जानिए, कैलाश सत्‍यार्थी से पहले किन भारतीयों ने जीता है नोबेल पुरस्‍कार

विश्‍व का सर्वोच्‍च पुरस्‍कार नोबेल प्राइज अब तक आठ भारतीयों को मिल चुका है। 2014 में शांति नोबेल पुरस्‍कार के लिए कैलाश सत्‍यार्थी के नाम की घोषणा हो चुकी है। कैलाश सत्‍यार्थी नवें भारतीय होंगे, जिन्‍हें इस सम्‍मान से नवाजा जाएगा। जानिए नोबेल पुरस्‍कार में भारत का नाम रोशन करने वाले भारतीयों के बारे में :

News18
Updated: October 10, 2014, 4:44 PM IST
जानिए, कैलाश सत्‍यार्थी से पहले किन भारतीयों ने जीता है नोबेल पुरस्‍कार
विश्‍व का सर्वोच्‍च पुरस्‍कार नोबेल प्राइज अब तक आठ भारतीयों को मिल चुका है। 2014 में शांति नोबेल पुरस्‍कार के लिए कैलाश सत्‍यार्थी के नाम की घोषणा हो चुकी है। कैलाश सत्‍यार्थी नवें भारतीय होंगे, जिन्‍हें इस सम्‍मान से नवाजा जाएगा। जानिए नोबेल पुरस्‍कार में भारत का नाम रोशन करने वाले भारतीयों के बारे में :
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विश्‍व का सर्वोच्‍च पुरस्‍कार नोबेल प्राइज अब तक आठ भारतीयों को मिल चुका है। 2014 में शांति नोबेल पुरस्‍कार के लिए कैलाश सत्‍यार्थी के नाम की घोषणा हो चुकी है। कैलाश सत्‍यार्थी नवें भारतीय होंगे, जिन्‍हें इस सम्‍मान से नवाजा जाएगा। जानिए नोबेल पुरस्‍कार में भारत का नाम रोशन करने वाले भारतीयों के बारे में :



कैलाश सत्‍यार्थी (11 जनवरी 1954) : कैलाश सत्‍यार्थी को 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। मध्यप्रदेश के विदिशा में एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले कैलाश लेक्चररशिप छोड़कर मासूमों को उनकी मासूमियत लौटाने की मुहिम में लग गए। उनकी इसी मुहिम ने कुछ ही वर्षों में ‘बचपन बचाओ आंदोलन’का रूप धारण कर लिया और यह मुहिम देश के हजारों बच्चों की जीवन रेखा बन चुकी है। कैलाश सत्यार्थी को भोपाल गैस त्रासदी के राहत अभियान और बच्चों के लिए काम करने को लेकर नोबेल पुरस्‍कार मिला है। कैलाश सत्यार्थी जेपी आंदोलन में भी सक्रिय रहे। धर्मयुग और दिनमान जैसे प्रतिष्ठित प‍त्र-पत्रिकाओं में लिखने के बाद कैलाश सत्यार्थी ने ‘संघर्ष जारी रहेगा’ के नाम से एक पत्रिका भी निकाली। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर इस पत्रिका को दबे-कुचले लोगों की आवाज बनाया।



वेंकटरामन "वेंकी" रामकृष्णन (1952) : वेंकटरामन को 2009 में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिए नोबेल पुरस्‍कारसे सम्‍मानित किया गया। वेंकटरामन एक जीव वैज्ञानिक हैं। इन्हें यह पुरस्कार कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम की कार्यप्रणाली व संरचना के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए दिया गया है। इनकी इस उपलब्धि से कारगर प्रतिजैविकों को विकसित करने में मदद मिलेगी। इसराइली महिला वैज्ञानिक अदा योनोथ और अमरीका के थॉमस स्टीज़ को भी संयुक्त रूप से इस सम्मान के लिए चुना गया। वेंकी के नाम से मशहूर वेंकटरामन सातवें भारतीय एवं तीसरे तमिल मूल के व्यक्ति हैं जिनको नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के चिदंबरम में हुई।

वीएएस नायपॉल (1932) : भारतीय मूल के लेखक वीएस नायपॉल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए नोबेल दिया गया। त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जन्मे विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल के पूर्वज गोरखपुर से गिरमिटिया मज़दूर के रुप में त्रिनिदाद पहुंचे थे। ब्रिटेन में बसे नायपॉल के उपन्यासों में भारत को काफी महत्व दिया गया, लेकिन भारत को लेकर उनका नज़रिया काफी विवादित भी रहा। उन्‍हें नूतन अंग्रेज़ी छंद का गुरु कहा जाता है। वे कई साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके हैं। उनकी शिक्षा त्रिनिदाद और इंगलैंड में हुई।


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अमर्त्य सेन (जन्मः 1933) : अमर्त्‍य सेन को 1998 में नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया। यह सम्‍मान प्राप्त करने वाले प्रोफेसर अमर्त्य सेन पहले एशियाई हैं। शांतिनिकेतन में जन्मे इस विद्वान अर्थशास्त्री ने लोक कल्याणकारी अर्थशास्त्र की अवधारणा का प्रतिपादन किया है। उन्होंने कल्याण और विकास के विभिन्न पक्षों पर अनेक पुस्तकें तथा पर्चे लिखे हैं। प्रोफेसर सेन आम अर्थशास्त्रियों के समान नहीं हैं। वह अर्थशास्त्री होने के साथ-साथ, एक मानववादी भी हैं। उन्होंने, अकाल, गरीबी, लोकतंत्र, स्त्री-पुरुष असमानता और सामाजिक मुद्दों पर जो पुस्तकें लिखी हैं, वे अपने-आप में बेजोड़ हैं। केनेथ ऐरो नाम के एक अर्थशास्त्री ने असंभाव्यता सिद्धांत नाम की अपनी खोज में कहा था कि व्यक्तियों की अलग-अलग पसंद को मिलाकर समूचे समाज के लिए किसी एक संतोषजनक पसंद का निर्धारण करना संभव नहीं है। प्रोफेसर सेन ने गणितीय आधार पर यह सिद्ध किया है कि समजा इस तरह के नतीजों के असर को करने के उपाय ढूंढ सकता है।


सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर(1910-1995) : सुब्रह्मण्‍यम को 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। विजेता डॉ. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर खगोल भौतिक शास्त्री थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार विजेतर सर सी.वी. रमन के भतीजे थे। बाद में चंद्रशेखर अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं। उन्होंने ‘व्हाइट ड्वार्फ’ यानी श्वेत बौने नाम के नक्षत्रों के बारे में सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इन नक्षत्रों के लिए उन्होंने जो सीमा निर्धारित की है, उसे चंद्रशेखर सीमा कहा जाता है। उनके सिद्धांत से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में अनेक रहस्यों का पता चला।



मदर टेरेसा (1910-1997) : मदर टेरेसा को 1979 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। उनका जन्म अल्बानिया में स्कोपजे नामक स्थान पर हुआ था, जो अब यूगोस्लाविया में है। उनका बचपन का नाम एग्नस गोंक्सहा बोजाक्सिऊ था। सन 1928 में वह आयरलैंड की संस्था सिस्टर्स आफ लोरेटो में शामिल हुईं और मिशनरी बनकर 1929 में कोलकाता आ गईं। उन्होंने बेसहारा और बेघरबार लोगों के दुख दूर करने का महान व्रत लिया। निर्धनों और बीमार लोगों की सेवा के लिए उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी नाम की संस्था बनाई और कुष्ठ रोगियों, नशीले पदार्थों की लत के शिकार बने लोगों तथा दीन-दुखियों के लिए निर्मल हृदय नाम की संस्था बनाई। यह संस्था उनकी गतिविधियों का केंद्र बनी। उन्होंने पूरी निष्ठा से न सिर्फ बेसहारा लोगों की निःस्वार्थ सेवा की, बल्कि विश्व शांति के लिए भी प्रयास जारी रखे।


चंद्रशेखर वेंकटरमन (1888-1970) : डॉ. चंद्रशेखर को 1930 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया। भौतिक शास्‍त्र में नोबेल प्राप्त करने वाले डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरमन पहले भारतीय थे। रमन का जन्म तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली के पास तिरुवाइक्कावल में हुआ था। उन्होंने चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। बाद में वह कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र के प्रोफेसर बने। उन्हें ‘सर’ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया
और प्रकाशकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने अनुसंधान में इस बात का पता लगाया कि किस तरह अपसरित प्रकाश में अन्य तरंग, लंबाई की किरणें भी मौजूद रहती हैं। उनकी खोज को रमन प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। सन 1928 में की गई इस खोज से पारदर्शी माध्यम से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरणों में आवृत्ति परिवर्तन की व्याख्या की गई है।



हरगोबिंद खुराना (1922-2011) : हरगोबिंद खुराना 1998 में चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्‍हें दो अमरीकी वैज्ञानिकों के साथ यह पुरस्‍कार मिला। भारतीय मूल के डॉ. खुराना का जन्म पंजाब में रायपुर में हुआ, रायपुर अब पाकिस्‍तान में है। उन्होंने लिवरपूल विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में डाक्टरेट की डिग्री ली। सन 1960 में वह विस्कौसिन विश्वविद्यालय में प्राध्यापक बने। उन्होंने अपनी खोज से आनुवांशिक कोड की व्याख्या की और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका का पता लगाया।



रवींद्रनाथ ठाकुर (1861-1943) : रवींद्रनाथ ठाकुर को 1913 में साहित्‍य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। साहित्‍य में नोबेल पाने वाले रवींद्रनाथ ठाकुर पहले भारतीय थे। ‘गुरुदेव’ के नाम से प्रसिद्ध रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में हुआ। उन्हें उनकी कविता संग्रह गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने अनेक प्रेमगीत भी लिखे हैं। गीतांजलि और साधना उनकी महत्वपूर्ण कृतियां हैं। महान कवि, नाटककार और उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध ‘गुरुदेव’ ने भारत के राष्ट्र गान का भी प्रणयन किया। सन 1901 में उन्होंने शांतिनिकेतन की स्थापना की, जो बाद में विश्वभारती विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

क्‍या है नोबेल पुरस्‍कार

नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में वर्ष 1895 में शुरू किया गया। नोबेल पुरस्‍कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिया जाने वाला विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार के रूप में प्रशस्ति-पत्र के साथ 14 लाख डालर की राशि प्रदान की जाती है। अल्फ्रेड नोबेल ने कुल 355 आविष्कार किए, जिनमें 1867 में किया गया डायनामाइट का आविष्कार भी था।

नोबेल फाउंडेशन का प्रारम्भ 29 जून 1990 में हुआ। इसका उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों का आर्थिक रूप से संचालन करना है। नोबेल फाउंडेशन मे 5 लोगों की टीम है जिसका मुखिया स्वीडन की किंग ऑफ काउन्सिल द्वारा तय किया जाता है, अन्य चार सदस्य पुरस्कार वितरक संस्थान के ट्रस्टियों द्वारा तय किए जाते हैं। स्टॉकहोम में होने वाले नोबेल पुरस्कार सम्मान समारोह में पुरस्‍कार विजेताओं को स्वीडन के राजा के हाथों पुरस्कार दिया जाता है।

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First published: October 10, 2014, 3:40 PM IST
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