लाइव टीवी

महाराष्‍ट्र सरकार का बड़ा फैसला, भीमा कोरेगांव और मराठा आंदोलन के 808 केस वापस
Maharashtra News in Hindi

News18Hindi
Updated: February 27, 2020, 5:56 PM IST
महाराष्‍ट्र सरकार का बड़ा फैसला, भीमा कोरेगांव और मराठा आंदोलन के 808 केस वापस
महाराष्‍ट्र के मंत्री ने दी जानकारी.

महाराष्‍ट्र सरकार में मंत्री अनिल देशमुख ने गुरुवार को केस वापस लेने की जानकारी दी है. भीमा कोरेगांव से जुड़े 649 मामलों में से 348 मामले महाराष्‍ट्र सरकार वापस ले रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2020, 5:56 PM IST
  • Share this:
नई दिल्‍ली. महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए भीमा कोरेगांव (Bhima Koregaon case) और मराठा आंदोलन (Maratha Andolan) से जुड़े कई मामलों को वापस लेने की घोषणा की है. महाराष्‍ट्र सरकार में मंत्री अनिल देशमुख ने जानकारी दी है कि भीमा कोरेगांव केस से जुड़े कुल 649 मामलों में से 348 मामले महाराष्‍ट्र सरकार वापस ले रही है. साथ ही मराठा आंदोलन के कुल 548 केस में से 460 मामलों को भी सरकार ने वापस लेने की घोषणा की है.

बता दें कि कोरेगांव भीमा जांच आयोग ने 2018 को हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार को तलब करने का निर्णय किया है. न्यायिक पैनल के वकील आशीष सतपुते के अनुसार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेएन पटेल ने टिप्पणी की थी कि पवार ने पैनल के समक्ष हलफनामा दाखिल किया है और उन्हें तलब किया जाएगा. उन्होंने कहा था, 'इसके लिए समन जारी किया जाएगा.'

 



तलब हो सकते हैं पवार
वकील के अनुसार सुनवाई के अंतिम चरण में आयोग पवार को तलब कर सकता है. इस माह की शुरुआत में शिवसेना नीत राज्य सरकार ने आयोग का कार्यकाल आठ अप्रैल तक बढ़ा दिया है और आयोग से रिपोर्ट पेश करने को कहा है. सामाजिक समूह विवेक विचार मंच के सदस्य सागर शिंदे ने पिछले सप्ताह आयोग के समक्ष आवेदन दायर किया था. इस आवेदन में उन्होंने पवार को दो सदस्यीय आयोग के समक्ष गवाही देने के लिए बुलाने का अनुरोध किया है.

2017 में भड़काऊ भाषण देने का आरोप
पुणे पुलिस के अनुसार 31 दिसंबर, 2017 को माओवादियों ने समर्थन से पुणे में एल्गार परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए गए थे, जिसके कारण अगले दिन जिले में कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक में जातीय हिंसा हुई थी. दक्षिणपंथी धड़े के नेता मिलिंद एकबोटे और सांभाजी भीड़े कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में आरोपी हैं.

कई लोगों को गिरफ्तार किया गया
पुणे पुलिस ने एल्गार परिषद मामले में माओवादियों से संबंध के आरोप में वामपंथी विचारधारा के सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फेरीरा, वरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को गिरफ्तार किया है. पवार ने इससे पहले इन गिरफ्तारियों को ‘‘गलत’’ और ‘‘बदला लेने के इरादे से’’ की गई गिरफ्तारी बताया था और पुणे पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की थी.

फडणवीस ने लगाए थे आरोप
बीजेपी नेता और महाराष्‍ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया था कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार कोई ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में ‘‘हिंदुत्ववादियों’’ (हिंदू समर्थकों) को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था, 'मेरे कार्यकाल के दौरान राज्य के गृह विभाग ने कोरेगांव भीमा हिंसा मामले में व्यापक जांच की थी.' फडणवीस के कार्यकाल के दौरान गृह विभाग का प्रभार भी उनके पास ही था. उन्होंने कहा था, 'हिंसा पर राकांपा प्रमुख शरद पवार की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि इसके पीछे हिंदुत्ववादियों का हाथ है। लेकिन पुलिस को उनके दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला.'
(इनपुट एजेंसी से भी)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए महाराष्ट्र से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 27, 2020, 5:40 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर