नोबेल पुरस्‍कार : कैलाश सत्‍यार्थी और मलाला यूसुफजई को मिला शांतिदूतों का सबसे बड़ा सम्‍मान

Hindustan
Updated: December 10, 2014, 6:58 PM IST
नोबेल पुरस्‍कार : कैलाश सत्‍यार्थी और मलाला यूसुफजई को मिला शांतिदूतों का सबसे बड़ा सम्‍मान
भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई समेत 11 हस्तियों को बुधवार को इस साल के नोबेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम और नॉव्रे की राजधानी ओस्लो में विजेताओं को नोबेल पदक, नोबेल डिप्लोमा और उनकी पुरस्कार राशि की पुष्टि करने वाले पत्र दिए गए। सत्यार्थी और यूसुफजई को ओस्लो में सम्मानित किया गया।

भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई समेत 11 हस्तियों को बुधवार को इस साल के नोबेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम और नॉव्रे की राजधानी ओस्लो में विजेताओं को नोबेल पदक, नोबेल डिप्लोमा और उनकी पुरस्कार राशि की पुष्टि करने वाले पत्र दिए गए। सत्यार्थी और यूसुफजई को ओस्लो में सम्मानित किया गया।

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भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई समेत 11 हस्तियों को बुधवार को इस साल के नोबेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम और नॉव्रे की राजधानी ओस्लो में विजेताओं को नोबेल पदक, नोबेल डिप्लोमा और उनकी पुरस्कार राशि की पुष्टि करने वाले पत्र दिए गए। सत्यार्थी और यूसुफजई को ओस्लो में सम्मानित किया गया।

समारोह की शुरुआत

* पुरस्कार समारोह की शुरुआत होती है नॉवे की नोबेल कमेटी के अध्यक्ष के व्याख्यान से

* अध्यक्ष बताते हैं शांति पुरस्कार विजेताओं और उनके काम के बारे में

* इसके बाद वह विजेताओं को मंच पर बुलाकर नोबेल मेडल और डिप्लोमा देते हैं

* पुरस्कार वितरण के बाद विजेताओं को मंच पर भाषण के लिए बुलाया जाता है, इसे कहते हैं नोबेल लेक्चर

* इसमें विजेता अपना शांति का संदेश दुनिया के सामने बयां करते हैं
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दो जगह होते हैं आयोजन

नोबेल शांति पुरस्कारों का आयोजन नॉवे की राजधानी ओस्लो में किया जाता है। अन्य श्रेणी के नोबेल पुरस्कार 10 दिसंबर को ही स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में प्रदान किए जाते हैं।

अध्यक्ष देते हैं पुरस्कार

नोबेल शांति पुरस्कार ऑस्लो में नॉवे नोबेल कमेटी के अध्यक्ष नॉवे के महाराज और महारानी की मौजूदगी में प्रदान करते हैं। अन्य श्रेणियों के नोबेल पुरस्कार स्टॉकहोम में स्वीडन के महाराज प्रदान करते हैं।

बैंक्वेट के लिए खास परिधान

नोबेल पुरस्कार समारोहों के बाद नोबेल बैंक्वेट का आयोजन होता है। इसमें सामान्यतौर पर पुरुषों को सफेद बो टाई और काली पैंट, काले जैकेट और सफेद शट पहननी होती है। वहीं, महिलाओं के लिए ईवनिंग गाउन पहनने का चलन है। हालांकि इस विशेष आयोजन में अपने देश का पारंपरिक परिधान पहनने का भी रिवाज है।

पहली पंक्ति में बैठते हैं राज घराने के लोग

समारोह में पहली पंक्ति में नॉवे के राज घराने के लोग बैठते हैं। इसके बाद की पंक्ति में सरकारी नुमाइंदों के बैठने की जगह होती है। यहीं नॉवे के सांसद, सैन्य अधिकारी और अन्य विशिष्ट अतिथि विराजमान होते हैं।

आज का विशेष आयोजन

भारत-पाकिस्तान को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर बुधवार को शाम 6.05 बजे विशेष आयोजन होगा। इसमें दोनों देशों के कलाकार, वक्ता और जानी-मानी हस्तियां शिरकत करेंगी।

नोबेल सम्मान से होती हैं तीन चीजें

* नोबेल डिप्लोमा, नोबेल मेडल और पुरस्कार राशि बताने वाला एक दस्तावेज

* नोबेल डिप्लोमा में स्वीडन और नॉवे के कलाकारों की होती है बारीक व खूबसूरत कारीगरी

* ओस्लो सिटी हॉल में है एक हजार लोगों के बैठने की जगह
* 18 कैरेट ग्रीन गोल्‍ड में हाथ से बनाया जाता है नोबेल मेडल, इस पर चढ़ाया जाता है 24 कैरेट सोने का पानी

क्‍या है नोबेल पुरस्‍कार

नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष 1895 में शुरू किया गया। नोबेल पुरस्‍कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिया जाने वाला विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ 14 लाख डालर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल 355 आविष्कार किए, जिनमें 1867 में किया गया डायनामाइट का आविष्कार भी था।

नोबेल फाउंडेशन का प्रारम्भ 29 जून 1990 में हुआ। इसका उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों का आर्थिक रूप से संचालन करना है। नोबेल फाउंडेशन मे 5 लोगों की टीम है जिसका मुखिया स्वीडन की किंग ऑफ काउन्सिल द्वारा तय किया जाता है, अन्य चार सदस्य पुरस्कार वितरक संस्थान के ट्रस्टियों द्वारा तय किए जाते हैं। स्टॉकहोम में होने वाले नोबेल पुरस्कार सम्मान समारोह में पुरस्‍कार विजेताओं को स्वीडन के राजा के हाथों पुरस्कार दिया जाता है।

 

(हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से हिटी सिंडिकेशन द्वारा प्रकाशित)

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First published: December 10, 2014, 12:12 PM IST
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