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भीमा कोरेगांव हिंसा की बरसी: सभा की इजाजत न मिलने के खिलाफ भीम आर्मी पहुंची बॉम्बे हाई कोर्ट

भीमा कोरेगांव हिंसा की बरसी: सभा की इजाजत न मिलने के खिलाफ भीम आर्मी पहुंची बॉम्बे हाई कोर्ट

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

पुलिस ने कहा है कि 2 जनवरी तक भीम आर्मी महाराष्ट्र में कोई सभा नहीं कर सकती है. इसके अलावा भीम आर्मी के सभी पदाधिकारियों को 2 जनवरी तक भीमा कोरेगांव जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

    भीम आर्मी ने सभा की इजाजत न मिलने के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. ये यचिका वेकेशन बेंच में दायर की गई है. बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा की बरसी पर पुणे में होने वाली भीम आर्मी की सभा रद्द कर दी गई है. भीम आर्मी ने सभा को लेकर पुलिस से इजाजत मांगी थी, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया. अब स्टेज को पुणे विद्यापीठ से हटाया जा रहा है.

    पुलिस ने कहा है कि 2 जनवरी तक भीम आर्मी महाराष्ट्र में कोई सभा नहीं कर सकती है. इस बीच पुलिस ने कहा है कि भीम आर्मी के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं और नेताओं को 2 जनवरी तक हर दिन पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी.

    इसके अलावा भीम आर्मी के सभी पदाधिकारियों को 2 जनवरी तक भीमा कोरेगांव जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

    जिले में एक जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के समीप हुई हिंसा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पुलिस ने 1200 से अधिक लोगों के खिलाफ एहितायाती कार्रवाई की है. पुलिस ने  शनिवार को बताया कि इस कार्रवाई में कुछ लोगों को क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकना और कुछ अन्य को जिला बदर करना शामिल है.

    जिन लोगों को कोरेगांव भीमा व आसपास के क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोका गया है उनमें दक्षिणपंथी हिन्दू नेता मिलिंद एकबोटे व वाम झुकाव वाले सांस्कृतिक समूह कबीर कला मंच के सदस्य शामिल हैं.

    क्या थी भीमा-कोरेगांव हिंसा?
    भीमा-कोरेगांव महाराष्ट्र के पुणे जिले में है. इस छोटे से गांव से मराठा का इतिहास जुड़ा है. 200 साल पहले यानी 1 जनवरी, 1818 को ईस्ट इंडिया कपंनी की सेना ने पेशवा की बड़ी सेना को कोरेगांव में हरा दिया था. पेशवा की सेना का नेतृत्व बाजीराव II कर रहे थे. बाद में इस लड़ाई को अनुसूचित जाति जनजाति के इतिहास में एक खास जगह मिल गई. बीआर आंबेडकर को फॉलो करने वाले  इस लड़ाई को राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की लड़ाई नहीं कहते हैं. नुसूचित जाति जनजाति  इस लड़ाई में अपनी जीत मानते हैं. उनके मुताबिक, इस लड़ाई में उनके खिलाफ अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी.

    इस साल जनवरी में यहां क्या हुआ था और क्यों भिड़की थी हिंसा?
    साल 2018 इस युद्ध का 200वां साल था. ऐसे में इस बार यहां भारी संख्या में अनुसूचित जाति जनजाति  समुदाय के लोग जमा हुए थे. जश्न के दौरान इनके और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस दौरान इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए थे.  इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी.

    Tags: Maharashtra, Mumbai, Police, Pune

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