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शिवसेना से क्यों टूटी बीजेपी की दोस्ती, पहली बार बोले अमित शाह- पढ़ें 5 बड़ी बातें

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Updated: November 14, 2019, 7:28 AM IST
शिवसेना से क्यों टूटी बीजेपी की दोस्ती, पहली बार बोले अमित शाह- पढ़ें 5 बड़ी बातें
शिवसेना के साथ दोस्ती टूटने के बाद अमित शाह ने पहली बार बयान दिया है. फोटो. पीटीआई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों (Maharashtra assembly election 2019) के बाद आए नतीजों में बीजेपी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसे 105 सीटें मिलीं. शिवसेना को 56 सीटें मिलीं. वहीं एनसीपी को 54 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं. 50-50 के फॉर्मूले की मांग करते हुए शिवसेना ने सीएम पद की मांग की और इसके बाद दोनों दलों की करीब 3 दशक पुरानी दोस्ती टूट गई

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  • Last Updated: November 14, 2019, 7:28 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने पहली बार महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट (Maharashtra Political Crisis) और वर्षों पुरानी सहयोगी शिवसेना से दोस्ती टूटने पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है. अमित शाह ने कहा, हमने शिवसेना (Shiv sena) से दोस्ती नहीं तोड़ी है, वह सरकार बनाने से पहले नई शर्तें लेकर आ गए, ये ऐसी शर्तें थीं, जिन्हें हमारे लिए मानना संभव नहीं था. बता दें कि इससे पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने कहा था कि बीजेपी के कारण ये गठबंधन टूटा है. इसके बाद अब शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारी कर रही है.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद आए नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसे 105 सीटें मिलीं. शिवसेना को 56 सीटें मिलीं. वहीं एनसीपी को 54 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं. 50-50 के फॉर्मूले की मांग करते हुए शिवसेना ने सीएम पद की मांग की और इसके बाद दोनों दलों की करीब 3 दशक पुरानी दोस्ती टूट गई. अब दोनों ओर से इस बारे में आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है.

शिवसेना से इसलिए टूटी दोस्ती
एएनआई के साथ इंटरव्यू में जब अमित शाह से पूछा गया कि शिवसेना की ओर से कहा गया है कि विश्वासघात हुआ है तो अमित शाह ने कहा, लेकिन ये विश्वासघात हमने तो नहीं किया है. हम तो शिवसेना के साथ सरकार बनाने को तैयार थे, लेकिन उनकी कुछ चीजें ऐसी थीं, जिन्हें हम मान नहीं सकते थे. प्रचार के दौरान पीएम मोदी और मैंने कई बार कहा कि अगर हमारा बहुमत आता है तो देवेंद्र फडणवीस ही सीएम होंगे, लेकिन अगर उन्हें कुछ परेशानी थी, तो उसी समय बताना था.

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर
किसी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए इतना समय नहीं मिला. 18 दिन दिए गए थे. जब विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया तब राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए पार्टियों को बुलाया. इसके बाद न ही हम, न ही शिवसेना और न ही एनसीपी बहुमत लायक नंबर ला पाईं. अगर आज भी किसी पार्टी के पास आंकड़े हैं तो वह राज्यपाल के पास जाकर सरकार का दावा कर सकते हैं.

राज्यपाल की भूमिका...
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राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने के मुद्दे पर अमित शाह ने कहा, इस मुद्दे पर विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है. एक संवैधानिक पद को इस तरह से राजनीति में घसीटना मैं नहीं मानता कि ये एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है. राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए पूरा समय दिया.

कपिल सिब्बल को दिया ऐसे जवाब
अमित शाह ने कांग्रेस के आरोप पर भी जवाब दिया. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि हमें सरकार बनाने का न्योता राज्यपाल ने नहीं दिया. इस पर गृहमंत्री ने कहा, सभी के पास समय है, अभी भी सब के पास मौका है. किस का मौका छिन गया. कपिल सिब्बल जैसे वकील बच्चों के समान दलीलें दे रहे हैं. आपके पास मौका है, आप बनाइए न सरकार.

नहीं तो राज्यपाल पर ही आरोप लगते
अमित शाह ने कहा, राज्यपाल ने इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाया, अगर ज्यादा देर करते तो यही विपक्ष वाले कहते कि महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार चल रही है. जहां तक सरकार बनाने की बात है तो वह अपने नंबर लेकर राज्यपाल के पास जा सकते हैं. उन्हें किसी ने रोका नहीं है. इस मुद्दे पर विपक्ष राजनीति कर रहा है.

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First published: November 14, 2019, 7:00 AM IST
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