक्ष हैं.

उधर कांग्रेस मे भी दावेदार कम नहीं हैं. वर्तमान विधायक गोवर्धन उपाध्याय अपने बेटे डॉ. सुधीर उपाध्याय के लिए प्रयासरत हैं. तो वहीं दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह भी यहां से प्रत्याशी बनाये जा सकते हैं. वहीं एक महिला दावेदार मशरत शाहिद हैं, जो दिग्विजय खेमे की मानी जातीं हैं.

रघुवंशी समाज भी यहां निर्णायक भूमिका में रहती हैं. इसी समाज के सुरेन्द्र रघुवंशी भी दावेदारी कर रहे हैं. विधायक गोवर्धन उपाध्याय ने विकास के नाम पर क्षेत्र मे एक भी काम नहीं किया है. बढती उम्र और खराब स्वास्थय के चलते लगातार 5 साल क्षेत्र से लगभग नदारद ही रहे हैं.

इस विधानसभा मे ब्राहमण वाद की राजनीति होने के कारण अन्य समाज भाजपा से पल्ला झाड़ सकतीं हैं. कांग्रेस मे भी गुटबाजी चरम पर है वर्तमान विधायक गोवर्धन उपाध्याय पर जहां निष्क्रियता का आरोप लग रहा है तो विधायक अपने बेटे सुधीर उपाध्याय को टिकिट दिलवाने प्रयासरत हैं. कुल मिलाकर सिरोंज विधानसभा मे मुकाबला दिलचस्प होगा.
(मनोज राठौर के साथ विदिशा से भरत राजपूत की रिपोर्ट)

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