Video: जमीन बचाने के लिए जहर पीने वाले दंपति के खिलाफ दर्ज हुई FIR

अपनी जमीन बचाने के लिए किसान और उसकी पत्‍नी ने जहर खा लिया था.

मध्य प्रदेश के गुना में जमीन पर कब्जा हटाने गई सरकारी टीम के विरोध में किसान दंपती के कीटनाशक दवा पीने का Video सोशल मीडिया पर वायरल होने से चर्चा में आया मामला.

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    गुना. मध्य प्रदेश के गुना (Guna) में कैंट थाना इलाके में अपनी जमीन बचाने के लिए 'जहर' यानी कीटनाशक दवा (Pesticide) पीने वाले किसान और उसकी पत्नी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है. कैंट पुलिस ने इस मामले में कीटनाशक पीकर आत्महत्या की कोशिश करने को लेकर किसान रामकुमार अहिरवार, उसकी पत्नी सावित्री बाई, शिशुपाल अहिरवार समेत 7 अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. इन लोगों के खिलाफ पटवारी ने आवेदन दिया था, जिसमें सभी के ऊपर शासकीय कार्य मे बाधा डालने के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने इसी शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. जहर पीने वाले दंपति का फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है. इस पूरी घटना का Video सोशल मीडिया में वायरल हो गया है.

    मंगलवार को कैंट थाना इलाके के जगतपुर चक पर पुलिस अतिक्रमण (Encrochment) हटाने पहुंची थी. इस दौरान जबर्दस्त हंगामा हो गया. सरकारी टीम के मुताबिक मॉडल कॉलेज के लिए आवंटित 20 बीघा जमीन पर कई वर्षों से अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी. उसे हटाने के लिए पुलिस और राजस्व विभाग की टीम पहुंची थी, जिसका वहां मौजूद लोगों ने विरोध किया. पीड़ित किसान और उसकी पत्नी ने खड़ी फसल पर प्रशासन की जेसीबी चलती देख कीटनाशक दवा पी ली. इस पर हंगामा मच गया था. पुलिस ने आज इसी मामले में एफआईआर दर्ज की है.



    कॉलेज प्रबंधन ने दी सफाई
    इधर, मामले में कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि 20 बीघा जमीन प्रदेशस्तर के साइंस कॉलेज के निर्माण के लिए दी गई थी.  12 करोड़ की लागत से कॉलेज का निर्माण होना था. इस जमीन पर बाउंड्री बनाने के लिए निर्माण एजेंसी PIU को 84 लाख रुपए भी दिए जा चुके हैं. लेकिन आज तक निर्माण नहीं किया जा सका. इस कारण जमीन पर कब्जा कर लिया गया. कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि अगर अगले 6 महीने के भीतर निर्माण शुरू नहीं होता है, तो प्रोजेक्ट कैंसिल हो जाएगा. कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि विवाद को देखते हुए कलेक्टर से दूसरी जगह जमीन की मांग भी की गई है.

    आपको बता दें कि मॉडल कॉलेज की जमीन के इस विवाद के पीछे सरकारी लापरवाही की लंबी कहानी सामने आई है. विभागीय सुस्ती की वजह से इस जमीन पर गब्बू पारदी नामक शख्स ने कब्जा कर लिया था. आरोप है कि उसने यह जमीन किसान को 3 लाख रुपए में दे दी. किसान राजू अहिरवार कई साल से इस पर खेती कर रहा था. मंगलवार को जब पुलिस और राजस्व विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची, तब भी इस खेत में मक्के की फसल खड़ी थी. फसल नष्ट होता देख किसान और उसकी पत्नी ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की. इस पर बवाल मचा हुआ है.