दुनियाभर के सम्मान मिले, लेकिन हमने पद्मश्री तक नहीं दिया

2014 नोबेल शांति पुरस्‍कार के लिए भारत के कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को पुरस्‍कार मिलने की घोषणा हुई है। दोनों को संयुक्‍त रूप से शांति का नोबेल पुरस्‍कार से सम्मानित किया जाएगा। कैलाश 'बचपन बचाओ' आंदोलन नाम का एक सामाजिक संगठन चलाते हैं। इस संगठन के जरिए वह अब तक 80 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त करा चुका है। ये संगठन बाल मजदूरी से छुड़ाए गए बच्‍चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए भी काम करता है। सत्यार्थी ने बाल मजदूरी के खिलाफ दुनिया भर में कैंपेन किया है।

News18
Updated: October 10, 2014, 5:09 PM IST
दुनियाभर के सम्मान मिले, लेकिन हमने पद्मश्री तक नहीं दिया
2014 नोबेल शांति पुरस्‍कार के लिए भारत के कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को पुरस्‍कार मिलने की घोषणा हुई है। दोनों को संयुक्‍त रूप से शांति का नोबेल पुरस्‍कार से सम्मानित किया जाएगा। कैलाश बचपन बचाओ आंदोलन नाम का एक सामाजिक संगठन चलाते हैं। इस संगठन के जरिए वह अब तक 80 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त करा चुका है। ये संगठन बाल मजदूरी से छुड़ाए गए बच्‍चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए भी काम करता है। सत्यार्थी ने बाल मजदूरी के खिलाफ दुनिया भर में कैंपेन किया है।
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Updated: October 10, 2014, 5:09 PM IST
2014 नोबेल शांति पुरस्‍कार के लिए भारत के कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को पुरस्‍कार मिलने की घोषणा हुई है। दोनों को संयुक्‍त रूप से शांति का नोबेल पुरस्‍कार से सम्मानित किया जाएगा। कैलाश 'बचपन बचाओ' आंदोलन नाम का एक सामाजिक संगठन चलाते हैं। इस संगठन के जरिए वह अब तक 80 हजार बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त करा चुका है। ये संगठन बाल मजदूरी से छुड़ाए गए बच्‍चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए भी काम करता है। सत्यार्थी ने बाल मजदूरी के खिलाफ दुनिया भर में कैंपेन किया है।

नोबेल पुरस्‍कार की घोषणा शुक्रवार को ओस्लो में नॉरवेगियन नोबेल कमेटी के चेयरमैन थॉरजोम जैगलैंड ने की। 278 नामांकित लोगों की लंबी सूची में से इन विजेताओं को चुना गया है। ये अब तक के सबसे ज्‍यादा उम्‍मीदवारों की सूची है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विदिशा में जन्मे कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलना भारत और मध्यप्रदेश के लिए महान गौरव का दिन है।

उनके जीवन पर कई डॉक्यूमेंट्री, टीवी शो और टॉक शो भी बने हैं। सत्यार्थी को इसके पहले भी कई पुरस्‍कार मिल चुके हैं। लेकिन इन पुरस्कारों में किसी भी भारतीय पुरस्कार का नाम शुमार नहीं है। नोबेल पुरस्‍कार समेत विदेशों से ढेरों अवॉर्ड प्राप्‍त कर चुके कैलाश सत्‍यार्थी को अब तक भारत से एक भी पुरस्कार नहीं दिया गया है।

भारत में बच्चों के अधिकारों को लेकर आवाज उठाने वाले कैलाश सत्यार्थी और करीब दो साल पहले लड़कियों की शिक्षा के पक्ष में आवाज उठाने के चलते तालिबान की गोलियों का शिकार हो चुकी पाकिस्तानी युवती मलाला युसूफजई को वर्ष 2014 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई। 11 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि वाला यह सम्मान स्वीडन के उद्योगपति और वर्ष 1895 में नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत करने वाले अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि के मौके पर दिया जाएगा।

कैलाश सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष हैं। इसमें लगभग 70,000 स्वयंसेवक हैं, जो लगातार मासूमों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के लिए कार्यरत हैं. अब तक 80 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी कैलाश सत्यार्थी ने बदली है।11 जनवरी 1954 को जन्मे कैलाश सत्यार्थी भोपाल गैस त्रासदी के राहत अभियान में भी इन्‍होंने जमकर काम किया।

कैलाश सत्‍यार्थी को अब तक मिले ये सम्मान
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2014: नोबेल शांति पुरस्‍कार नोबल (पाकिस्‍तान के मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्‍त रूप से)
2009: डेफेंडर ऑफ डेमोक्रेसी अवार्ड (अमेरिका)
2008: अलफांसो कोमिन इंटरनेशनल अवार्ड (स्‍पेन)
2007: मेडल ऑफ द इटालियन सीनेट
2006: फ्रीडम अवार्ड (अमेरिका)
2002: वैलेनबर्ग मेडल, युनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन
1999: फ्राइड्रीच इबर्ट स्‍टीफटंग अवार्ड (जर्मनी)
1995: रॉबर्ट एफ. कैनेडी ह्यूमन राइट अवार्ड (अमेरिका)
1985: द ट्रमपेटेर अवार्ड (अमेरिका)
1984: द आचेनेर इंटरनेशनल पीस अवार्ड (जर्मनी)

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First published: October 10, 2014, 4:23 PM IST
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