पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फड़णवीस ने केंद्र के कृषि विधेयकों की प्रशंसा की

पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फड़णवीस ने कृषि विधेयकों की तारीफ करते हुए शिवसेना पर निशाना साधा.
पूर्व मुख्यमंत्री देंवेंद्र फड़णवीस ने कृषि विधेयकों की तारीफ करते हुए शिवसेना पर निशाना साधा.

फड़णवीस (Fadnavis ) ने कृषि विधेयकों की तारीफ करते हुए कहा कि, संसद (Parliament) से पारित विधेयकों से किसानों को संविदा कृषि करने एवं कृषि क्षेत्र में निवेश लाने की अनुमति मिलेगी तथा किसानों (Farmer) का बोझ भी घटेगा.

  • भाषा
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:12 PM IST
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नागपुर. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने सोमवार को कहा कि, हाल ही में राज्यसभा से पारित कृषि विधेयकों का किसान नहीं , बल्कि निहित स्वार्थ वाले लोग विरोध कर रहे हैं. फड़णवीस ने कहा कि, कई नेता इस क्षेत्र में अपनी प्रासंगिकता बनाये रखने के लिए इनका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2109 के अपने घोषणापत्र में किसानों को जो आश्वासन दिये थे, उन्हें केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पूरा किया.

फड़णवीस ने कृषि विधेयकों की तारीफ करते हुए कहा कि, संसद से पारित विधेयकों से किसानों को संविदा कृषि करने एवं कृषि क्षेत्र में निवेश लाने की अनुमति मिलेगी तथा किसानों का बोझ भी घटेगा क्योंकि उसमें कई कर एवं उपकर हटा दिये गये हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा , ‘किसान अब अपनी उपज बिना कोई कर या उपकर चुकाये अपनी पसंद से बेच सकते हैं. ये विधेयक क्रांतिकारी है.’ उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे पर भी हमला किया और दावा किया कि, शिवसेना का कृषि क्षेत्र पर कोई रूख ही नहीं है. और वह किसानों की मांगों एवं अधिकारों को लेकर भ्रमित है.





वहीं हरियाणा और पंजाब में किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को मामते हुए रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाने का फैसला किया है. दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया कि फसलों पर पहले की तरह एमएसपी चलने वाली हैं. किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही मोदी सरकार ने कृषक उत्पादों की बिक्री के लिए राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) कानून के तहत संचालित मंडियों के अलावा एक वैकल्पिक चैनल मुहैया करने के लिए नया कानून बनाया है. नये कानून में गेहूं, चावल या अन्य मोटा अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, शाक-सब्जी, फल, मेवा, मसाले, गन्ना और कुक्कुट, सूअर, बकरी, मछली और डेरी उत्पाद सहित ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनका नैसर्गिक या प्रसंस्कृत रूप में मानव उपभोग करता है, उनको कृषक उत्पाद कहा गया है.
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