पढ़ें, नोबेल शांंति पुरस्‍कार विजेता कैलाश को ऐसे मिला था 'सत्‍यार्थी' नाम

'बचपन बचाओ आंदोलन' के संस्‍थापक कैलाश सत्‍यार्थी को पाकिस्‍तान की मलाला यूसुफजई के साथ ओस्‍लो में साल 2014 का नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। हालांकि, कैलाश शर्मा का कैलाश सत्‍यार्थी बनने का सफर बेहद दिलचस्‍प है।

News18
Updated: December 10, 2014, 3:55 PM IST
पढ़ें, नोबेल शांंति पुरस्‍कार विजेता कैलाश को ऐसे मिला था 'सत्‍यार्थी' नाम
बचपन बचाओ आंदोलन के संस्‍थापक कैलाश सत्‍यार्थी को पाकिस्‍तान की मलाला यूसुफजई के साथ ओस्‍लो में साल 2014 का नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। हालांकि, कैलाश शर्मा का कैलाश सत्‍यार्थी बनने का सफर बेहद दिलचस्‍प है।
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Updated: December 10, 2014, 3:55 PM IST
'बचपन बचाओ आंदोलन' के संस्‍थापक कैलाश सत्‍यार्थी को पाकिस्‍तान की मलाला यूसुफजई के साथ ओस्‍लो में साल 2014 का नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। हालांकि, कैलाश शर्मा का कैलाश सत्‍यार्थी बनने का सफर बेहद दिलचस्‍प है।

कैलाश के बड़े भाई ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि आर्य समाज और लोहिया आंदोलन से जुड़ने के बाद कैलाश के विचारों में अलग ही दृढ़ता आ गई। उन्होंने आर्य समाज की महत्‍वपूर्ण समस्याओं को लेकर 'सत्यार्थी' शीर्षक से किताब लिखी। कैलाश की यह किताब उन दिनों काफी चर्चा का विषय बनी। किताब के शीर्षक 'सत्‍यार्थी' से ही उनका नाम कैलाश शर्मा से कैलाश सत्‍यार्थी हो गया।

देश का बढ़ाया मान
कैलाश सत्‍यार्थी ने विदिशा की तंग गलियों से निकल पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। 1980 में 'बचपन बचाओ आंदोलन' की शुरुआत करने वाले कैलाश के मन में बचपन से ही गरीबों के लिए सहानुभूति थी। उनके बचपन के दोस्‍त अरुण श्रीवास्‍तव ने बताया कि कैलाश बचपन से ही बेहद संवेदनशील थे। गरीब तबके को लेकर उनके मन में हमेशा से एक अलग जगह रही। समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा कैलाश को आर्य समाज से मिली।

उनके बड़े भाई जगमोहन शर्मा ने बताया, 'कैलाश हम चार भाइयों में सबसे छोटे हैं। कैलाश को आर्य समाज से जुड़कर बहुत प्रेरणा मिली। बाबूलाल आर्य उनके गुरुजी थे। उन्हीं से उन्होंने आर्य समाज की शिक्षा-दीक्षा ली। बाद में स्वामी अग्निवेश और इंद्रवेश जैसे बड़े आर्य समाजियों से जुड़कर आंदोलन को व्यापक रूप दिया। आर्य समाज में व्याप्त पुरातन परंपराओं को भी सुधारने का प्रयास किया।'

सोशलिस्‍ट पार्टी की युवा शाखा के जन्‍मदाता
कैलाश सत्‍यार्थी ने 1971 में तत्‍कालीन सोशलिस्‍ट पार्टी की युवा शाखा समाजवादी युवजन का गठन किया और उसके जिला महामंत्री भी बने। सांसद चौधरी मुनव्वर सलीम ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी उनके राजनीतिक गुरु हैं। 1975 से 80 तक कैलाशजी के साथ राजनीतिक सफर किया। इसके बाद कैलाश सत्यार्थी दिल्ली चले गए। उनकी पत्नी सुमंधा कैलाश, उनके अधिवक्ता बेटे भुवन रिभु और पुत्रवधु प्रियंका बाल दासता के खिलाफ उनके संघर्ष के साथी हैं।
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ऑफिस में सब कहते हैं 'भाई साहब'
कैलाश सत्‍यार्थी के ऑफिस का स्‍टॉफ उन्‍हें 'भाई साहब' के संबोधन से पुकारता है। स्‍टाफ का कहना है कि हमने हमेशा से उन्‍हें भाई साहब ही कहा है। भाई साहब हमेशा चप्‍पल ऑफिस के बाहर ही उतारकर आते हैं। हमने कभी भी उन्‍हें गुस्‍सा करते हुए नहीं देखा। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्‍कान रहती है और वे सबसे हंसकर मिलते हैं।

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First published: December 10, 2014, 11:40 AM IST
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