कंगना रनौत केस: राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी बोले- उद्धव सरकार से मेरा कोई टकराव नहीं
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कंगना रनौत केस: राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी बोले- उद्धव सरकार से मेरा कोई टकराव नहीं
महाराष्ट्र सरकार से मेरा कोई टकराव नहीं, बोले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshiyarim) ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के प्रधान सलाहकार अजय मेहता को बुधवार को तलब किया था, जब बंगले का अवैध हिस्सा ढहाया गया था. सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने इसे लेकर उन्हें अपनी नाराजगी से अवगत कराया था.

  • भाषा
  • Last Updated: September 12, 2020, 12:12 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Governor Bhagat Singh Koshiyarim) ने शुक्रवार को इस बात से इनकार किया कि उन्होंने यहां अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बंगले में अवैध निर्माण ढहाये जाने के बारे में नाराजगी प्रकट की थी. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मौजूदा शिवसेना नीत सरकार से कोई समस्या नहीं है और उन्होंने शासन में हस्तक्षेप नहीं किया है. राज्यपाल ने कहा, 'मैं उद्धव जी से बात करता रहूंगा.'

गौरतलब है कि सूत्रों ने कहा था कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रधान सलाहकार अजय मेहता को बुधवार को तलब किया था, जब बंगले का अवैध हिस्सा ढहाया गया था. सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ने इसे लेकर उन्हें अपनी नाराजगी से अवगत कराया था. यहां शुक्रवार को संवाददाताओं के सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा, 'मैंने कहीं भी कोई नाराजगी प्रकट नहीं की.' बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने उपनगरीय बांद्रा में कंगना के पाली हिल स्थित बंगले में उसकी (नगर निकाय की) मंजूरी के बिना कथित तौर पर किये गये अवैध निर्माण को बुधवार सुबह ध्वस्त कर दिया था.

कोश्यारी ने यह भी कहा कि विधान परिषद में मनोनीत किये जाने वाले सदस्यों की सूची भी उन्हें अब तक नहीं मिली है. राज्य विधानमंडल के उच्च सदन विधान परिषद में राज्यपाल के कोटा के तहत मनोनीत 12 मौजूदा सदस्यों (एमएलसी) का कार्यकाल जून में खत्म हो गया. उन्होंने कहा, 'मुझे सिफारिश किये गये नामों की सूची नहीं मिली है.' अब तक राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में बात करते हुए कोश्यारी ने कहा, 'मैंने महाराष्ट्र के हर इलाके का दौरा करने की कोशिश की. 35 जिलों में मैंने 20 की यात्रा की.'



कोश्यारी ने कहा कि उन्होंने जब पदभार संभाला तब बेमौसम और अत्यधिक बारिश से किसान त्रस्त थे. साथ ही विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक अस्थिरता को लेकर राष्ट्रपति शासन लागू था. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस अवधि के दौरान किसानों को 8,000 रुपये प्रति हेक्टेयर राहत सहायता स्वीकृत की.
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