'मराठा चक्रव्यूह' में फंसे उद्धव ठाकरे सरकार के सामने चौतरफा आरक्षण की मांग

एससी-एसटी मामले पर कांग्रेस के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितिन रावत, मंत्री बालासाहेब थोराट, मंत्री यशोमती ठाकुर और मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. (फाइल फोटो)

एससी-एसटी मामले पर कांग्रेस के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितिन रावत, मंत्री बालासाहेब थोराट, मंत्री यशोमती ठाकुर और मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की. (फाइल फोटो)

Maratha Reservation: 7 मई 2021 को सरकार ने शासनादेश निकाल कर कहा कि राज्य के भीतर प्रमोशन में एससी एसटी को आरक्षण नहीं मिलेगा, जिसके बाद सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने ही सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है.

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मुंबई. महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इन दिनों आरक्षण के चक्रव्यूह में बुरी तरीके से फंस गए हैं. सुप्रीम कोर्ट से मराठा आरक्षण का झटका लगने के बाद अब सरकार के लिए नई मुसीबत प्रमोशन में एससी एसटी के आरक्षण को हटाए जाने के बाद पैदा हुआ है. वहीं ओबीसी समाज ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मराठा को ओबीसी के कोटे से आरक्षण देने की कोशिश की गई, तो ओबीसी समाज सड़कों पर उतर जाएगा. सरकार के लिए आरक्षण की मुसीबत धनगर समाज बना हुआ है, जिन्होंने चेतावनी दी है कि अगर धनगर को आरक्षण नहीं मिला तो वह सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे यानी जिस ठाकरे सरकार के सामने कोरोना का एक बड़ा युद्ध सामने खड़ा है, उसी समय आरक्षण के चौतरफा चक्रव्यूह से सरकार पूरी तरीके से गिर गई है.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा मराठा आरक्षण को खत्म किए जाने के बाद मराठा सड़कों पर हैं, लगातार प्रदर्शन हो रहा है और छत्रपति संभाजी राजे ने शरद पवार और राज ठाकरे के साथ-साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात की है और मराठों के भीतर आरक्षण रद्द किए जाने के आक्रोश को सबके सामने रख दिया है, साथ ही सरकार से मराठों को तुरंत आरक्षण देने की मांग की है. मराठा आरक्षण को ओबीसी कोटे से दिए जाने की सुगबुगाहट ने ओबीसी समाज को आक्रोशित कर दिया है.

ओबीसी समाज ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मराठों को ओबीसी के आरक्षण के भीतर शामिल करने की कोशिश की गई तो ओबीसी समाज शांत नहीं बैठेगा और सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगा. मराठा और ओबीसी के बीच आरक्षण को लेकर तनाव बढ़ गया है. इस बीच राज्य सरकार के 7 मई 2021 के एक शासनादेश ने एससी-एसटी को भी सरकार के खिलाफ कर दिया है. 7 मई 2021 को सरकार ने शासनादेश निकाल कर कहा कि राज्य के भीतर प्रमोशन में एससी एसटी को आरक्षण नहीं मिलेगा, जिसके बाद सरकार की सहयोगी कांग्रेस ने ही बगावत का बिगुल फूंक दिया है.

सरकार में मंत्री और कांग्रेस के एससी-एसटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नितिन राऊत ने सरकार को दो टूक कह दिया है कि 7 मई का शासनादेश राज्य सरकार को रद्द करना पड़ेगा, क्योंकि उस शासनादेश से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों का हनन हो रहा है और जो शासनादेश निकाला गया, वह कांग्रेस को संज्ञान में लिए बिना ही निकाला गया. कांग्रेस के नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितिन रावत, मंत्री बालासाहेब थोराट, मंत्री यशोमती ठाकुर और मंत्री वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की.
इसके बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस पूरे मामले को लॉ एंड ज्यूडिशरी के पास भेज दिया है. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार मीटिंग करेंगे, जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री भी इस बारे में एक मीटिंग करेंगे. हालांकि इस बीच धनगर समाज ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. धनगर समाज ने भी सरकार को कहा है कि उन्हें भी आरक्षण दिया जाना चाहिए, अगर धनगर समाज को आरक्षण नहीं मिला तो सरकार के खिलाफ पूरे प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे.

वहीं, राज्य में आरक्षण के मुद्दे पर चौतरफा घिरे होने पर राज्य के मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि राज्य के भीतर पैदा हुए हालात के पीछे बीजेपी है, हालांकि सरकार इस मामले को हल करने की कोशिश कर रही है.

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