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मनसे के 'हिंदुत्‍ववादी एजेंडे' से लड़ने को शिवसेना आजमा रही मराठी भाषा की रणनीति
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Updated: February 27, 2020, 6:18 PM IST
मनसे के 'हिंदुत्‍ववादी एजेंडे' से लड़ने को शिवसेना आजमा रही मराठी भाषा की रणनीति
शिवसेना मनसे के खिलाफ आजमा रही मराठी भाषा का फॉर्म्‍यूला.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में विधानसभा के भीतर मराठी भाषा बिल पास कर दिया गया है. इसके तहत कक्षा एक से 10 से मराठी (Marathi Language) पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है.

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  • Last Updated: February 27, 2020, 6:18 PM IST
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अभिषेक पाण्डेय
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में 'मराठी भाषा' (Marathi) दिन के अवसर पर विधानसभा के भीतर मराठी भाषा बिल पास कर दिया गया है. इस बिल के जरिए शिवसेना की कोशिश है कि मराठी मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में राजनीति की जाए और मराठी वोट बैंक पर अपना कब्जा जमाया जा सके. इस बिल में प्रमुख तौर पर कहा गया है कि एक से लेकर 10 क्‍लास तक के सभी माध्यम यानी चाहे वह सीबीएसई बोर्ड हो या आईसीएससी बोर्ड हो, सभी माध्यम में मराठी भाषा को अनिवार्य कर दिया जाए.

इसके साथ ही सभी स्कूलों के लिए यह भी कहा गया है कि किसी भी स्कूल में इस तरीके का बोर्ड ना लगाया जाए कि इस स्कूल में मराठी भाषा नहीं बोली जाए या मराठी में बात नहीं किया जाना चाहिए. यानी कि शिवसेना की कोशिश है कि मराठी मुद्दे को लेकर एक बार फिर महाराष्ट्र में राजनीति को नई धार दी जा सके.

शिवसेना को लगता है कि जिस तरीके से पिछले कुछ दिनों से मनसे प्रमुख राज ठाकरे हिंदुत्व एजेंडे को लेकर सामने आए हैं और कट्टर हिंदुत्ववादी एजेंडे को लेकर इन दिनों सक्रिय होकर अलग-अलग जगहों पर रैलियां कर रहे हैं और अपनी छवि हिंदुत्ववादी बना रहे हैं, ऐसे में शिवसेना उस हिंदुत्ववादी एजेंसी को काउंटर करने के लिए मराठी भाषा एक से 10 क्‍लास तक अनिवार्य करने की नई चाल चली है.



 



कामकाज में भी मराठी के लिए कोशिश जारी
शिवसेना की तरफ से मंत्री उदय सामंत सामने आए और उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मराठी भाषा को लोग उपेक्षित समझते हैं. उसको देखते हुए मराठी भाषा एक से 10 क्‍लास तक अब अनिवार्य कर दी गई है. साथ ही तमाम सारे व्यावहारिक बोलचाल और व्यावहारिक कामकाज के लिए भी मराठी भाषा भी उपलब्ध हो, इसके लिए शिवसेना की कोशिश लगातार जारी है.

बंद स्‍कूलों को भी खोला जाए
वहीं दूसरी तरफ शिवसेना के सुर से सुर मिलाते हुए शिक्षक कोटे से एमएलसी कपिल पाटिल ने शिवसेना के मराठी मुद्दे को समर्थन करते हुए कहा कि एक से 10 क्‍लास तक मराठी भाषा अनिवार्य करना अच्छी बात है. साथ ही शिवसेना को चाहिए कि तमाम मराठी माध्यम के स्कूल, जो बंद पड़े हैं, उनको भी तुरंत खोला जाए. तभी इस नए बिल को लेकर सकारात्मक रवैया सामने आएगा.

बीजेपी की तरफ से सुधीर मुनगंटीवार सामने आए और उन्होंने कहा कि शिवसेना सिर्फ मराठी भाषा पर राजनीति न करे बल्कि अगर उसे सही में मराठी भाषा लागू करनी है तो सबसे पहले उसे अधिवेशन से शुरुआत करनी चाहिए और विधानसभा व विधानपरिषद अधिवेशन में जितने भी सदस्य हैं उनके परिवारों को और उनके बच्चों को मराठी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाना चाहिए.

बीजेपी लगातार लगा रही आरोप
शिवसेना और बीजेपी दोनों मराठी भाषा के मुद्दे पर एक तो हो गए हैं कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा लागू होनी चाहिए लेकिन बीजेपी लगातार शिवसेना पर आरोप लगा रही है कि शिवसेना सिर्फ राजनीति के लिए मराठी भाषा अनिवार्य कर रही है. जबकि अगर उसे सही में अनिवार्य करना है तो कहीं ना कहीं मराठी माध्यम के स्कूलों में विधायकों को अपने बच्चे को पढ़ाना चाहिए यानी साफ है कि जिस तरीके से मनसे इन दिनों हिंदुत्ववादी मुद्दे को लेकर आगे बढ़ रही है उसको काउंटर करने के लिए शिवसेना इस तरीके की नई रणनीति पर काम कर रही है.

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First published: February 27, 2020, 6:15 PM IST
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