Loksabha Elections: आखिर क्यों विदिशा लोकसभा सीट मानी जाती है बीजेपी का गढ़

यहां के बारे में मशहूर है कि यहां लोग सिर्फ बीजेपी के नाम भर से ही वोट दे देते हैं. यहां अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर शिवराज सिंह चौहान और सुषमा स्वराज भी सांसद रहे हैं.

News18 Madhya Pradesh
Updated: April 18, 2019, 3:14 PM IST
Loksabha Elections: आखिर क्यों विदिशा लोकसभा सीट मानी जाती है बीजेपी का गढ़
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Updated: April 18, 2019, 3:14 PM IST
मध्य प्रदेश की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक विदिशा लोकसभा सीट उन सीटों में से एक है जहां बीजेपी का सिक्का चलता है, यहां के बारे में यह मशहूर है कि यहां लोग सिर्फ बीजेपी के नाम भर से ही वोट दे देते हैं. दरअसल, विदिशा सीट शुरू से ही संघ के प्रभाव वाली सीट रही है. यहां अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर शिवराज सिंह चौहान और सुषमा स्वराज भी सांसद रहे हैं.

विदिशा में पहले लोकसभा चुनाव में ही जनसंघ ने जीत का परचम लहराया था और पंडित शिव शर्मा यहां से पहले सांसद बने थे. उसके बाद 1971 के चुनाव में भी विदिशा में भगवा पताका फहराई लेकिन 1977 का चुनाव यहां से जनता पार्टी ने जीता. इसके बाद 1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली. उसके बाद 1989 में यहां बीजेपी की जीत हुई और तब से लेकर आज तक केवल यहां बीजेपी का राज रहा है.



साल 1991 के चुनाव में देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट से जीते. अटल बिहारी ने उस साल विदिशा के साथ-साथ लखनऊ से भी चुनाव लड़ा था. वो दोनों जगह से विजयी हुए थे. उन्होंने लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया था.इसी वजह से बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से उपचुनाव लड़ाया और शिवराज सिंह चौहान 1991 से लेकर 2005 तक विदिशा से सांसद बनते आए.

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मध्य प्रदेश के सीएम बनने के बाद शिवराज सिंह को लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा. उस वक्त हुए उपचुनाव में बीजेपी के रामपाल सिंह यहां से सांसद बने.साल 2009 के चुनाव में सुषमा स्वराज यहां भाग्य आजमाने आयीं और जीत गयी. 2014 में फिर से सुषमा स्वराज ही यहां से चुनी गयीं.

विदिशा संसदीय सीट पर कांग्रेस अरसे से जीत के लिए तरस रही है. हालांकि इस बार विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. साल 1977 से लगातार जीतती आ रही विदिशा विधानसभा सीट पर इस बार कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की है. लेकिन बीजेपी इस सीट को सुरक्षित मानती है.

इस बार स्वास्थ्य कारणों से सुषमा स्वराज चुनाव ना लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान और साधना सिंह के चुनाव लड़ने की अटकलें जोर थीं लेकिन शिवराज ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. उसके बाद बीजेपी ने शिवराज के बेहद खास माने जाने वाले रमाकांत भार्गव को प्रत्याशी बनाया है. उनका सामना कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल से होगा.
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