महाराष्ट्र सरकार ने परमबीर के आरोपों की जांच के लिए न्यायाधीश की नियुक्ति की

न्यायाधीश कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. फाइल फोटो

न्यायाधीश कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. फाइल फोटो

Maharashtra: एनआईए कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या में भी वाजे की कथित भूमिका की जांच कर रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 5:43 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए मंगलवार को उच्च न्यायालय के एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की. एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि न्यायाधीश कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. मुंबई के पुलिस आयुक्त पद से तबादले के बाद सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य दिया था. हालांकि देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया था. एनआईए कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या में भी वाजे की कथित भूमिका की जांच कर रही है.

चांदीवाल को यह जांच करने के लिए कहा गया है कि 20 मार्च को परमबीर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में यह स्थापित करने के लिए कोई सबूत है कि देशमुख या उनके कार्यालय के किसी अधिकारी ने कोई अपराध या कदाचार किया है या नहीं. इसके साथ ही आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि क्या परमबीर सिंह के आरोपों में कोई सच्चाई भी है या नहीं, और क्या इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो या अन्य जांच एजेंसियों से पड़ताल कराने की आवश्यकता है. इसके अलावा चांदीवाल इस मामले में अपनी सिफारिश भी दे सकते हैं कि सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए. बता दें कि ये पूरा मामला बंबई उच्च न्यायालय द्वारा मुंबई पुलिस के पूर्व प्रमुख की उस जनहित याचिका पर सुनवाई के एक दिन पहले आया है, जिसमें महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया है. सिंह ने आरोप लगाया है कि देशमुख ने पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को बार एवं रेस्तरां से 100 करोड़ रुपए एकत्र करने को कहा था. जनहित याचिका में राज्य में पुलिस स्थानांतरण और पदस्थापना में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया गया है.

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सिंह की ओर से मंगलवार को पेश हुए वरिष्ठ वकील विक्रम ननकानी ने मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया और इस पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया. न्यायमूर्ति दत्ता ने ननकानी से पूछा कि याचिका में क्या अनुरोध किया गया गया है और क्या यह सुनवाई के योग्य है. ननकानी ने कहा कि याचिका में राज्य के एक मंत्री के खिलाफ एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के लगाए गंभीर आरोपों की सीबीआई जांच कराने का मुख्य रूप से अनुरोध किया गया है. ननकानी ने कहा, ‘‘हम याचिका के सुनवाई योग्य होने के संबंध में अदालत को अपनी दलीलों से संतुष्ट करेंगे.’’ इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी.
आईपीएस अधिकारी ने शुरुआत में उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसने मामले को गंभीर बताते हुये कहा था कि उन्हें पहले उच्च न्यायालय जाना चाहिए. परमबीर सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर देशमुख पर लगाए गए आरोपों को दोहराया और राकांपा नेता के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से “तत्काल, पूर्वाग्रह रहित और निष्पक्ष” जांच कराने का अनुरोध किया.

सिंह ने उच्च न्यायालय से सीबीआई को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया कि वह देशमुख के आवास से इस साल की शुरुआत की सीसीटीवी फुटेज उसे ‘‘नष्ट’’ किए जाने से पहले सुरक्षित करे. इसके साथ ही याचिका में यह अनुरोध भी किया गया है कि वह राज्य सरकार को यह निर्देश भी दे कि वह आईपीएस अधिकारी रश्मि शुक्ला से मार्च 2020 से हुए सभी संवाद को रिकॉर्ड के तौर पर पेश करे. जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि शुक्ला ने पिछले साल फरवरी में देशमुख के खिलाफ पुलिसकर्मियों की तैनाती और स्थानांतरण में कदाचार का आरोप लगाया था और अपने वरिष्ठों को भी इस बारे में जानकारी दी थी, लेकिन इसके बाद जल्द ही उनका स्थानांतरण हो गया.

इसमें कहा गया कि अदालत को यह सुनिश्चित करने के लिये आदेश पारित करना चाहिए कि भविष्य में किसी पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण “किसी नेता के आर्थिक लाभ” के लिये न हो. जनहित याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि देशमुख ने दादरा नगर हवेली के सांसद मोहन देलकर की कथित खुदकुशी मामले की जांच में हस्तक्षेप किया और उन पर मामले में भाजपा नेताओं को फंसाने के लिये दबाव डाला.

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने देशमुख पर पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण एवं तैनाती में “भ्रष्टाचार” में शामिल होने का आरोप लगाया है.
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