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अनाथ लड़के ने JEE में हासिल की 270वीं रैंक, गलत लिंक क्लिक करने से चली गई IIT की सीट

आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि नियमों के तहत संस्थान को ऐसा करने का अधिकार नहीं है. प्रवेश के लिए अब सिद्धांत को अगले साल फिर से इस परीक्षा में बैठना होगा.
आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि नियमों के तहत संस्थान को ऐसा करने का अधिकार नहीं है. प्रवेश के लिए अब सिद्धांत को अगले साल फिर से इस परीक्षा में बैठना होगा.

आगरा के रहने वाले सिद्धांत बत्रा (Siddhanth Batra) के पिता की कई साल पहले मौत हो गई थी. मां ने अकेले उनकी परवरिश की. दो साल पहले मां का भी निधन हो गया. इस हाल में भी सिद्धांत ने कड़ी मेहनत की और JEE एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 270 लेकर आए. लेकिन एक छोटी सी गलती से उन्होंने आईआईटी बॉम्‍बे में एंट्री का मौका गंवा दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 8:48 AM IST
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मुंबई. मुफलिसी, अकेलेपन से जूझते हुए कड़ी मेहनत करने के बाद आपको कुछ हासिल हो और एक छोटी सी गलतफहमी से वो खत्म हो जाए, तो कैसा लगता है? इसका अंदाजा वही लगा सकते हैं, जो इस दौर से गुजर चुके हैं. आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) में पढ़ने की इच्छा रखने वाले एक अनाथ स्टूडेंट के साथ ऐसा ही हुआ. आगरा के रहने वाले सिद्धांत बत्रा (Siddhanth Batra) के पिता की काफी साल पहले मौत हो गई थी. मां ने अकेले उनकी परवरिश की. दो साल पहले मां की भी मौत हो गई. इस हाल में भी सिद्धांत बत्रा ने कड़ी मेहनत की और JEE एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 270 लेकर आए. लेकिन एक छोटी सी गलती से उन्होंने आईआईटी बॉम्‍बे में एंट्री का मौका गंवा दिया.

दरअसल, सिद्धांत बत्रा को आईआईटी बॉम्‍बे में अपने मनचाहे कोर्स में सीट मिल गई थी, लेकिन उन्होंने गलतफहमी में एक गलत लिंक क्लिक कर दिया. जिसके बाद वो सीट उसके हाथ से निकल गयी. इतना बड़ा मौका हाथ से निकलने के बाद अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से न्‍याय की गुहार लगाई है. सिद्धांत ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए अपील की है कि उसके लिए एक एक्‍स्‍ट्रा सीट बढ़ाई जाए. उनकी अपील पर मंगलवार को सुनवाई होनी है.

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ऐसे हाथ से गई सीट
सिद्धांत बत्रा इस वक्त आगरा में अपने नाना-नानी के साथ रहते हैं. उन्हें 'अनाथ पेंशन' भी मिलती है. JEE में अच्छी रैंक होने पर उन्हें IIT-बॉम्‍बे में इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग में बीटेक की सीट भी मिल गई थी. 18 अक्‍टूबर को वह सीट बंटवारे के पहले राउंड को पूरा कर चुके थे. 31 अक्‍टूबर को अपने रोल नंबर के अपडेट देखते समय उन्होंने एक लिंक देखा. इसपर लिखा था, 'सीट निर्धारण और अगले राउंड से विदड्रॉ'. सिद्धांत ने यह सोचकर इस पर क्लिक कर दिया कि उसे मनचाही सीट मिल गई है. इसलिए उसे अब अगले राउंड की जरूरत नहीं.

बॉम्‍बे हाईकोर्ट में भी हुई सुनवाई
हालांकि, 10 नवंबर को सिद्धांत बत्रा ने पाया कि उनका नाम इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग कोर्स में प्रवेश पाने वाले छात्रों की लिस्‍ट में नहीं है. इस कोर्स के लिए कुल 93 सीटें थीं. उसने राहत पाने के लिए बॉम्‍बे हाईकोर्ट में अपील की. हाईकोर्ट में इस पर 19 नवंबर को सुनवाई हुई. इसमें अदालत ने आईआईटी से उसकी अपील पर विचार करने को कहा.

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आईआईटी बॉम्बे ने कहा कि नियमों के तहत संस्थान को ऐसा करने का अधिकार नहीं है. प्रवेश के लिए अब सिद्धांत को अगले साल फिर से इस परीक्षा में बैठना होगा. लिहाजा अब सिद्धांत ने सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगी है.
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