बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट है विदिशा, वाजपेयी से लेकर सुषमा को पहुंचाया संसद

विदिशा सीट के गठन के लगभग 13 साल बाद यहां कांग्रेस ने जीत का स्वाद चखा था. 1980 में यहा भानु प्रताप ने बीजेपी उम्‍मीदवार राघवजी को हराया था

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 7, 2019, 9:47 AM IST
बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीट है विदिशा, वाजपेयी से लेकर सुषमा को पहुंचाया संसद
फाइल फोटो
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Updated: May 7, 2019, 9:47 AM IST
मध्य प्रदेश की विदिशा संसदीय सीट देश की उन सीटों में शामिल है, जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है. साल 1967 में जब विदिशा संसदीय सीट अस्तित्‍व में आ तब यहां हुए पहले आम चुनाव में भारतीय जनसंघ के उम्‍मीदवार केएस शर्मा ने जीत हासिल की थी. अस्तित्व में आने के बाद से यहां कांग्रेस सिर्फ दो बार ही जीत हासिल कर सकी. पहला 1980 के आम चुनाव में जबकि दूसरी बार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद हुए 1984 के आम चुनाव में.

विदिशा सीट के गठन के लगभग 13 साल बाद यहां कांग्रेस ने जीत का स्वाद चखा था. 1980 में यहा भानु प्रताप ने बीजेपी उम्‍मीदवार राघवजी को हराया था. वहीं 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बने लहर में कांग्रेस के भानु प्रताप ने फिर से जीत का स्वाद चखा. लेकिन, 1989 में हुए आम चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर यह सीट कांग्रेस से छीन लिया और कांग्रेस के भानु प्रताप को एक लाख से ज्यादा वोटों से मात दी.



शिवराज के संसदीय राजनीति की शुरूआत-

पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने अपनी संसदीय राजनीति की शुरूआत विदिशा से ही की. दरअसल,10वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हुए आम चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी ने दो जगहों से नामांकन किया था. वे उत्तर प्रदेश के लखनऊ और दूसरा मध्य प्रदेश के विदिशा से चुनाव लड़े और दोनों जगह से जीत हासिल की. बाद में उन्होंने विदिशा संसदीय सीट छोड़ दिया. इसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शिवराज सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया और वे पहली बार में ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे. इसके बाद शिवराज यहां से 1996, 1998, 1999 और 2004 में भी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

सुषमा स्‍वराज को मिली कमान-

शिवराज सिंह चौहान के प्रदेश की राजनीति में कदम रखने के बाद विदिशा सीट पर उप चुनाव कराना पड़ा. 2005 में हुए इस उपचुनाव में बीजेपी के रामपाल सिंह सांसद बने. इसके बाद 2009 के आम चुनाव में बीजेपी ने यहां से सुषमा स्वराज को मैदान में उतारा और वो करीब 3.5 लाख मतों से जीत गई. ऐसे में वह लोकसभा में नेता विपक्ष बनीं. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कश्ती पर सवार सुषमा ने करीब चार लाख से ज्यादा मतों से जीत हासिल की.

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