OPINION: कितनी कारगर साबित होगी ज्योतिरादित्य सिंधिया की डिनर डिप्लोमेसी?

प्रदेश में लगातार सक्रिय सिंधिया की डिनर डिप्लोमेसी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है
प्रदेश में लगातार सक्रिय सिंधिया की डिनर डिप्लोमेसी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की डिनर डिप्लोमेसी और सौजन्य भेंट की राजनीति ने प्रदेश का राजनीतिक पारा एक बार फिर बढ़ा दिया है.

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दिनेश गुप्ता

भोपाल. कांग्रेस की राजनीति में छाई धुंध भी छंट नहीं रही है. लोकसभा का चुनाव हार जाने के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindhiya) की अगली भूमिका को लेकर अटकलबाजी लगातार चलती रहतीं हैं. सिंधिया को कांग्रेस आलाकमान प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करेगी अथवा उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया जाएगा, यह भी आने वाले दिनों में तय होना है.

अपनों के साथ परायों के घर भी पहुंचे सिंधिया
अपने दो दिवसीय भोपाल प्रवास के दौरान सिंधिया की दो मुलाकातें काफी महत्वपूर्ण रहीं हैं. पहली मुलाकात उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से की. सिंधिया शुक्रवार की शाम भोपाल पहुंचे थे. अपने संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी के पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह के पुत्र के विवाह समारोह में शिरकत करने के बाद सिंधिया सीधे प्रजापति से मुलाकात करने उनके बंगले पर पहुंच गए. विधानसभा का विशेष सत्र चल रहा है, सत्र के कारण विधायक भोपाल में हैं. विधायकों से मुलाकात के लिए यह समय भी उपयुक्त था. सत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाए जाने के संकल्प को पारित किया जाना है.
सीएम ने बुलाई विधायकों की बैठक


विधानसभा अध्यक्ष प्रजापति, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के समर्थक हैं. सिंधिया ने डिनर अपने कट्टर समर्थक परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत के निवास पर किया. इस डिनर में कमलनाथ मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्य शामिल थे. सिंधिया के भोपाल पहुंचने से पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोपहर में विधायक दल की बैठक बुलाई. उन्होंने विधायकों से दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें कोई शिकायत है तो सीधे कहें. सिंधिया शाम को भोपाल पहुंचे. उन्होंने अपने इस दौरे को सामान्य बताते हुए कहा कि वे कोई राजनीति करने यहां नहीं आए हैं. उनकी यात्रा का उद्देश्य लोगों से मेल मुलाकात है. परिवहन मंत्री राजपूत के बंगले पर सिंधिया की विधायकों से लंबी बातचीत भी हुई. सरकार के कामकाज को लेकर भी उन्होंने विधायकों से फीडबैक लिया. 6 माह पूर्व भी सिंधिया इसी तरह भोपाल आए थे. उस वक्त डिनर का कार्यक्रम समर्थक मंत्री तुलसी सिलावट के घर पर रखा गया था. मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस डिनर में शामिल हुए थे. गोविंद राजपूत के बंगले पर गुरुवार को आयोजित किए गए डिनर में मुख्यमंत्री कमलनाथ नहीं पहुंचे. मुख्यमंत्री आईएएस अफसरों की सर्विस मीट में डिनर कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका कार्यक्रम काफी पहले से तय था. एक ही समय दो जगह जाना संभव नहीं था, जबकि विधायकों को पूरी उम्मीद थी कि कमलनाथ सौजन्यता निभाने डिनर में आएंगे जरूर.

News - पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने सिंधिया का शानदार स्वागत किया
पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने सिंधिया का शानदार स्वागत किया


'पांसे से रिश्ता मराठा होने के कारण'
शुक्रवार की सुबह सिंधिया मुख्यमंत्री कमलनाथ के कट्टर समर्थक पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे से सौजन्य मुलाकात करने पहुंचे. इस मुलाकात पर सिंधिया ने कहा कि पांसे से उनका रिश्ता मराठा होने के कारण है. सिंधिया ने तान्हाजी को टैक्स फ्री किए जाने के सवाल पर पत्रकारों से कहा कि हर एतिहासिक फिल्म को राहत मिलनी चाहिए. ज्ञातव्य है कि कमलनाथ सरकार ने दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक को टैक्स फ्री किया है

इस वजह से अटका है प्रदेश अध्यक्ष का फैसला
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बने हुए 14 माह का समय बीत चुका है. पिछले 14 महीनों से ही कमलनाथ मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. 15 साल बाद प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी में सिंधिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद सिंधिया को सौंपे जाने की अटकलें लगातार चल रहीं हैं. कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे विरोधियों के चलते अब तक इस फैसला नहीं हो सका है. पहले महाराष्ट्र, और झारखंड चुनाव को फैसला टलने की वजह बताया गया. अब दिल्ली चुनाव के बाद फैसले की उम्मीद की जा रही है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पूर्णकालिक अध्यक्ष न होने के कारण कांग्रेस के कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं. पार्टी के महासचिव और प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया भी सत्ता और संगठन में समन्वय की कमी पर अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर प्रकट कर चुके हैं. अध्यक्ष का फैसला न होने के कारण ही विभिन्न निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्ति की प्रक्रिया भी अब तक शुरू नहीं हुई है. राजनीतिक नियुक्तियां न होने से भी कार्यकर्ताओं में असंतोष दिखाई देता है. कहा यह जा रहा है कि कमलनाथ और सिंधिया के बीच नामों पर सहमति न बनने के कारण नियुक्तियां टलती जा रहीं हैं.

पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मिले सिंधिया
सिंधिया आज अपने भोपाल दौरे के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिवाजी नगर सिथत दफ्तर भी पहुंचे. यहां उन्होंने प्रदेश भर से आए कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. इस मुलाकात में भी सरकार का कामकाज ही मुख्य विषय रहा. अधिकांश कार्यकर्ताओं ने सरकार में सुनवाई न होने की शिकायत भी की. प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं से चर्चा किए जाने का प्रचार पिछले 3 दिन से सोशल मीडिया पर चल रहा था. सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं से अपील की गई थी कि वे सिंधिया के समक्ष अपने मन की बात रखें. सिंधिया समर्थक पिछले एक साल से लगातार उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की मांग कर रहे हैं. सिंधिया के इस दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया. उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते हुए नारे भी लगे. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता पकंज चतुर्वेदी कहते हैं कि कार्यकर्ताओं की इच्छा को समझते हुए सिंधिया को जिम्मेदारी देने में अब देरी नहीं होना चाहिए.

News - डिनर के दौरान सिंधिया विधायकों से लगातार सरकार का फीडबैक लेते रहे
डिनर के दौरान सिंधिया विधायकों से लगातार सरकार का फीडबैक लेते रहे


राज्यसभा जाने से रोकने की कवायद भी कर रहे हैं विरोधी
अप्रैल में राज्यसभा के तीन पद खाली हो रहे हैं. विधानसभा के मौजूदा अंक गणित के अनुसार कांग्रेस के खाते में 2 सीटें आ रहीं हैं. राज्यसभा के जो 3 सदस्य अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी हैं. दिग्विजय सिंह लगातार दो बार से राज्यसभा जा रहे हैं. पार्टी उन्हें एक और मौका देगी इस बात पर संशय बना हुआ है. दिग्विजय सिंह भी बहुत ज्यादा आशान्वित दिखाई नहीं दे रहे हैं. भोपाल से लोकसभा का चुनाव हारने के बाद से ही उनका पूरा ध्यान इस क्षेत्र की जमीनी राजनीति पर लगा हुआ है. वे अभी से अगले लोकसभा के चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं. सिंधिया विरोधियों के सामने समस्या यह है कि यदि उन्हें अब प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए रोका गया तो वे राज्यसभा की दावेदारी करेंगे. विरोधियों की कोशिश यह है कि स्थितियां ऐसी बनाई जाएं कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के स्थान पर राज्यसभा जाने पर सिंधिया सहमति दे दें. अभी केन्द्र में कांग्रेस की सरकार भी नहीं है. सिंधिया की भूमिका वहां अहम नहीं होगी. मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद अपने समर्थक को दिलाना चाहते हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह का नाम भी चर्चा में है. मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि चार दशक की राजनीति इस बात की ओर इशारा कर रही है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे विरोधी ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश की सक्रिय राजनीति में आने नहीं देगें.

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