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कृषि कानूनः उद्धव ठाकरे और शरद पवार किसानों के समर्थन में 25 जनवरी को करेंगे प्रदर्शन

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और सत्तारूढ़ महा विकास आघाड़ी (शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा गठबंधन) के नेता भी उसमें हिस्सा लेंगे. (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और सत्तारूढ़ महा विकास आघाड़ी (शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा गठबंधन) के नेता भी उसमें हिस्सा लेंगे. (फाइल फोटो)

Farmers Protest against New Farm Laws: केंद्र और 41 किसान यूनियनों के बीच पिछले नौ दौर की औपचारिक वार्ता से दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों को समाप्त करने के लिए कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 6:35 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राकांपा प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे. राज्य के मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी. कुछ किसान संगठनों ने मुंबई में 23 से 25 जनवरी तक विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है. राकांपा ने राष्ट्रीय प्रवक्ता मलिक ने कहा, ‘‘शरद पवार 25 जनवरी को (दक्षिण मुंबई के) आजाद मैदान में होने वाले प्रदर्शन में भाग लेंगे. राकांपा ने कृषि कानूनों का पहले भी विरोध किया है. मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ महा विकास आघाड़ी (शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा गठबंधन) के नेता भी उसमें हिस्सा लेंगे.’’

उधर, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर मंगलवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि कृषि क्षेत्र पर तीन-चार पूंजीपतियों का एकाधिकार हो जाएगा, जिसकी कीमत मध्यम वर्ग और युवाओं को चुकानी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की कोशिशों के बावजूद किसान थकने वाले नहीं हैं, क्योंकि 'वे प्रधानमंत्री से ज्यादा समझदार हैं'. बता दें कि केंद्र और 41 किसान यूनियनों के बीच पिछले नौ दौर की औपचारिक वार्ता से दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय से जारी विरोध प्रदर्शनों को समाप्त करने के लिए कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है, क्योंकि किसान यूनियन तीनों कानूनों को पूरी तरह से निरस्त करने की अपनी मुख्य मांग पर अड़े हुए हैं.





सुप्रीम कोर्ट ने बीते 11 जनवरी को अगले आदेश तक तीन कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी थी और गतिरोध के समाधान के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था. हालांकि भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने पिछले सप्ताह खुद को समिति से अलग कर लिया था. किसान संगठनों ने कहा है कि शांतिपूर्वक ट्रैक्टर रैली निकालना उनका संवैधानिक अधिकार है और 26 जनवरी को प्रस्तावित इस रैली में हजारों लोग भाग लेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शनकारी किसानों के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश के बारे में फैसला करने का पहला पहला अधिकार दिल्ली पुलिस का है.
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान पिछले एक महीने से भी अधिक समय से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.

केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के बीच 10वें दौर की वार्ता 20 जनवरी को होनी निर्धारित है.
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