क्‍यों न हनी ट्रैप मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए: हाईकोर्ट
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हनी ट्रैप (Honey trap) मामले में हाईकोर्ट (High Court) (High Court) ने राज्य शासन (गृहसचिव) से बंद लिफ़ाफ़े में दो सप्‍ताह के भीतर जवाब मांगा है. इस मामले में, हाई कोर्ट ने एसएसपी, एसआईटी, राज्य शासन समेत सात लोगो को नोटिस जारी किए हैं.

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इंदौर: मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के चर्चित हनी ट्रैप (Honey trap) मामले में जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) में बार-बार परिवर्तन को लेकर हाईकोर्ट (High Court) में दाखिल जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट (High Court) ने राज्‍य के गृह सचिव से पूछा है कि क्‍यों न हनीटैप मामले की जांच सीबीआई (CBI) से करवाई जाए. इस बाबत, हाईकोर्ट ने गृह सचिव को दो सप्‍ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. उल्‍लेखनीय है कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि बार-बार एसआईटी (SIT)बदलने से जांच प्रभावित हो सकती है.

याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता मनोहर दलाल ने अपनी याचिका में कहा है कि हनी ट्रैप (Honey trap) मामले में बार-बार एसआईटी (SIT)में फेरबदल होने से न केवल जांच प्रभावित होगी, बल्कि जांच की निष्पक्षता और गोपनीयता भी प्रभावित होगी. गौरतलब है कि हनी ट्रैप (Honey trap) के लिए गठित एसआईटी (SIT) में तीन बार शीर्ष स्तर तक फेरबदल हो चुका है. जिसमें, एसआईटी (SIT)चीफ संजीव शमी को हटाकर राजेंद्र कुमार को एसआईटी (SIT) चीफ नियुक्त किया जाना भी शामिल है. शुक्रवार को उच्च न्यायलय ने एसआईटी (SIT) में हो रहे बदलाव के साथ पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है.

अब तक नहीं हुआ किसी भी शख्‍स के नाम का खुलासा
शुक्रवार को हाईकोर्ट (High Court) की इंदौर खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि बहुचर्चित हनी ट्रैप (Honey trap) मामले में जांच के लिए बनाई गई एसआईटी (SIT) चीफ को बार-बार क्यों बदला जा रहा है. इसका जवाब गृह विभाग के सचिव बंद लिफाफे में हाइकोर्ट के सामने प्रस्तुत करें. इस दौरान, हाइकोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी थी कि पुलिस ने अब तक हनी ट्रैप (Honey trap) से जुड़े किसी भी शख्‍स के नाम का खुलासा नहीं किया है. वहीं, बार-बार एसआईटी (SIT) में हो रहे बदलाव का असर पुलिस जांच पर पड़ रहा है. लिहाजा, पूरे मामले की सीबीआई (CBI) से जांच कराई जाए.
जांच को प्रभावित कर सकते हैं प्रभावशाली लोग


हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से यह भी दलील दी गई कि गिरफ्तार आरोपी प्रभावशाली हैं, इसमें कई रसूखदारों के नाम आ रहे है, अधिकारियों के परिवर्तन से जांच प्रभावित होने की पूरी आशंका है. इन दलील को मानते हुए हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर तक जवाब पेश करने के लिए कहा है. वहीं, हाइकोर्ट ने अब तक इस मामले में लगाई गई सभी याचिकाओं को शामिल कर दिया है. सभी की सुनवाई एक साथ होंगी.

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